
Indore News :मध्य प्रदेश के आर्थिक शहर इंदौर में जिन लोगों ने सरकारी और नगर निगम स्वामित्व की जमीन पर कब्जा (अतिक्रमण) कर रखा है, उनके कब्जे हटाकर जमीन खाली करवाने के बजाय निगम का राजस्व विभाग कब्जाधारियों का संपत्तिकर खाता खोलने का प्रस्ताव कल हुई एमआइसी की बैठक में लेकर आया। कब्जाधारियों के पास अतिक्रमण वाली संपत्तियों के पूर्ण स्वामित्व संबंधी दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने पर अधिभोगी और अधिवासी के आधार पर संपत्तिकर खाता खोलने का प्रस्ताव रखा गया।
एमआइसी में राजस्व विभाग के इस बेतरतीब प्रस्ताव का विरोध हो गया। राजस्व विभाग प्रभारी निरंजन सिंह चौहान और अफसरों की तीखी बहस हो गई। आखिर में फैसला हुआ कि, सरकारी जमीन पर कब्जा करने वाले कब्जाधारियों का संपत्तिकर खाता नहीं खोला जाएगा। महापौर पुष्यमित्र भार्गव और प्रभारी चौहान के साथ अन्य सभी एमआइसी मेंबरों ने मिलकर प्रस्ताव को खारिज कर दिया है।
राजस्व विभाग के अफसरों ने आय बढ़ाने के लिए ये प्रस्ताव तैयार किया था। एमआइसी ने कब्जाधारियों के बजाय अवैध कॉलोनियों में नौटरी पर खाते खोलने का प्रस्ताव मंजूर किया है, जबकि नोटरी पर पहले खाते नहीं खुलते थे। मामले में पत्रिका न्यूज टुडे ने एमआइसी की कल हुई बैठक के एक दिन पहले ही 'सरकारी जमीन के कब्जाधारियों का अब खुलेगा संपत्तिकर खाता…' शीर्षक से खबर प्रकाशित कर खुलासा किया था। खबर प्रकाशित होने के बाद महापौर भार्गव और प्रभारी चौहान ने मामले को गंभीरता से लिया और कल हुई एमआइसी की बैठक में प्रस्ताव खारिज कर दिया।
बैठक में सरकारी जमीन पर कब्जा करने वाले लोगों का संपत्तिकर खाता खोलने का प्रस्ताव जैसे ही आया वैसे ही प्रभारी चौहान ने विरोध कर दिया और बोले मुझे बताए बगैर यह प्रस्ताव कैसे आया। इस पर महापौर भार्गव भी बोल पड़े कि, यह बात पूरे शहर को पता है, बस मुझे नहीं। निगमायुक्त क्षितिज सिंघल का कहना था कि, राजस्व प्रभारी की राय पर प्रस्ताव रखा गया है। इस पर प्रभारी चौहान बोले कि मैंने यह राय नहीं दी थी कि सरकारी जमीन पर कब्जे करने वालों के खाते खोलो। मैंने राय यह दी थी कि अवैध कॉलोनी में नोटरी पर खाते खोले जाएं जो कि पहले निगम में खुलते थे। प्रस्ताव को लेकर एमआइसी में सवाल उठने पर महापौर ने मंजूरी नहीं दी।