
Indore BJP: दतिया उपचुनाव में हार (Datia Bypoll Results) के बाद भाजपा संगठन के भीतर संगठनात्मक ढांचे को लेकर मंथन तेज हो गया है। पत्रिका न्यूज़ टुडे की रिपोर्ट की माने तो पार्टी से जुड़े कई नेताओं का कहना है कि दतिया में सामने आए मुद्दों जैसी चर्चा इंदौर सहित प्रदेश के अन्य जिलों में भी समय-समय पर होती रही है। उनका मानना है कि कई जगह लंबे समय से संगठन में सक्रिय कार्यकर्ताओं की तुलना में जनप्रतिनिधियों के करीबी नेताओं को अधिक जिम्मेदारियां और चुनावी अवसर मिलने की धारणा बनी है।
इंदौर में भी कुछ नेताओं का कहना है कि वर्षों से संगठन में सक्रिय महिला मोर्चा और अन्य कार्यकर्ताओं को कई बार अपेक्षित अवसर नहीं मिल पाते, जबकि जनप्रतिनिधियों के समर्थकों को प्राथमिकता मिलने की चर्चा रहती है। हालांकि, भाजपा का कहनाहालांकि, भाजपा का कहना है कि संगठन में सभी नियुक्तियां और टिकट तय प्रक्रिया एवं संगठनात्मक मानकों के आधार पर दिए जाते हैं।
माना जाता है कि उपचुनाव में सत्ताधारी पार्टी का दबदबा रहता है। ज्यादातर यह देखा गया है कि जो दल सत्ता में रहता है वही उपचुनाव को भी अपने नाम कर लेता है लेकिन दतिया के चुनाव परिणाम ने सबको हिलाकर रख दिया। ऐसा इसलिए क्योंकि हर मंडल पर सरकार का एक मंत्री, संगठन के दो बड़े नेताओं को प्रभारी बनाया गया था। ताकत झोंकने के बाद भी पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद जब मुख्यमंत्री आवास पर गहन मंथन भी हुआ तो प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने महामंत्री गौरव रणदिवे के नेतृत्व में एक कमेटी भी बना दी जो हार के कारणों का पता लगाकर रिपोर्ट पेश करेगी।
न्यूज़ टुडे की रिपोर्ट में पार्टी के सूत्रों ने बताया कि हार के कारणों में भाजपा के जिम्मेदारों का असहयोग भी एक बड़ा कारण है। कुछ काम का दिखावा करते रहे तो कुछ आखिरी तक काम पर नहीं लगे। सूत्रों ने यह भी बताया कुछ पदाधिकारी पार्टी विरोधी काम भी कर रहे थे। बड़ी बात यह भी सामने आई कि इनमें से कुछ नेता सत्ता या संगठन के किसी ना किसी पद पर काबिज थे। सूत्रों के हवाले से यह भी बात सामने आई कि कुछ नियुक्तियों को लेकर नरोत्तम मिश्रा की पसंद से की गई थी। बताया जा रहा है मिश्रा की टीम ग्राउंड पर ज्यादा सक्रिय नहीं दिखी जिसके चलते प्रदेश संगठन ने जिला अध्यक्ष सहित सभी पदाधिकारियों को पद मुक्त कर दिया।