इंदौर

टीचर्स की वेतनवृद्धि पर इंदौर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, लाभ देने का आदेश

Indore High Court ruling on salary - पीएचडी होल्डर लेक्चरर को तीन अग्रिम वेतनवृद्धि देने का आदेश बरकरार पीएचडी में इनरोल तो पूर्व अनुमति जरूरी नही
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Jul 05, 2026
Indore High Court major ruling on teachers salary increments
Indore High Court major ruling on teachers salary increments

Salary- इंदौर हाईकोर्ट ने पीएचडी शिक्षकों को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और जस्टिस जय कुमार पिल्लई की युगलपीठ ने सरकार को झटका देते हुए लेक्चरर को पीएचडी डिग्री के आधार पर तीन अग्रिम वेतनवृद्धि देने के एकलपीठ के आदेश को बरकरार रखा है। कोर्ट ने आदेश में कहा कि जब सरकारी सेवा में आने से पहले पीएचडी में इनरोल हो चुका था तो सिर्फ पूर्व अनुमति नहीं लेने पर लाभ देने से वंचित नहीं रखा जा सकता।

उज्जैन के शासकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज की प्रोफेसर मनीषा शर्मा के खिलाफ सरकार ने युगलपीठ में अपील की थी। शर्मा का चयन पीएससी के जरिए 8 जून 2009 को अंग्रेजी विषय के लेक्चरर पद पर हुआ था। उनकी सेवाएं 17 जुलाई 2012 से नियमित कर दी गईं। शर्मा ने 11 अक्टूबर 2007 को देवी अहिल्या विश्वविद्यालय में पीएचडी के लिए नामांकन किया था, जो उनकी सरकारी सेवा में नियुक्ति (2009) से पहले की है।

याचिका में बताया कि तीन अग्रिम वेतनवृद्धि के लिए आवेदन किया तो उच्च शिक्षा विभाग ने तर्क दिया था कि उन्होंने पीएचडी करने के लिए पूर्व अनुमति नहीं ली थी। हाईकोर्ट ने 8 सितंबर 2025 को उच्च शिक्षा विभाग का निर्णय रद्द करते हुए तीन अग्रिम वेतनवृद्धि देने के निर्देश दिए थे।

60 दिन में करें भुगतान

हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद आदेश दिया कि शर्मा सेवा में आने से पहले पीएचडी में इनरोल हो चुकी थीं, इसलिए पूर्व अनुमति संबंधी आधार गलत है। कोर्ट ने विभागीय आदेश को मनमाना और कानूनी आधार से रहित माना।

इंदौर हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता शर्मा को 25 अगस्त 2014 से तीन अग्रिम वेतनवृद्धि का लाभ देने, वेतन पुनर्निर्धारण करने और बकाया राशि पर 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित 60 दिन में भुगतान करने का आदेश दिया। यदि सरकार 60 दिन में उन्हें लाभ नहीं देती है तो सरकार को देय राशि पर 9 फीसदी की ब्याज दर से पैसा देना होगा।

कानून हमेशा सतर्क लोगों का साथ देता है

इधर ग्वालियर हाईकोर्ट ने कहा है कि कानून हमेशा सतर्क लोगों का साथ देता है। सरकारी नियुक्ति के लिए कई सालों बाद याचिका दायर करने पर कोर्ट ने यह टिप्पणी की। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया है कि कानून उन लोगों का साथ देता है जो समय रहते अपने अधिकारों के लिए कदम उठाते हैं, न कि जो वर्षों तक निष्क्रिय रहने के बाद न्यायालय का दरवाजा खटखटाते हैं।

रामनिवास गुप्ता ने शिक्षा विभाग में नियुक्ति को लेकर याचिका दायर की थी। 12 वर्ष बाद दायर याचिका पर कोर्ट ने सख्त टिप्पणी कर उसे खारिज कर दिया।

Updated on:
05 Jul 2026 01:36 pm
Published on:
05 Jul 2026 01:35 pm