
Indore News : वर्क फ्रॉम होम, फर्जी निवेश, ट्रेडिंग और भारी मुनाफे का लालच देकर ठगी करने वाले साइबर अपराधियों का नेटवर्क मध्य प्रदेश के आर्थिक नगर इंदौर ही नहीं, बल्कि देश की सीमाओं से बाहर तक फैल चुका है। साइबर ठगी से जुटाई गई 50 करोड़ रुपए से अधिक क्रिप्टो करेंसी के जरिए लाओस, कंबोडिया और म्यांमार तक पहुंच चुके हैं। इन देशों से फर्जी निवेश और डिजिटल फ्रॉड के कई रैकेट ऑपरेट करने की जानकारी सामने आई है।
साइबर अपराध के इस बढ़ते अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के खिलाफ इंदौर क्राइम ब्रांच ने डिजिटल स्ट्राइक की है। ठगी में बार-बार इस्तेमाल किए जा रहे 80 मोबाइल नंबर और 15 मोबाइल हैंडसेट के ईएमईआई नंबर ब्लॉक करवाए गए हैं, ताकि इनका इस्तेमाल दोबारा साइबर अपराध में न हो सके।
क्राइम ब्रांच की साइबर सेल ने तकनीकी जांच से साइबर ठगी के नेटवर्क की पड़ताल शुरू की। टीम ने जनवरी से जुलाई 2026 के बीच गृह मंत्रालय के नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी- आई4सी) पर दर्ज शिकायतों का विश्लेषण किया। इसमें कई मोबाइल नंबर सामने आए, जिनका इस्तेमाल बार-बार वित्तीय ठगी, फर्जी निवेश और ट्रेडिंग, वर्क फ्रॉम होम के नाम पर धोखाधड़ी और सोशल मीडिया के जरिए फर्जी लिंक भेजने में किया जा रहा था। तकनीकी प्रक्रिया के तहत पुलिस ने इन 80 मोबाइल नंबरों और 15 मोबाइल हैंडसेट को ब्लॉक करवा दिया। इसका उद्देश्य इन नंबरों और उपकरणों के जरिए होने वाली आगे की ठगी को रोकना है।
क्राइम ब्रांच की साइबर सेल के पास एक महीने में साइबर ठगी से संबंधित करीब 2 करोड़ रुपए की शिकायतें पहुंच चुकी हैं। पुलिस ठगी रकम वापस करवाने के प्रयास कर रही है। इनमें से करीब 50 लाख रुपये पुलिस वापस करवाने में सफल रही है। साइबर अपराधी लगातार नए तरीकों से लोगों को फंसा रहे हैं। अधिकारियों के मुताबिक, साइबर ठगी के तत्काल बाद शिकायत करना महत्वपूर्ण है। समय रहते सूचना मिलने पर बैंक खातों को फ्रीज या होल्ड करवाकर रकम को आगे ट्रांसफर होने से रोका जा सकता है।
एडिशनल डीसीपी (क्राइम) राजेश दंडोतिया ने बताया कि साइबर अपराध बड़े ङ्क्षसडिकेट का रूप ले चुका है। करोड़ों के फ्रॉड किए जा रहे हैं। डिजिटल फ्रॉड से ठगे 50 करोड़ रुपए से अधिक क्रिह्रश्वटोकरेंसी के माध्यम से लाओस, कंबोडिया और ्यांमार तक पहुंची है। जिन 80 मोबाइल नंबरों को ब्लॉक करवाया है, उनमें से कोई भी नंबर इन तीन देशों का नहीं है।
-अनजान नंबर से आए कॉल, मैसेज या व्हाट्सएप पर भरोसा न करें और किसी से भी ओटीपी, पिन, सीवीवी या बैंक संबंधी जानकारी साझा न करें।
-फर्जी निवेश, ट्रेडिंग, वर्क फ्रॉम होम या भारी मुनाफे के लालच में अनजान व्यक्ति को ऑनलाइन रकम ट्रांसफर न करें।
-मोबाइल या ईमेल पर आने वाली संदिग्ध लिंक और एपीके फाइल पर क्लिक न करें तथा एप सिर्फ विश्वसनीय प्ले-स्टोर से डाउनलोड करें।
-किसी संदिग्ध नंबर की जानकारी मिलने पर उस पर खुद संपर्क करने के बजाय पुलिस को सूचना दें।
-अगर साइबर ठगी हो जाए तो घबराए बिना, तुरंत 1930 पर कॉल करें और एनसीआरपी पोर्टल (cybercrime. gov. in) पर शिकायत दर्ज करें। तत्काल शिकायत से बैंक से निकली रकम को समय रहते होल्ड या फ्रीज कराने में मदद मिल सकती है।