Health Alert in Scorching heat: 40 डिग्री में तपिश का चल रहा टॉर्चर, सांस की बीमारी से जुड़े 100 मरीजों की ओपीडी में 20 अस्थमा वाल
Health Alert in Scorching heat: अप्रेल और मई में तापमान लगातार 40 डिग्री से अधिक पर बना हुआ है। ऐसे में डिहाइड्रेशन के अलावा गंभीर बीमारियों के मरीजों को भी दिक्कतें हो रही है, जो पहले नजर नहीं आती थी। आमतौर पर ठंड व बारिश में ज्यादा तकलीफ देने वाला अस्थमा अब अधिक तापमान में भी परेशानी बन रहा है। अस्पताल में ऐसे मरीज आ रहे हैं जो अचानक से अस्थमा बढऩे या सांस लेने में तकलीफ से परेशान हैं।
डॉक्टर भी यह देखकर हैरान हैं। डॉक्टर्स के अनुसार इस सीजन में अगर सांस की बीमारी (Asthama Attack ) से जुड़े 100 मरीज ओपीडी में आ रहे हैं तो उनमें से 20 अस्थमा वाले हैं। गर्मी के दौरान किडनी, हार्ट, पाचन, आंख व टीबी से संबंधित बीमारियों के मरीज भी प्रभावित हुए हैं।
22 वर्षीय युवक को अस्थमा (Health Alert) की दिक्कत है। पढ़ाई के दौरान अचानक से अस्थमा बढ़ने लगा। वह दवाई केवल ठंड-बारिश में लेता था, क्योंकि इसके अलावा कभी जरूरत नहीं पड़ी। डॉक्टर से पता चला कि अधिक गर्मी से श्वास नली में सिकुड़न होने लगी थी। इसके बाद इलाज से हालत सामान्य हुई।
45 वर्षीय महिला को गर्मी के कारण सर्दी-जुकाम हुआ, जिससे अस्थमा (Health Alert) बिगड़ गया। इतनी गर्मी की शरीर को आदत नहीं होती। ऐसे में एलर्जी से नाक की नस फूल गई। डॉक्टर्स ने हाई डोज दवाई दी तब नियंत्रण हो सका।
पिछले कुछ दिनों से इंदौर समेत प्रदेशभर में रात का तापमान 25 से 30 डिग्री के बीच है, जो सामान्य से अधिक है। ऐसे में कूलर पंखे भी दम नहीं भर रहे हैं। वार्म नाइट होने से बेचैनी व उमस के कारण नींद प्रभावित हो रही है। ऐसे मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं। इन्हें रात में नींद नहीं आने से दिन में काम के दौरान थकान महसूस होती है।
आंख: इवेपरेटिव ड्राय आई की बढ़ी समस्या ओपीडी:
100 में से 30 फीसदी स्कूल ऑफ एक्सीलेंस फॉर आई में ऐसे मरीज पहुंच रहे हैं जिन्हें आंख लाल या जलन (Health Alert) की समस्या हो रही है। डॉ. मीता जोशी ने बताया, आमतौर पर ओपीडी में ये समस्या लेकर आने वाले मरीजों की संख्या 2 से 5 फीसदी तक रहती है, लेकिन 15 दिन में यह 20 फीसदी तक हो गई है। इसका प्रमुख कारण तेज धूप में ज्यादा समय रहना है। इससे बचने के लिए हेलमेट, चश्मा लगाएं। सीधे धूप के संपर्क से आंख को बचाएं।
किडनी : आम-तरबूज बढ़ा रहा पोटेशियम लेवल ओपीडी :
100 में से 50 फीसदी गर्मी में पानी और इलेक्ट्रोलाइट का तेजी से नुकसान होता है। किडनी के मरीजों की किडनी पर्याप्त पानी फिल्टर नहीं कर पाती। पथरी व पोटेशियम लेवल बढऩे के केस में इजाफा हुआ है। जिन्हें किडनी की बीमारी है वे आम व तरबूज अधिक सेवन करते तो पोटेशियम लेवल बढ़ जाता है। पानी की कमी से एक्यूट किडनी प्रॉब्लम (Health Alert) वाले मरीज भी आ रहे हैं। 100 मरीजों में तीनों तरह के मरीज 50 फीसदी हैं। आम दिनों में 15 से 20 फीसदी रहता है।
दिल : गर्मी में असामान्य हो रही धड़कन ओपीडी :
100 में से 20 फीसदी अधिक गर्मी ने दिल से संबंधित बीमारियों के मरीजों की परेशानी भी बढ़ाई है। ऐसे मरीज आ रहे हैं जिनकी धड़कन असामान्य हो रही है। सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के कार्डियक सर्जन डॉ. सुमित ङ्क्षसह ने बताया, अधिक तापमान शरीर की तरलता को प्रभावित करता है, जिससे ब्लड प्रेशर और हृदय की धड़कन असामान्य हो जाती है। गर्मी में डिहाइड्रेशन और इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन से भी हार्ट अटैक या हार्ट फैलियर का खतरा बढ़ जाता है। दिल के मरीज हल्के, ढीले कपड़े पहनें।
गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी : कब्ज, एसिडिटी व गैस्ट्रिक अल्सर वाले मरीज ओपीडी :
100 में से 25 फीसदी पेट और पाचन संबंधित परेशानियों के मरीज भी बढ़े (Health Alert) हैं। सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के डॉ. अमित अग्रवाल ने बताया, पेट और आंतों में पानी की कमी होने पर कब्ज, एसिडिटी और गैस की समस्या बढ़ सकती है। अपच और भूख में कमी के लक्षण भी सामने आ रहे हैं। शरीर ज्यादा पानी खोता है। इससे लिवर और किडनी को ज्यादा काम करना पड़ता है। कुछ मरीज गैस्ट्रिक अल्सर या एसिड रिफ्लक्स की समस्या वाले हैं।
टीबी : धूल व प्रदूषण से बढ़ी परेशानी ओपीडी :
100 में से 20 फीसदी टीबी के मरीजों की इ्यूनिटी कमजोर होती है। गर्म मौसम में धूल और प्रदूषण की अधिकता फेफड़ों पर दबाव डालती है, जिससे खांसी और सांस की दिक्कत बढ़ (Health Alert) सकती है। मनोरमा राजे क्षय रोग अस्पताल में ऐसे टीबी मरीज भर्ती हो रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि टीबी मरीजों को घर में साफ वातावरण रखना चाहिए। दवा समय पर लेना जरूरी है।
बच्चे : पानी कम पीना डिहाइड्रेशन का कारण आइपीडी :
100 में से 40 फीसदी चाचा नेहरू अस्पताल में ओपीडी व आइपीडी में डिहाइड्रेशन से पीडि़त बच्चे पहुंच रहे हैं। शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. निर्भय मेहता ने बताया, अभी ओपीडी पहले की तुलना में कम है, लेकिन जो बच्चे आ रहे हैं उनमें सबसे अधिक डिहाइड्रेशन, उल्टी, दस्त, सर्दी से पीडि़त हैं। अधिकतर माता-पिता बच्चों को गर्मी में पर्याप्त पानी पिलाने पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। दोपहर 11 से 5 बजे तक बच्चों को घर से बाहर (Health Alert) न खेलने दें। छोटे बच्चे गर्मी में ज्यादा संवेदनशील होते हैं। शरीर का तापमान तेजी से बढ़ सकता है, जिससे सांस की दिक्कत भी हो सकती है।
बुजुर्ग : अधिक गर्मी से चक्कर व कमजोरी से हो रहे परेशान ओपीडी :
100 में से 60 फीसदी बुजुर्गों की थर्मोरिगुलेशन प्रणाली कमजोर (Health Alert) होती है, जिससे शरीर का तापमान नियंत्रित करना मुश्किल हो जाता है। एमवायएच के मेडिसिन विभाग के डॉ. अशोक ठाकुर ने बताया, ओपीडी में बुजुर्ग डिहाइड्रेशन, चक्कर की परेशानी लेकर पहुंच रहे हैं। डिहाइड्रेशन, स्ट्रोक, ब्लड प्रेशर में बदलाव और हृदय संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। उन्हें धूप में बाहर निकलने से बचना चाहिए और पानी नियमित पीना चाहिए।