
Indore News :मध्य प्रदेश की एकमात्र हेरिटेज ट्रेन का संचालन अगस्त के दूसरे सप्ताह से शुरु होने की संभावना है। रेलवे हेरिटेज कॉरिडोर का निर्माण कर रहा है और ट्रेन के कोच मेंटेनेंस के लिए गुजरात गए हैं, इसलिए इस बार देरी से ट्रेन चल रही है। हर साल जुलाई के अंतिम सप्ताह में ट्रेन चलाई जाती है। इंदौर जिले के डॉक्टर अंबेडकर नगर (महू) के पातालपानी रेलवे स्टेशन से निकलने वाली ये ट्रेन सैलानियों को कालाकुंड तक का सफर कराएगी। इसमें सैलानी प्रकृति के नजारों का लुत्फ ले सकेंगे।
शुरुआत में ट्रेन शनिवार और रविवार को चलाई जाएगी, जिसे यात्री संख्या को मद्देनजर रखते हुए एक दिन और बढ़ाया जा सकता है। बाद में सातों दिन भी ट्रेन चले की संभावना है। हेरिटेज कॉरिडोर का काम चलने से बीते साल नवंबर में ट्रेन का संचालन बंद रखा गया था। तब बताया गया था कि, दो साल ट्रेन नहीं चलेगी, लेकिन इस बार रेलवे ट्रेन चलाने जा रहा है।
रेलवे पातालपानी से कालकुंड रूट को हेरिटेज कॉरिडोर के रूप में विकसित कर रहा है। ऐसे में इस साल पारंपरिक हेरिटेज ट्रेन का संचालन खास है। रेलवे के अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि, हेरिटेज कॉरिडोर परियोजना के चलते पुरानी हेरिटेज ट्रेन अपने मौजूदा स्वरूप में संभवत: आखिरी बार दौड़ेगी। भविष्य में इसी ट्रैक पर पर्यटकों को आधुनिक ओपन विस्टाडोम कोच से घाटियों, झरनों और सुरंगों के रोमांचक नजारों का आनंद लेने का अवसर मिलेगा। रेलवे का कहना है कि, हेरिटेज कॉरिडोर का निर्माण फिलहाल ट्रैक से दूर जंगल क्षेत्र में चल रहा है, इसलिए ट्रेन संचालन पर असर नहीं पड़ेगा।
ट्रेन में दो एसी चेयरकार सी-1 और सी-2 और तीन नॉन एसी चेयर कार डी-1, डी-2 और डी-3 हैं। बीते साल ट्रेन में एक दिशा के लिए एसी चेयर कार का किराया 265 रुपए और नॉन एसी चेयर कार का किराया 20 रुपए प्रति टिकट रखा गया था।
महू रेलवे जोन के अंतर्गत आने वाले पातालपानी रेलवे स्टेशन से हेरिटेज ट्रैक का सफर शुरू होता है। इसमें सैलानी पातालपानी से कालाकुंड तक विंध्याचल की वादियों का लुत्फ उठाते हैं। इसमें पातालपानी स्टेशन, पातालपानी वाटरफॉल, वैली ब्रिज, कालाकुंड शामिल हैं। ये ट्रेन मार्ग में 4 टनल से गुजरती है, जो सफर के रोमांच को दोगुना कर देती हैं। सफर में ट्रेन कई प्रमुख स्पॉट पर ठहरती है और सैलानी ट्रेन से बाहर आकर प्राकृतिक नजारों को निहार सकते हैं। ट्रेन का संचालन शुरू करने से पहले पातालपानी, टंट्याभील व्यू पाइंट, कालाकुंड स्टेशन समेत मार्ग के घने जंगल और अन्य पाइंट को बेहतर कर दिया गया है।