
NGT के आदेश पर गठित टास्क फोर्स रोकेगी एमपी का वायु प्रदूषण (फोटो सोर्स: AI Generated)
Bhopal News : नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल द्वारा 10 अप्रैल 2026 को राजधानी भोपाल समेत मध्य प्रदेश में बढ़ रहे वायु प्रदूषण को रोकने विभिन्न विभागों को मिलाकर राज्य स्तरीय टास्क फोर्स बनाने का आदेश पारित किया गया था। इसके लगभग साढ़े चार महीने बाद शासन ने टास्क फोर्स का गठन किया है। एनजीटी ने टास्क फोर्स की पहली बैठक तीन माह के अंदर करने के निर्देश दिए थे, लेकिन इसका गठन ही चार माह बाद हुआ है। अब टास्क फोर्स को हर तीन माह में बैठक कर रिपोर्ट देना होगी।
ये टास्क फोर्स विशेषज्ञ समिति द्वारा तैयार एक्शन प्लान के अनुसार हवा की गुणवत्ता सुधारने के उपायों और शोर नियंत्रण के नियमों के पालन की निगरानी करेगा। जिन शहरों में हवा ज्यादा प्रदूषित है, वहां भी निगरानी बढ़ाई जाएगी।
एनजीटी ने गौरव प्रकाश की याचिका पर सुनवाई करते हुए टास्क फोर्स बनाने के निर्देश दिए थे। जीएडी द्वारा जारी आदेश के अनुसार टास्क फोर्स में भार-साधक सचिव पर्यावरण को अध्यक्ष और समन्वयक बनाया गया है। सचिव नगरीय विकास एवं आवास, परिवहन, खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण, ऊर्जा, किसान कल्याण तथा कृषि विकास, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा और क्षेत्रीय निदेशक, केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भोपाल को सदस्य बनाया गया है।
एनजीटी ने मामले में निर्देश दिए थे कि राज्य स्तरीय टास्क फोर्स की निगरानी में ज़िला कलेक्टर या संबंधित विभागों द्वारा की जाने वाली कार्यवाही जमीन पर दिखना चाहिए। प्रदेश के सभी नगरीय निकायों को निर्देश दिए कि ज्यादा वायु प्रदूषण वाले शहरों में सड़कों की सफाई से पहले एसटीपी से ट्रीट किए गए पानी का छिड़काव कराएं। सड़क के किनारे धूल वाली जगह पर घास और छोटी झाड़ियों का रोपण कराएं। कचरा जलाने को रोकने और निर्माण और तोड़-फोड़ की गतिविधियों को नियंत्रित करने पर भी ध्यान दें।
सभी नगर निगम और स्थानीय निकाय हर तिमाही में राज्य के प्रमुख सचिव (पर्यावरण) को अपनी रिपोर्ट भेजेंगे। पीएस डेटा को संकलित करके सीपीसीबी को सौंपेंगे, वहां से एकीकृत रिपोर्ट बनाकर हर तिमाही में एनजीटी के समक्ष पेश की जाएगी।
-जरूरत के अनुसार नए मॉनीटरिंग स्टेशन स्थापित कराना।
-कार्बन क्रेडिट और सस्पेंडेड सॉलिड्स की स्टडी पूरी करना।
-एक्यूआई को कम करने के लिए वायु प्रदूषण बढ़ाने वाली गतिविधियों को रोकना और नियंत्रित करना जैसे साफ ईंधन अपनाना और नोव्ही कल जोन घोषित करना।
-एक्शन प्लान को तय समय सीमा में लागू कराना और विलंब के लिए मुआवजा वसूलना।
-शोर प्रदूषण नियंत्रण में कमियों को दूर करना।
-कैम्पा फंड का इस्तेमाल करके पेड़ लगवाना और पर्यावरणीय स्टेंडर्ड को को असरदार ढंग से लागू करना।
-पीसीबी और अन्य निगरानी तंत्रों को बेहतर बनाना।
-लीगेसी वेस्ट वाली जगहों को ठीक करना और अन्य कचरे जैसे बायो-मेडिकल, प्लास्टिक, ई-वेस्ट के प्रबंधन के लिए प्रभावी कदम उठाना।
-सभी स्तरों पर एनवारमेंट डेटा ग्रिड बनाना।
Updated on:
30 Aug 2026 07:01 am
Published on:
30 Aug 2026 07:01 am
