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Rewa News : बच्चों में वायरल फीवर के साथ क्यों बढ़ रहा पैरों में दर्द, इलाज के साथ घर में ध्यान रखें 5 बातें

Viral Myositis Infection : बच्चों में फैल रहे वायरल मायोसाइटिस संक्रमण ने परिजन की चिंता बढ़ाई। जीएमएच समेत अन्य अस्पतालों में हर दिन वायरल फीवर से जुड़े मरीजों की संख्या बढ़ रही है।
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Viral Myositis Infection

बच्चों में फैल रहे वायरल मायोसाइटिस संक्रमण ने परिजन की चिंता बढ़ाई (फोटो सोर्स: Patrika)

Rewa News : बीते करीब दो सप्ताह से मध्य प्रदेश में खासकर रीवा समेत पूरे विंध्य में मौसम बदला हुआ है। लगातार बारिश के साथ ठंडी हवाएं भी चल रही हैं। इस बीच बच्चे बारिश में भीग भी रहे हैं, जिसकी वजह से बच्चों को ग्रस्त करने वाला वायरल फीवर भी तेजी से बढ़ रहा है। बच्चों में बुखार के साथ ही एक समानता ये भी सामने आ रही है कि, अधिकांश के पैरों में दर्द भी बढ़ रहा है। कुछ तो ऐसे भी बच्चे हैं जो दर्द की वजह से चल नहीं पा रहे हैं, जिसकी वजह से डॉक्टर के पास परिजन उन्हें उठाकर ला रहे हैं।

इस तरह के वायरल फीवर से एक तरफ जहां बच्चों के परिजन में चिंता बढ़ने लगी है तो वहीं, चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि, इसमें घबराने जैसी बात नहीं है, ये वायरल फीवर का ही प्रकोप है। इसे वायरल मायोसाइटिस कहा जाता है। ये संक्रमण मुख्य रूप से 12 साल तक के बच्चों को अधिक प्रभावित कर रहा है। लड़कियों में बुखार के साथ पैर दर्द की समस्या अधिक हो रही है। अस्पतालों के साथ ही शहर के कई डॉक्टर्स के क्लीनिक में ऐसे मरीज इन दिनों बढ़ रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि इस बीमारी के शुरुआती लक्षण सामान्य वायरल बुखार, सर्दी-खांसी और डेंगू से काफी मिलते-जुलते हैं। पहले बच्चों को बुखार आता है, जिसके बाद पैरों और पिंडलियों में तेज दर्द शुरू हो जाता है।

वायरल मायोसाइटिस संक्रमण को समझें

बाल्य एवं शिशुरोग विशेषज्ञों के मुताबिक वायरल मायोसाइटिस एक वायरल संक्रमण है, जिसमें वायरस बच्चों के पैरों की मांसपेशियों पर असर डालता है। इससे मांसपेशियों में सूजन आ जाती है और ङ्क्षपडलियों व पैरों में तेज दर्द होने लगता है। कई बच्चों को दर्द इतना अधिक होता है कि वे खड़े होने या चलने में भी असमर्थ हो जाते हैं।

स्कूल में बच्चे ज्यादा प्रभावित

अस्पताल में आने वाले अधिकांश मरीज स्कूल जाने वाले बच्चे हैं। इस मौसम में वायरल संक्रमण के साथ सर्दी, खांसी और अन्य मौसमी बीमारियों के मामले भी बढ़ रहे हैं, जिससे बच्चों में संक्रमण का खतरा अधिक हो गया है। सर्दी-खांसी से प्रभावित बच्चों का संक्रमण दूसरे बच्चों तक पहुंचता है, इसलिए स्कूल में यदि कोई बच्चा संक्रमित हो जाता है तो कई अन्य उसकी चपेट में आ जाते हैं।

घर पर ये सावधानी रखें

-पानी और तरल पदार्थ पर्याप्त दें। बच्चा ठीक से पी पा रहा हो तो पानी, सूप या ओआरएस दिया जा सकता है।
-बच्चे को पर्याप्त आराम दें और दर्द के दौरान दौड़ने, खेलने या ज्यादा चलने से बचाएं।
-पिंडलियों में दर्द हो तो हल्की गर्म सिकाई कुछ बच्चों को राहत दे सकती है। बहुत गर्म पानी या ज्यादा दबाव से मालिश न करें।
-पौष्टिक और हल्का भोजन दें, बीमारी के दौरान खाने-पीने पर विशेष ध्यान रखें।
-बिना चिकित्सकीय सलाह के दर्द की दवा या एंटीबायोटिक न दें। वायरल संक्रमण में एंटीबायोटिक सामान्य तौर पर उपयोगी नहीं होते।

वायरल मायोसाइटिस का असर

बच्चों में वायरल फीवर के साथ पैर में दर्द होना किसी अलग बीमारी के लक्षण नहीं हैं बल्कि वायरल मायोसाइटिस का असर होता है। इसमें मांसपेशियों में सूजन आ जाता है, जिससे दर्द होता है और चलने में कठिनाई होती है। यह 8 से 10 दिन में ठीक होता है। अपने मन से दवाएं नहीं देना चाहिए, उससे कई बार दूसरी समस्याएं होने लगती हैं।