
Indore Ujjain Greenfield Highway: मध्यप्रदेश के इंदौर और उज्जैन के बीच बनने वाले बहुप्रतीक्षित ग्रीनफील्ड फोरलेन हाईवे का काम अब जमीन पर दिखाई देने लगा है। एमपी रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एमपीआरडीसी) ने निर्माण एजेंसी के जरिए मशीनों का मोबिलाइजेशन शुरू कर दिया है। पितृ पर्वत क्षेत्र के पास भारी मशीनें समतलीकरण और शुरुआती निर्माण कार्य में जुट गई हैं। यह हाईवे तैयार होने के बाद दोनों शहरों के बीच यात्रा न केवल तेज होगी, बल्कि दिल्ली मुंबई एक्सप्रेस-वे और पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर से सीधा जुड़ाव मिलने से व्यापार, उद्योग और कृषि गतिविधियों को भी नई रफ्तार मिलेगी।
इंदौर-उज्जैन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर को प्रदेश की सबसे महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं में माना जा रहा है। करीब 48.01 किलोमीटर लंबे इस फोरलेन मार्ग को शासन ने 2935.15 करोड़ रुपए की प्रशासनिक स्वीकृति दी है, जबकि सड़क निर्माण की लागत 1089 करोड़ रुपए निर्धारित की गई है। एमपीआरडीसी के डिवीजनल मैनेजर गगन भंवर के अनुसार इस रोड पर काम की शुरुआत कर दी गई है। कुछ इलाकों में मशीन पहुंच गई हैं वहीं दूसरे इलाकों में पहुंचने का काम जारी है। गौरतलब है कि दो दिन पहले एमपीआरडीसी के प्रबंध संचालक भरत यादव ने इंदौर- उज्जैन और उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड परियोजनाओं की समीक्षा कर निर्माण कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं।
हाईवे को ग्रामीणों और किसानों के लिए भी सुविधाजनक बनाया जाएगा। पूरे मार्ग पर सर्विस रोड के साथ 36 अंडरपास बनाए जाएंगे। इनमें 8 व्हीकल अंडरपास, 10 छोटे अंडरपास और 18 अन्य अंडरपास शामिल हैं, ताकि गांवों का संपर्क बना रहे और खेतों तक पहुंच आसान हो। अधिकारियों का कहना है कि यह ग्रीनफील्ड कॉरिडोर केवल इंदौर और उज्जैन के बीच दूरी कम करने का माध्यम नहीं होगा, बल्कि माल परिवहन को गति देने, निवेश आकर्षित करने और औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने में भी अहम भूमिका निभाएगा। निर्माण कार्य शुरू होने के साथ ही इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तय समय में पूरा होने की उम्मीद भी बढ़ गई है।
यह मार्ग इंदौर जिले के 20 गांवों और उज्जैन जिले के 8 गांवों से होकर गुजरेगा। परियोजना के लिए लगभग 292 हेक्टेयर निजी भूमि का अधिग्रहण किया जा रहा है। प्रभावित किसानों को मुआवजा देने की प्रक्रिया भी जारी है। अब तक करीब 917 किसानों को उनकी भूमि के बदले 816 करोड़ रुपए से अधिक का भुगतान किया जा चुका है।