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इंदौर में साइबर ठगी का नया तरीका, मोबाइल नहीं अब लैपटॉप-डेस्कटॉप भी निशाने पर

Indore Cyber Fraud : वेंडर बन भेजते हैं चंद रुपए का बिल, जिप फाइल डाउनलोड होते ही मालवेयर हो जाता है इंस्टॉल। शहर में साइबर ठगी का नया तरीका।
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Indore Cyber Fraud
इंदौर में साइबर ठगी का नया तरीका (फोटो सोर्स: Chatgpt)

Indore News : अब साइबर ठगों ने मोबाइल फोन के बजाय डेस्कटॉप और लैपटॉप को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। बड़े संस्थानों के अकाउंटेंट और अधिकारियों को वेंडर या कंपनी प्रतिनिधि बनकर फोन किया जा रहा है। इसके बाद 2200-2500 रुपए के बिल या कोटेशन की जिप फाइल भेजकर उसे लैपटॉप और डेस्कटॉप पर डाउनलोड करने को कहा जाता है। फाइल खुलते ही सिस्टम में मालवेयर इंस्टॉल हो जाता है और बैंकिंग से जुड़ी गोपनीय जानकारी ठगों तक पहुंच जाती है।

मध्य प्रदेश के इंदौर में एक निजी कॉलेज के अकाउंटेंट के साथ इसी तरीके से लाखों रुपए की ठगी का मामला सामने आया है। आरोपी ने पहले फोन कर खुद को किसी वेंडर या बड़े संस्थान का प्रतिनिधि बताया। इसके बाद बिल के नाम पर जिप फाइल भेजी। भरोसा बढ़ाने के लिए ये भी कहा कि, संस्था प्रमुख से उनकी बात हो चुकी है और उन्हीं से नंबर मिला है।

आरोपी ने खास तौर पर कहा…

फाइल भेजने के साथ आरोपी ने खास तौर पर कहा कि, इसे मोबाइल फोन में नहीं बल्कि लैपटॉप या डेस्कटॉप पर ही खोलें। जैसे ही संबंधित व्यक्ति ने फाइल डाउनलोड कर खोली, सिस्टम में मालवेयर इंस्टॉल हो गया। इसके बाद कंप्यूटर में मौजूद बैंकिंग और अन्य गोपनीय जानकारी आरोपियों तक पहुंचने लगी। इसी जानकारी का इस्तेमाल कर बैंक खाते से रकम निकालने और ई-मेल के जरिए बड़ी ठगी को अंजाम दे दिया गया।

सिस्को टालोस की रिपोर्ट

सिस्को टालोस की रिपोर्ट के अनुसार, इसी तरह का अन्य हमला क्लाउड जेड नाम के एक रिमोट एक्सेस टूल और फेनो नाम के नए ह्रश्वलगइन के माध्यम से भी किया जा रहा है। ये दोनों मिलकर यूजर के कंह्रश्वयूटर में सेव मैसेजेस, पॉसवर्ड और दूसरे ऑथेंटिकेशन कोड्स तक पहुंचने की कोशिश करते हैं। रिपोर्ट के अनुसार इस हमले की शुरुआत एक नकली स्क्रीन कॉन्टेक्ट अपडेट फाइल से हुई थी। हालांकि यह अभी साफ नहीं है कि यूजर्स तक यह फाइल कैसे पहुंचाई गई।

इंटरनेट वाले सिस्टम अलग करें

साइबर विशेषज्ञ प्रोफेसर गौरव रावल ने बताया कि ऐसे मामले सामने आने के बाद कई कंपनियों ने महत्वपूर्ण काम वाले इंटरनेट कनेक्टेड सिस्टम अलग करना शुरू कर दिया है। उन्होंने सलाह दी कि अनजान व्यक्ति के कहने पर कोई फाइल डाउनलोड करनी हो तो ऐसे सिस्टम का इस्तेमाल करें, जिसमें महत्वपूर्ण डाटा या बैंकिंग संबंधी काम नहीं होता। उनके मुताबिक, संदिग्ध फाइल को मोबाइल फोन पर खोलकर देखना भी एक विकल्प है। फिलहाल एंड्राइड और आइओएस ह्रश्वलेटफॉर्म इस तरह का मालवेयर आसानी से बायपास नहीं कर पा रहा है। अनजान व्यक्ति की ओर से भेजी गई किसी भी फाइल को डाउनलोड करने से पहले पूरी सावधानी बरतना जरूरी है।

Updated on:
11 Sept 2026 02:57 pm
Published on:
11 Sept 2026 02:57 pm