
Indore Simple Jain Wedding: शादियां अक्सर भव्य सजावट, महंगे उपहार और तड़क-भड़क के लिए याद रखी जाती हैं, लेकिन एमपी में इंदौर शहर के एक व्यवसायी परिवार ने विवाह को सामाजिक संदेश देने का माध्यम बना दिया। संपन्नता के बावजूद सादगी अपनाते हुए व्यवसायी अक्षय जैन ने पुत्र पार्थ जैन और पुत्रवधू अनवी जैन का विवाह इस तरह संपन्न कराया कि मेहमान केवल नवदंपती को आशीर्वाद देकर नहीं लौटे, बल्कि पर्यावरण संरक्षण का संकल्प भी साथ लेकर गए।
विवाह समारोह में पारंपरिक उपहारों और दिखावे की बजाय प्रकृति को केंद्र में रखा गया। सबसे आकर्षक पल वह रहा जब रिंग एक्सचेंज की रस्म अंगूठियों के साथ पौधों के आदान-प्रदान से पूरी की गई। मंच से नवदंपती ने जैन धर्म के सात वैवाहिक संकल्पों के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया।
इस पहल ने समारोह में मौजूद हर व्यक्ति का ध्यान खींचा। जैन परिवार ने विवाह में अनावश्यक तामझाम, बैंड-बाजे और फिजूलखर्ची से दूरी बनाकर यह संदेश दिया कि खुशियों का उत्सव सादगी और सामाजिक जिम्मेदारी के साथ भी मनाया जा सकता है। समारोह में शामिल लोगों ने कहा कि विवाह केवल दो परिवारों का मिलन नहीं, बल्कि समाज को सकारात्मक दिशा देने का अवसर भी होता है। समारोह में सांसद शंकर लालवानी, विधायक गोलू शुक्ला, राजेश त्रिपाठी सहित अनेक जनप्रतिनिधि, उद्योगपति, समाजसेवी और गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। सभी ने नवदंपती को शुभकामनाएं देते हुए इस पहल की सराहना की।
परिवार ने पहले ही मेहमानों से साफ कहा थी कि वे विवाह में कोई उपहार, लिफाफा या भेंट लेकर न आएं। यदि वे नवदंपती को आशीर्वाद देना चाहते हैं तो अपने घर, आंगन या आसपास एक पौधा लगाकर उसकी देखभाल का संकल्प लें ताकि नवदंपती को मिलने वाला हर आशीर्वाद हरियाली के रूप में भी जीवित रहे और आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ पर्यावरण की सौगात मिल सके। मेहमानों के इसे माना भी।
इस पहल के पीछे परिवार का उद्देश्य केवल सादगीपूर्ण विवाह करना नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी देना भी था। उनका मानना है कि यदि हर शुभ अवसर पर एक-एक पौधा लगाया जाए तो आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ और हरा-भरा वातावरण मिल सकता है। इसलिए विवाह को एक सामाजिक अभियान का स्वरूप देते हुए सभी मेहमानों से पौधारोपण करने को कहा गया।
विवाह की सभी धार्मिक रस्में नवकार महामंत्र और मंगलाचरण के बीच जैन परंपरा के अनुसार संपन्न हुई। किसी भी प्रकार का रात्रिकालीन कार्यक्रम नहीं रखा गया। सभी आयोजन दिन में हुए ।अतिथियों के लिए जमीकंद रहित सात्विक भोजन की व्यवस्था की गई।