इंदौर

भागीरथपुरा मामले की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, 7 साल तक फाइल दबाकर बैठे रहे अफसर, पैसा लेते रहे

Bhagirathpura Case Report: इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से हुई जनहानि की जांच रिपोर्ट ने नगर निगम के अफसरों की लापरवाही की पोल खोलकर रख दी है। रिपोर्ट में बताया गया कि शहर की पाइपलाइन बदलने वाली फाइल 7 साल तक अफसर दबाए बैठे थे।
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Sep 05, 2026
indore bhagirathpura case report exposed negligence officials
Indore Bhagirathpura Case Report: हाईकोर्ट में पेश रिपोर्ट ने खोली नगर निगम के अफसरों की पोल (फोटो सोर्स- Patrika)

Indore Bhagirathpura case report:इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से जनहानि के बाद बने जांच आयोग की रिपोर्ट ने नगर निगम के कामकाज के तरीके को कठघरे में खड़ा किया है। हाईकोर्ट में पेश रिपोर्ट में उल्लेख है कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की 2018 में दी रिपोर्ट में बता दिया था कि भागीरथपुरा सहित शहर के कई क्षेत्रों में भूमिगत जल दुषित हो चुका है और पीने योग्य नहीं है। बोर्ड ने यहां के बोरिंग और भूमिगत जलस्रोतों के सैंपल लिए थे, जो फेल हो गए थे। क्षेत्र के भूमिगत जल के दूषित होने की बात सामने आने के बाद भी निगम के अधिकारियों ने सात साल तक पाइप लाइन बदलने को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई।

7 साल तक अटकी पड़ी थी लाइन, 7 महीने में डल गई

दिसंबर 2025 में जब इस क्षेत्र में पानी के कारण लोग बीमार पड़े और उनका निधन हो गया तब अधिकारियों को पूरे क्षेत्र की 25 किलोमीटर की पाइप लाइनों की याद आई। सात साल तक अटकी पड़ी ये लाइनें सात माह में ही डाल दी गई। इस तथ्य को जांच आयोग ने अपनी रिपोर्ट में प्रमुखता दी है। निगम के अधिकारियों की भूमिका को संदिग्ध बताया है। आयोग ने रिपोर्ट के निष्कर्ष वाले 110 पेजों में इस हादसे के लिए अफसरों को उनकी कार्यप्रणाली के चलते जिम्मेदार ठहराया है। माना कि अफसर सही समय पर निर्णय लेकर पाइप लाइनों को लेकर निर्णय लेते तो भागीरथपुरा में लोगों की मौत नहीं होती।

रिपोर्ट पर नहीं दिया ध्यान, पीने योग्य पानी नहीं बताकर की खानापूर्ति

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 2018 में दी अपनी रिपोर्ट अफसरों के सामने रखते हुए चेताया था कि नालों में आने वाली गंदगी और अन्य केमिकल के कारण भूमिगत जल दूषित हो रहा है। कहा था कि कई रहवासी क्षेत्रों में लोग इस पानी का उपयोग रोजमर्रा के काम के साथ ही पीने के लिए भी कर रहे हैं, जो चिंताजनक है। इस रिपोर्ट पर तुरंत एक्शन लेने के बजाए अफसरों ने ध्यान नहीं दिया। वे रिपोर्ट दबाकर बैठे रहे। बाद में कुछ जगह सार्वजनिक बोरिंग को पीने योग्य पानी नहीं बताकर खानापूर्ति कर ली।

पैसा भी आया, लेकिन नहीं दिया ध्यान

रिपोर्ट में नगर निगम की पानी सप्लाई व्यवस्था को लेकर संजीदगी पर भी सवाल खड़े किए हैं। निगम को दो बड़ी योजनाओं में शहर की पेयजल व्यवस्था को लेकर पैसा मिला था। इसमें इंदौर की खराब पाइप लाइनों को बदलने की योजना भी थी। भागीरथपुरा की 25 किलोमीटर की लाइनें भी इसमें शामिल थीं, लेकिन उसके बाद भी अफसरों ने क्षेत्र में खस्ताहाल लाइनों को लेकर कोई काम नहीं किया।

बीमार आने लगे, तब भी नहीं दिया ध्यान

रिपोर्ट में उल्लेख है कि भागीरथपुरा में एक-दो दिन में ही लोग बीमार नहीं पड़े। दिसंबर की शुरुआत से ही क्षेत्र के रहवासी बीमार होने लगे थे। इस पर भी स्वास्थ्य विभाग और निगम के अफसरों ने ध्यान नहीं दिया। जब जनहानि होने लगी तब अफसर इस इलाके में पहुंचे।

जनता को देते रहे सिर्फ आश्वासनों की घुट्टी

जांच रिपोर्ट में रहवासियों के बयान भी हैं। लोगों ने आयोग को बताया था कि भागीरथपुरा के रहवासी दो माह पहले से क्षेत्र में आ रहे गंदे पानी से परेशान थे। इसकी शिकायत उन्होंने जनप्रतिनिधियों सहित अन्य जगह की, लेकिन फिर भी निगम अफसरों ने ध्यान नहीं दिया। आयोग को जनता ने बताया था कि जब भी वे शिकायत करते थे तो उन्हें केवल आश्वासन मिलता था कि इसे दिखवाते हैं।

Updated on:
05 Sept 2026 08:25 am
Published on:
05 Sept 2026 08:25 am