- दिसंबर से काम में आएगी तेजी, अंडर ग्राउंड ट्रैक को छोड़ पूरे रूट के लिए जारी होंगे टेंडर, सोशल इम्पैक्ट असेसमेंट रिपोर्ट के आधार पर तय होगा मुआवजा
इंदौर. केंद्र और राज्य सरकार के साथ करार होने के बाद मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन का काम अब रफ्तार पकड़ेगा। एमआर-10 से मुमताज बाग खजराना के बीच शुरू हुए ट्रैक निर्माण के कार्य को गति मिलेगी, साथ ही एलिवेटेट ट्रैक के अन्य हिस्सों के टेंडर दिसंबर तक जारी हो जाएंगे। रूट व इस पर बनने वाले सभी 29 स्टेशन के लिए जमीन अधिग्रहण की तैयारी भी शुरू कर दी गई है। सोशल इम्पैक्ट असेसमेंट रिपोर्ट के आधार पर कई विकल्प बनाए गए हैं, जिन्हें सरकार के पास अनुमोदन के लिए भेजा है। सरकार का लक्ष्य है, 2023 तक शहर में मेट्रो दौडऩे लगे। सरकार उज्जैन-देवास-पीथमपुर के बीच लाइट मेट्रो के विकल्प पर भी विचार कर रही है।
सब कुछ तय समय पर होता रहा, तो तीन साल में एयरपोर्ट-राजबाड़ा-एयरपोर्ट के बीच मेट्रो दौडऩे लगेगी। कॉर्पोरेशन का दावा है कि 31.5 किमी के इस रिंग रूट के निर्माण का काम तेजी से शुरू किया जाएगा। सरकार की तैयारी है कि दिसंबर तक मेट्रो के 25 किमी एलिवेटेड रूट पर कार्य शुरू हो सके। एयरपोर्ट से एमआर-10, मुमताज बाग से पलासिया, पलासिया से कोठारी मार्केट एलिवेटेड रूट रहेगा। जबकि कोठारी मार्केट से एयरपोर्ट तक का रूट अंडर ग्राउंड बनाएंगे। इस रूट के लिए शहर के मध्य हिस्से की तकनीकी और भौगोलिक परीक्षण का कार्य भी किया जा रहा है। अगले वर्ष के मध्य तक इस रूट का काम भी शुरू कर दिया जाए।
तकनीकी निदेशक जितेन्द्र कुमार दुबे का कहना है, अंडर ग्राउंड रूट के लिए शहर की डिजाइन के साथ ही बिजली, पानी और ड्रेनेज की व्यवस्था देखी जा रही है। इनकी संरचना के आधार पर रूट की डिजाइन को अंतिम रूप दिया जाएगा। मध्य शहर में तीन स्टेशन अंडर ग्राउंड बनना है। इनके लिए जमीन का निरीक्षण कर लिया गया है, हस्तातंरण की प्रक्रिया सरकार के पास लंबित है। हरी झंडी मिलते ही इस पर भी काम शुरू कर दिया जाएगा।
मुआवजा व क्षतिपूर्ति राशि दी जाएगी
कई स्थानों पर निजी जमीन भी लेना होगी। इसके लिए नए भूमि अधिग्रहण कानून के अनुसार मुआवजा दिया जाएगा। कंपनी ने अधिग्रहण के लिए अलग-अलग विकल्प तैयार किए हैं। इसमें जीविका के साधानों की भरपाई के लिए सोशल इम्पैक्ट असेसमेंट भी करवाया जाएगा।
60 प्रतिशत राशि लेंगे लोन से
प्रोजेक्ट के लिए सरकार को 7.5 हजार करोड़ रुपए का इंतजाम करना है। इसमें 20-20 प्रतिशत राशि केंद्र व राज्य सरकार देगी। शेष 60 प्रतिशत राशि के लिए एशियन डेवलपमेंट बैंक और न्यू डेवलपमेंट बैंक से लोन लिया जाएगा।