Indore water contamination case: साफ पानी को तरस रहे थे, मंत्री, समर्थक-निगमायुक्त के तबादले के लिए डटे थे, नतीजा...गंदा पानी और मौतें मंत्री कैलाश ने निजी अस्पताल की रिपोर्ट की सार्वजनिक, बोले-अब पानी में बैक्टीरिया नही...,
Indore Water Contamination Case: नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की विधानसभा इंदौर-1 में दूषित पानी से 16 लोगों की मौत के बाद भी जिम्मेदार हालात नहीं संभाल पा रहे। 7 दिन से भागीरथपुरा में मरीजों के मिलने का सिलसिला जारी है। रविवार को संजीवनी क्लीनिक पर 65 नए मरीज पहुंचे। इनमें 28 को दस्त की शिकायत थी। इनमें ऐसे भी मरीज हैं, जिन्हें तीन-चार दिन तक कोई दिक्कत नहीं थी, लेकिन अब उल्टी-दस्त से परेशान हैं। जांच के बाद डॉक्टरों ने उन्हें दवा दी, कुछ को रेफर करना पड़ा। आंगनवाड़ी केंद्र में भी बने कैंप में बीमार बुजुर्ग और बच्चे पहुंचे। इसी के साथ अब तक दूषित पानी से बीमार मरीजों की संख्या करीब 1800 हो गई। इनमें से करीब 600 अलग अस्पतालों में भर्ती रहे।
हालांकि स्वास्थ्य विभाग का दावा है, शनिवार तक 150 मरीज अस्पताल में भर्ती थे। इनमें से 16 आइसीयू में हैं। गंदा पानी और मौतों के बीच नया खुलासा हुआ है। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, समर्थक और निगम अफसरों के बीच काफी पहले से द्वंद्व चल रहा था। यह द्वंद्व इस हद तक पहुंच चुका था कि मंत्री ने निगम कमिश्नर दिलीप यादव को हटाने के लिए विभाग को नोटशीट भी भेजी। लंबे समय तक इस पत्र पर कार्रवाई नहीं हुई। इसी बीच भागीरथपुरा में दूषित पानी की शिकायत लोगों ने पार्षद कमल वाघेला से की। उन्होंने इसका समाधान कराने की बजाय चुप्पी साध ली।
नतीजा, अफसर-नेता में शीत युद्ध चलता रहा और लोगों के घरों में दूषित शौचालय का पानी पहुंचता रहा। 16 लोगों को अफसरनेताओं के द्वंद्व की कीमत चुकानी पड़ी। मौतें बढ़ीं तो आखिरकार निगम कमिश्नर दिलीप यादव को सरकार को पद से हटाना पड़ा। इसी के साथ मंत्री समर्थकों की प्रतिक्षित मंशा पूरी हो गई।
मंत्री कैलाश रविवार को सोशल मीडिया पर निजी अस्पताल अरबिंदो की रिपोर्ट साझा कर लिखा कि भागीरथपुरा से लिए पानी के पांच सैंपल में किसी बैक्टीरिया की पुष्टि नहीं हुई है। भागीरथपुरा में पेयजल शुद्धिकरण के लिए चल रहे क्लोरिनेशन समेत अन्य उपायों के सकारात्मक परिणाम दिखने लगे हैं। पानी की आरटीपीसीआर जांच में ई कोलाई, वाइब्रियो कॉलेरा, साल्मोनेला, रोटा वायरस, एंटरो वायरस नेगेटिव पाए गए। एहतियातन क्षेत्रवासियों से पानी उबालकर पीने का आग्रह किया।
अब जांच को बनाई टीम भागीरथपुरा में परिजनों ने 16 लोगों की मौत उल्टीदस्त से मौत होने की पुष्टि की है। स्वास्थ्य विभाग 4 ही बता रहा है। अन्य मौतों के लिए अब विभाग ऑडिट करने की बात कह रहा है। इसमें स्वास्थ्य विभाग के रीजनल डायरेक्टर, एमजीएम मेडिकल कॉलेज डीन व अन्य सदस्य रहेंगे।
एमजीएम मेडिकल कॉलेज की पहली जांच रिपोर्ट में 20 सैंपल की जांच में से कुछ में ई कोलाई व कुछ में विब्रियो कॉलरी बैक्टीरिया पाया गया है। जो हैजा का सबसे बड़ा कारण होता है। हैजा बहुत तेजी से फैलता है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग ने इसे सार्वजनिक नहीं किया।
आइसीएमआर (भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद) की टीम ने भागीरथपुरा क्षेत्र को एपिडेमिक श्रेणी में रखा है। इसी हिसाब से जांच के लिए वैज्ञानिकों ने क्षेत्र को 32 बीट में बांटा है। एपिडेमिक श्रेणी में मानकर जांच तब की जाती है, जब किसी रोग या संक्रमण की संख्या सामान्य से अधिक हो जाती है। संक्रमण एक समुदाय, नगर या क्षेत्र में फैलने की आशंका हो। यानी, बीमारी का प्रकोप नियंत्रण से बाहर होना भी होता है।
इंदौर के भागीरथपुरा में भी सात दिन से ऐसे ही हालात हैं। रविवार सुबह स्वास्थ्य विभाग के वैज्ञानिक क्षेत्र में निकले। उन्होंने अलग-अलग टीमों के आधार पर सर्वे की जानकारी विभाग को दी। इसके बाद फील्ड में हालात की जानकारी ली।
-वैज्ञानिक कई तथ्यों के आधार पर जांच कर रहे हैं। उल्टी-दस्त के कारण, स्रोत और प्रभावित व्यक्तियों की संख्या का विश्लेषण होगा।
-पीने के पानी व अन्य जगह के पानी की जांच की जाएगी।
-नए निगमायुक्त क्षितिज सिंघल सुबह कलेक्टर संग पहुंचे, बोले-सभी जगह सैंपलिंग हो रही है। बोरिंग से भी सैंपल लिए हैं। पीने के अलावा अन्य उपयोग के लिए बोरिंग के पानी का इस्तेमाल करना शुरू किया जाएगा।