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कैंसर के इलाज में बड़ी क्रांति, मध्य भारत की पहली NGS लैब इंदौर में शुरू, हो सकेगी जेनेटिक जांच

Cancer patients: इंदौर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज में मध्य भारत की पहली नेक्स्ट जनरेशन सीक्वेंसिंग (NGS) कैंसर लैब शुरू की गई है। इससे कैंसर मरीजों की जीनोमिक जांच अब इंदौर में ही होगी...
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Cancer diagnosis: इंदौर को मिली हाईटेक कैंसर लैब (Photo Source- freepik)

Cancer diagnosis: इंदौर को मिली हाईटेक कैंसर लैब (Photo Source- freepik)

Cancer diagnosis:एमपी के इंदौर शहर में एमजीएम मेडिकल कॉलेज ने चिकित्सा अनुसंधान और कैंसर निदान के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। कॉलेज में मध्य भारत की पहली नेक्स्ट जनरेशन सीक्वेंसिंग कैंसर लैब स्थापित की गई है। यह अत्याधुनिक सुविधा शुरू होने के बाद कैंसर मरीजों की जीनोमिक जांच अब इंदौर में ही संभव हो सकेगी।

इससे मरीजों को रिपोर्ट के लिए अन्य शहरों या निजी अस्पतालों में नहीं जाना पड़ेगा। इलाज की प्रक्रिया भी पहले की तुलना में अधिक तेज, सटीक और प्रभावी होगी। प्रोफेसर डॉ. शिखा घनघोरिया ने बताया, अब तक मप्र सहित मध्य भारत के अधिकांश सरकारी अस्पतालों में इस तरह की जांच की सुविधा उपलब्ध नहीं थी।

बढ़ेगी इलाज की संभावना

एनजीएस तकनीक कैसर के पीछे मौजूद अनुवांशिक (जेनेटिक) बदलावों की गहराई से पहचान करती है। इसके माध्यम से पता लगाया जा सकता है कि कैंसर किन जीन में हुए परिवर्तन के कारण विकसित हुआ है। इस जानकारी के आधार पर डॉक्टर मरीज के लिए सबसे प्रभावी दवा और उपचार पद्धति का चयन कर सकते हैं। विशेषज्ञ इसे प्रिसिजन मेडिसिन या पर्सनलाइज्ड मेडिसिन की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण तकनीक में से एक मानते हैं। इसका उद्देश्य हर मरीज को उसकी बीमारी की अनुवांशिक प्रकृति के अनुसार उपचार उपलब्ध कराना है, जिससे इलाज की सफलता की संभावना बढ़ती है और अनावश्यक दवाओं से भी बचा जा सकता है।

इन कैंसरों की जांच में होगा उपयोग

नई एनजीएस लैब में कई प्रकार के कैंसरों की उन्नत जांच की जा सकेगी। इनमें प्रमुख रूप से स्तन कैंसर, बड़ी आंत कैंसर, फेफड़ों का कैंसर, ओवेरियन कैंसर, दुर्लभ अनुवांशिक कैंसर की जांच हो सकेगी। भविष्य में अन्य अनुवांशिक बीमारियों और दुर्लभरोग की जांच का भी दायरा बढ़ाया जा सकता है।

मरीजों को होंगे कई लाभ

डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया ने बताया, एनजीएस तकनीक से मरीजों को अनेक स्तर पर फायदा मिलेगा। सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि बीमारी की वास्तविक प्रकृति का पता शुरुआती चरण में अधिक सटीकता से लगाया जा सकेगा। इससे उपचार शुरू करने में देरी नहीं होगी। कई मामलों में यह भी पता लगा सकेंगे कि कौन-सी दवा मरीज पर सबसे बेहतर असर करेगी।

खतरनाक ‘कैंसर’ के इलाज में आएगा क्रांतिकारी परिवर्तन

स्वास्थ्य सेवाओं के तेजी से बदलते स्वरूप के बीच भोपाल में विभिन्न रोगों के परंपरिक इलाज से दो कदम आगे एक ही रोग के प्रत्येक रोगी का अलग उपचार शुरू किया जाएगा। इसके तहत हर रोगी की शारीरिक स्थिति, उसके जीन (डीन), जीवनशैली, पर्यावरण और बीमारी के प्रकार के आधार उपाचर किया जाता है। इस आधुनिक चिकित्सा पद्धति को प्रिसिजन मेडिसिन कहा जाता है। इसके तहत कैंसर, हृदय रोगों, डायबिटीज और मनोरोग को जड़ से खत्म किया जा सकता है। एम्स भोपाल में एक वर्ष से ट्रॉयल चल रहा है। जीन आधारित जांच व उन्नत डायग्नॉस्टिक तकनीकों को धीरे-धीरे शामिल किया जा रहा है।