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Indore news: अब किसी भी जिले में करा सकेंगे ‘जमीन-मकान’ की रजिस्ट्री, 17 सितंबर से शुरु होगी नई व्यवस्था

Registration of land and house: मध्यप्रदेश में जल्द ही मकान, दुकान या जमीन की रजिस्ट्री किसी भी पंजीयन कार्यालय में कराने की सुविधा शुरू होगी, जिसे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 17 सितंबर को लॉन्च करेंगे।
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जमीन-मकान' की रजिस्ट्री, प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source: AI Image)

जमीन-मकान' की रजिस्ट्री, प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source: AI Image)

Indore news: मकान, दुकान या जमीन की रजिस्ट्री कराने के लिए अब लोगों को अपने क्षेत्र के ही पंजीयन कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। मध्यप्रदेश में जल्द ही ऐसी व्यवस्था शुरू होने जा रही है, जिसके तहत आवेदक मध्यप्रदेश के किसी भी पंजीयन कार्यालय में जाकर संपत्ति का दस्तावेज पंजीकृत करा सकेगा।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 17 सितंबर को प्रदेश में एक साथ इस नई व्यवस्था की शुरुआत करेंगे। इसके लिए सभी पंजीयन कार्यालयों में जरूरी तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। पंजीयन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक नई व्यवस्था लागू होने के बाद लोगों को स्लॉट की उपलब्धता के लिए किसी एक कार्यालय पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। यदि स्थानीय पंजीयन कार्यालय में स्लॉट नहीं मिल रहा है या लंबी वेटिंग है तो आवेदक प्रदेश के किसी दूसरे कार्यालय में जाकर रजिस्ट्री करा सकेगा। इसके लिए विभाग के सॉफ्टवेयर और तकनीकी सिस्टम को अपडेट किया जा रहा है।

लॉन्चिंग के लिए दूसरे जिले के भी खोजे जा रहे दस्तावेज

नई व्यवस्था की टेस्टिंग और लॉन्चिंग को लेकर विभाग ने तैयारियां तेज कर दी हैं। अधिकारियों ने आसपास के जिलों से ऐसे दस्तावेजों की जानकारी जुटाना भी शुरू कर दिया है, जिन्हें दूसरे जिले के पंजीयन कार्यालय में पंजीकृत कराया जा सके। इससे सिस्टम की वास्तविक स्थिति और तकनीकी खामियों की जांच हो जाएगी।

गड़बड़ी की आशंका बढ़ेगी

नई व्यवस्था से लोगों को सुविधा मिलने के साथ ही गड़बड़ी की आशंका भी जताई जा रही है। अभी जिस क्षेत्र में संपत्ति होती है, उसी क्षेत्र के पंजीयन कार्यालय में दस्तावेज पंजीकृत होने से अधिकारी मौके और स्थानीय स्थिति से अपेक्षाकृत परिचित रहते हैं। इससे संपत्ति की वास्तविक स्थिति की जांच करना आसान होता है। अब यदि किसी दूसरे शहर या जिले में बैठा अधिकारी संपत्ति के दस्तावेज पंजीकृत करेगा तो उसके लिए मौके की स्थिति की जानकारी जुटाना चुनौतीपूर्ण हो सकती है।

आशंका है कि बिल्डिंग को प्लॉट बताकर या संपत्ति की वास्तविक स्थिति छिपाकर दस्तावेज पंजीकृत कराने जैसी गड़बडिय़ां हो सकती हैं। विभाग में इसके लिए नियम और जांच की व्यवस्था पहले से है, लेकिन इनका पालन कितना प्रभावी होगा, यह नई व्यवस्था लागू होने के बाद ही स्पष्ट होगा।