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महंगी हो रही चीनी, साबूदाना के साथ फरियाली सामान भी महंगा, समस्याओं से जूझ रहा इंदौर का बाजार

Indore Market : सावन मास में फरियाली आयटमों की डिमांड भी बढ़ गई है। चीनी की बात करें तो ये पहली बार होलसेल में रिकार्ड महंगी बिक रही है। इसके साथ आने वाले दिनों में तारीख मांग के प्रेशर को देखते हुए सुधार की संभावना है।
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Indore Market

Indore Market (जानें सियागंज किराना बाजार के हाल Photo Source- Patrika)

Indore News : सावन के महीने में फरियाली आयटमों में डिमांड का दौर भी शुरू हो गया है। मध्य प्रदेश के आर्थिक नगर इंदौर के किराना बाजार में जहां तक चीनी की बात है ये पहली बार होलसेल में रिकार्ड महंगी बिक रही है। इसके साथ आने वाले दिनों में तारीख मांग के प्रेशर को देखते हुए सुधार की संभावना है। व्यवसायिक सूत्रों के अनुसार, देश के प्रमुख किराना बाजारों में शुमार सियागंज किराना बाजार 100 साल बाद भी अपनी अलग पहचान रखता है। ये एकमात्र ऐसा बाजार है जो शहर के मध्य स्थित है, जहां से हर तरह का आवागमन सुलभ है।

रेल्वे लाइन के साथ बस स्टैंड इसे पड़ौसी जिलों के व्यापारियों का पसंदीदा ठिया बनाए हुए हैं। दिक्कत यहां का बिगड़ा हुआ ट्रैफिक है। यहां की गलियों में टू-व्हीलर तो ब्रिज पर फोर-व्हीलर खड़े होते हैं। ये शहर का एकमात्र ऐसा बाजार है, जहां आज भी रनगाड़ों की आवाजाही होती है।

ब्रिज के नीचे रिक्शा

कारोबारी आनंद खंडेलवाल के अनुसार देश के प्रमुख किराना बाजारों में शुमार सियागंज में कोई दिन ऐसा नहीं गुजरता जब जाम की समस्या न हो। यहां की मेन दिक्कत है गलियां, जहां टू व्हीलर खड़े कर दिए जाते हैं। इसके अलावा मार्केट का ओवर ब्रिज वाहन पार्किंग का मुख्य ठिया है। जहां टू व्हीलर से लेकर फोर व्हीलर तक खड़े रहते हैं। इतना ही नहीं ब्रिज के नीचे बकायदा रिक्शा स्टैंड है।

ओटले बनी समस्या

यहां की एक अन्य समस्या है दुकानों के ओटले। इसका इस्तेमाल दुकान दारी का सामान परेशानी बढ़ा रहा है। यदि सियागंज किराना बाजार के ओटलों को खाली करा दिया जाए तो न सिर्फ लोगों की आवाजाही आसान होगी बल्कि व्यापार भी गति पकड़ेगा।

आज भी आते हैं रनगाड़े

कारोबारियों से मिली जानकारी के अनुसार, दिन भर लोडिंग गाड़ियों की आवाजाही, रनगाड़ों का निकलना यहां आए दिन की बात है। ये बात अलग है कि, इससे परेशानी बढ़ती है। यातायात के तमाम साधनों के बावजूद अभी भी यहां से रनगाड़े निकलते हैं, इससे एक घंटे तक बाजार अस्त-व्यस्त हो जाता है। बाजार दोपहर 12 बजे बाद खुलता है। कई व्यापारी जो सुबह थोड़ी जल्दी शॉप खोल लेते हैं, वो अपने वाहनों को आसपास की गलियों में खड़ा कर देते हैं। इससे बाद में आने वाले व्यापारी को खुद के वाहन खड़े करने के लिए परेशान होना पड़ता है।