Health news: सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल की गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी ओपीडी में आने वाले 100 मरीजों में से लगभग 60 फैटी लिवर या जीवनशैली जनित लिवर समस्याओं से ग्रस्त पाए जा रहे हैं।
Health news: लिवर की बीमारी अब केवल अत्यधिक शराब सेवन तक सीमित नहीं रही। बदलती जीवनशैली, जंक फूड और घटती शारीरिक गतिविधियों ने नॉन-अल्कोहॉलिक फैटी लिवर को बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बना दिया है। सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में आने वाले मरीजों के आंकड़ों के विश्लेषण में यह चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। डॉक्टर्स के अनुसार, पहले लिवर डेमेज के अधिकतर मामले शराब सेवन से जुड़े होते थे, लेकिन अब जंक फूड व खानपान में बदलाव और मोटापे के कारण फैटी लिवर के केस तेजी से बढ़ रहे हैं।
सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल की गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी ओपीडी में आने वाले 100 मरीजों में से लगभग 60 फैटी लिवर या जीवनशैली जनित लिवर समस्याओं से ग्रस्त पाए जा रहे हैं। इनमें बड़ी संकया 20 से 40 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं की है। हर माह लगभग 15 से 20 बच्चे भी फैटी लिवर की समस्या लेकर ओपीडी पहुंच रहे हैं, जो गंभीर संकेत है।
विशेषज्ञों के अनुसार, फैटी लिवर का समय रहते उपचार और नियंत्रण नहीं किया गया तो यह लिवर सिरोसिस जैसी गंभीर बीमारी में बदल सकता है। एक बार लिवर गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो जाए तो लिवर ट्रांसप्लांट के अलावा दूसरा विकल्प नहीं बचता। हर माह लगभग 120 मरीजों में सिरोसिस के लक्षण पाए जाते हैं। डॉ. अमित अग्रवाल, गैस्ट्रोएंट्रोलोजिस्ट, सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के अनुसार, नॉन-अल्कोहॉलिक फैटी लिवर के केस बढ़े हैं। इसका प्रमुख कारण जीवनशैली और खानपान में बदलाव है। नियमित व्यायाम, संतुलित आहार से बचाव संभव है।
स्वास्थ्य विभाग
एमजीएम मेडिकल कॉलेज
-1,200 मरीज प्रतिमाह सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल की गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी ओपीडी में
-60% मरीज फैटी लिवर से पीड़ित
-120 मरीज प्रतिमाह सिरोसिस के लक्षण वाले
-15-20 बच्चे प्रतिमाह फैटी लिवर से ग्रस्त
-लगातार कई दिनों तक थकान महसूस होना।
-पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में हल्का दर्द या भारीपन महसूस होना।
-लीवर में सूजन के कारण पेट का आकार बढ़ जाना।
-पीलिया (Jaundice) के लक्षण दिखना।
-बिना किसी विशेष कारण के वजन कम होना।
फैटी लीवर के कारण अक्सर कोई लक्षण नजर नहीं आते, इसलिए आमतौर पर इसका पता नियमित जांच या स्वास्थ्य जांच के दौरान चल जाता है। फैटी लीवर का मुख्य इलाज स्वस्थ जीवनशैली अपनाना है।
इसमें सबसे महत्वपूर्ण है वजन कम करना (शरीर के वजन का नियमित व्यायाम (रोजाना 30 मिनट), और चीनी व प्रोसेस्ड फूड से परहेज। शराब का सेवन तुरंत बंद करें। आहार में फाइबर, फल और सब्जियों को शामिल करें। यह बीमारी खान-पान और जीवनशैली के सुधार से पूरी तरह ठीक हो सकती है।