
Contractor Heart Attack: मध्य प्रदेश के इंदौर में हृदयविदारक घटना ने हड़कंप मचा दिया। नगर निगम मुख्यालय (Indore Nagar Nigam) स्थित लेखा विभाग में पेमेंट के लिए बिल लगाने कल शाम एक ठेकेदार पहुंचे। बिल इनवर्ड कराने के बाद ठेकेदार जैसे ही विभाग से बाहर आए वैसे ही उन्हें हार्टअटैक आ गया और अचेत होकर गिर गए। यह देख लेखा विभाग के कर्मचारियों और अन्य लोगों ने उन्हें सीपीआर देकर जान बचाने की काफी कोशिश की। सूचना देने के बाद भी न तो 108 आई और न ही अन्य कोई वाहन की मदद मिली। इस कारण ठेकेदार को अस्पताल ले जाने में देरी हो गई। जैसे-तैसे निगम की पीली जीप में ठेकेदार को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने चेक करने उन्हें मृत घोषित कर दिया, क्योंकि उनकी रास्ते में ही मौत होने गई थी।
कल शाम 5.30 बजे के आसपास ठेकेदार रामतीरथ गुप्ता निगम के लेखा विभाग में पेमेंट के लिए बिल इनवर्ड कराने पहुंचे थे। शहर में साई सेवा संस्थान सुलभ शौचालयों के मेंटेनेंस का काम देखने वाले ठेकेदार गुप्ता बिल इनवर्ड कराने के बाद विभाग के बाहर लगी कुर्सी पर बैठे थे। शाम 6 बजे के आसपास अचानक उनकी तबीयत बिगड़ी और वे अचेत होकर गिर गए, क्योंकि उन्हें हार्ट अटैक आ गया था।
यह देख लेखा विभाग, निगमायुक्त के दफ्तर, कॉलोनी सेल के कर्मचारी दौड़े और उनके सहित अन्य लोगों ने ठेकेदार गुप्ता को सीपीआर देना शुरू की। इसके साथ ही 108 पर फोन लगाकर एम्बुलेंस बुलवाई गई, लेकिन न तो 108 आई और न ही निगम का कोई अन्य वाहन ठेकेदार को अस्पताल ले जाने के लिए आया। तकरीबन आधे घंटे यानी शाम 6.30 बजे तक ठेकादार गुप्ता को सीपीआर देने के साथ वाहन का इंतजाम किया जाता रहा। इसमें काफी देर होने से गुप्ता की हालत बिगड़ गई और सही समय पर इलाज न मिलने से अस्पताल ले जाने के बीच उनकी मौत हो गई।
लेखा विभाग के अपर आयुक्त देवधर दरवई ने कहा कि ठेकेदार गुप्ता शौचालय मेंटेनेंस के बिल इनवर्ड क्राने आए थे। मेटेनेस् वाले बिलों का भुगतान जल्द हो जाता है। इसलिए पेमेंट वाली कोई बात नहीं है। बिल इनवर्ड कराने के बाद वे बाहर बैठे थे और अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। हार्टआटैक आने पर कर्मचारियों ने उन्हें सीपीआर भी दी, लेकिन कोई हलचल नहीं होने पर अस्पताल ले गए, जहा पर उनकी मौत हो गई जो कि दुःखद घटना है।
सूचना के बावजूद 108 और किसी अस्पताल से एम्बुलेस के न आने पर ठेकेदार गुप्ता को हॉस्पिटल ले जाने के लिए जैसे-तैसे करके निगम की एक पीली जीप बुलवाई गई। जीप में गुप्ता को जब ले जाया जा रहा था. तब उनके साथ निगम का कोई कर्मचारी जाने के तैयार नहीं हुआ। ऐसे मे बिल्डिंग अफसर प्रभात तिवारी ने मानवता दिखाई और वे आगे आकर जीप में बैठ गए। साथ ही वे रास्तेभर उन्हें सीपीआर देते हुए एमवाय अस्पताल लेकर पहुंचे। अस्पताल में डॉक्टरों ने उनकी इसीजी करने के साथ चेक किया, लेकिन गुप्ता के शरीर में कोई हलचल नहीं हुई और डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। बीओ तिवारी का कहना है कि डॉक्टरों ने बताया कि उनकी रास्ते में ही मौत हो गई थी। उनके परिजनों को सूचना देकर अस्पताल बुलवाया गया। परिवार में पत्नी और दो बच्चे है जो कि कॉलेज में पढ़ते हैं। बीओ तिवारी ने कहा कि अगर समय रहते अस्पताल पहुंचने पर ठेकेदार गुप्ता को इलाज मिल जाता तो उनकी जान बच सकती थी।