
Indore BJP News- भाजपा में संगठनात्मक नियुक्तियों का दौर चल रहा है जिसमें युवा और महिला मोर्चा के बाद पिछड़ा वर्ग अध्यक्ष को लेकर भी खासी कश्मकश चल रही है। नगर में अपने समर्थक को पद दिलाने से चूके जीतू जिराती अब ग्रामीण क्षेत्र में शिव डिंगू के नाम पर अड़ गए हैं। बताते हैं कि तनातनी के चलते घोषणा अटक गई है। अन्य नाम विधायकों ने रखे हैं। संगठन आपसी सामंजस्य बनाने में जुटा है ताकि बीच का रास्ता निकल जाए।
भाजपा पिछड़ा वर्ग के प्रदेश अध्यक्ष पवन पाटीदार लगातार जिला अध्यक्षों की नियुक्तियां कर रहे हैं। पिछले दिनों उन्होंने निखिल सोनी को इंदौर नगर का अध्यक्ष बना दिया। यहां पर एक दर्जन दावेदार थे जिसमें से आठ का नाम तो पैनल में गया था। उसमें एक नाम विधायक रहे जीतू जिराती के समर्थक निलेश चौधरी का भी था जो नगर भाजपा के पदाधिकारी की दौड़ में भी शामिल थे। नहीं बनने पर उनके खास लोगों ने नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा का पुतला जलाया था और नेम प्लेट पर कालिख पोत दी थी।
पिछड़ा वर्ग मोर्चा नगर अध्यक्ष पद से चुके जिराती अब ग्रामीण में अड़ गए हैं। उन्होंने जिले में शिव डिंगू का नाम रखा है जो कि पाटीदार समाज से आते हैं और पूर्व नगर परिषद राऊ के अध्यक्ष भी रहे हैं। राऊ में भाजपा की पहली परिषद उनके नेतृत्व में ही बनी थी। इसके चलते वे चाहते हैं कि डिंगू को उपकृत किया जाए। इधर, राऊ विधायक मधु वर्मा ने नैनोद के लाखन सिसोदिया का नाम रखा है, जो कि कलोता समाज से आते हैं तो महू विधायक उषा ठाकुर ने धर्मराज कश्यप का नाम दिया है। कश्यप वर्तमान में महामंत्री हैं और उनके खाते में कोई विवाद नहीं है, जबकि वे पूर्व में सरपंच भी रहे हैं।
पिछड़ा वर्ग मोर्चा अध्यक्ष बनने के दावेदारों में देपालपुर विधानसभा में आने वाले माचल के मनोज चौधरी और मौजूदा अध्यक्ष मुकेश पटेल भी हैं जो फिर से बनना चाहते हंै। ये दोनों ही खाती समाज से आते हैं। इसके अलावा दीपक यादव का नाम भी प्रमुखता से है जिसे विधायक रहे आकाश विजयवर्गीय ने आगे बढ़ाया है। वर्तमान में वे भाजयुमो के जिला महामंत्री हैं। राऊ विधानसभा के निवास होने के बावजूद वर्मा व जिराती ने उनका नाम नहीं रखा।
पिछड़ा वर्ग मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष पाटीदार चाहते हैं कि जल्द से जल्द सभी जिला अध्यक्षों की घोषणा होकर उनकी इकाइयों का गठन हो जाए ताकि कार्यकर्ता काम पर जुट जाएं। इसके चलते वे प्रयास कर रहे हैं कि जिला अध्यक्ष श्रवण चावड़ा सभी नेताओं से सहमति बना लें। इधर, चावड़ा भी लगातार प्रयास कर रहे हैं कि बीच का रास्ता निकल जाए। मजेदार बात ये है कि सिसोदिया पर जिराती की कोई आपत्ति नहीं है। ऐसी ही स्थिति कश्यप के नाम पर भी है जिनके नाम पर कोई विवाद नहीं है।