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‘सोना’ खरीदने के पैसे नहीं तो ट्राई करें ये ज्वैलरी, इंदौर में अचानक बढ़ी डिमांड

MP News: सोने की बढ़ती कीमतों और सरकारी नीतियों के असर से लोग अब चांदी पर गोल्ड पॉलिश और आर्टिफिशियल ज्वेलरी की ओर रुख कर रहे हैं।

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Gold-Polished Jewelry

Gold-Polished Jewelry (Photo Source: AI Image)

MP News: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का यह कहना राष्ट्रहित के लिए कोई भी साल भर तक सोना नहीं खरीदे का असर सराफा बाजार में नजर आने लगा है। बीते सप्ताह से बाजार में चांदी की ज्वेलरी बिकने लगी है इस पर गोल्ड की पालिश होने से यह ओरिजनल सी लगती है। इसके साथ ही शहर में गुजरात से आने वाली आर्टिफिशियल ज्वेलरी का मार्केट बढ़ गया है।

प्रधानमंत्री की घोषणा और बढ़ती महंगाई के असर से अब लोग भारी सोने की ज्वेलरी की जगह चांदी पर गोल्ड पॉलिश करवाकर पहनना पसंद कर रहे हैं। वरिष्ठ कारोबारी सचिन सोनी के अनुसार पहले जहां आर्टिफिशियल ज्वेलरी केवल फैशन तक सीमित थी, वहीं अब सिल्वर बेस पर गोल्ड पॉलिश की ज्वेलरी एक बेहतर और किफायती विकल्प बनकर सामने आ रही है। इससे ग्राहकों को कम कीमत में गोल्ड जैसा लुक मिल रहा है।

चांदी पर माइक्रोन गोल्ड पॉलिश

कारोबारी अजय लाहोटी के अनुसार सोने की लगातार बढ़ती कीमतों ने आम लोगों का बजट बिगाड़ा है। शादी और त्योहारों में लोग अब हल्के और सुरक्षित विकल्प तलाश रहे हैं। चांदी पर माइक्रोन गोल्ड पॉलिश वाली ज्वेलरी की मांग तेजी से बढ़ रही है। आर्टिफिशियल और इमिटेशन ज्वेलरी उद्योग को नया अवसर मिला है।

सिल्वर विद गोल्ड फिनिश

कारोबारी बसंत सोनी के अनुसार आने वाले समय में "सिल्वर विद गोल्ड फिनिश" ज्वेलरी मिडिल क्लास और युवाओं की पहली पसंद बन सकती है। इसकी वापसी में 91.9 के हिसाब से पैसा मिलता है। जबकि आर्टिफिशियल ज्वेलरी की रीसेल वैल्यू कुछ भी नहीं होती।

भविष्य होगा प्रभावित

पीएम की घोषणा से सराफा कारोबार का वर्तमान नहीं भविष्य प्रभावित होगा। व्यापारिक एसो. के अध्यक्ष हुकुम सोनी का कहना है कि अभी कोई असर नहीं पड़ा है भविष्य मे आर्टिफिशल ज्वेलरी की मांग बढ़ेगी यह गोल्ड का विकल्प साबित होगा।

तस्करी को मिल सकता बढ़ावा

वैश्विक स्तर पर बनी अनिश्चितताओं के कारण आने वाले कारोबारी सत्रों में बुलियन बाजार में उतार-चढ़ाव (वोलाटिलिटी) अधिक रहने की संभावना जताई जा रही है। केंद्र सरकार ने सोना और चांदी के आयात पर लगने वाली ड्यूटी 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दी है। सरकार का उद्देश्य विदेशी खरीद कम करना और देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ रहे दबाव को घटाना बताया जा रहा है।

अमेरिका-ईरान तनाव के बीच सरकार के इस फैसले को अहम माना जा रहा है। हालांकि, सराफा कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि टैक्स बढ़ने से तस्करी को बढ़ावा मिल सकता है। उनका इस संबंध में तर्क है कि पहले जब आयात शुल्क कम किया गया था, तब सोने की स्मगलिंग में कमी आई थी।