Indore Lokayukta: शासकीय हायर सेकेंडरी विद्यालय बालक क्रमांक-1 के प्राचार्य और नोडल अधिकारी राजकुमार चेलानी को 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते लोकायुक्त ने पकड़ा।
Government School Principal: मध्यप्रदेश में रिश्वतखोर अधिकारी-कर्मचारियों पर कार्रवाई का सिलसिला लगातार जारी है। लगभग हर दूसरे दिन कहीं न कहीं लोकायुक्त टीम रिश्वतखोर अधिकारी-कर्मचारियों को रिश्वत लेते हुए रंगेहाथों पकड़ रही है लेकिन इसके बावजूद रिश्वतखोर बाज आते नजर नहीं आ रहे हैं। ताजा मामला मध्यप्रदेश के इंदौर का है जहां एक सरकारी स्कूल के प्राचार्य और नोडल अधिकारी को लोकायुक्त इंदौर की टीम ने 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथों पकड़ा है।
इंदौर के इदरिसन नगर में रहने वाले रवि जायसवाल ने लोकायुक्त कार्यालय इंदौर में शिकायत दर्ज कराई थी। अपनी शिकायत में रवि जायसवाल ने बताया कि वो द इंटरनेशनल कॉन्वेंट स्कूल का संचालक है। उनके स्कूल के खिलाफ एक छात्र के अभिभावक ने शिकायत दर्ज कराई थी और जब इस शिकायत के निराकरण के लिए वो संकुल प्राचार्य राजकुमार चेलानी के पास पहुंचे तो उन्होंने 10 हजार रुपये रिश्वत की मांग की।
लोकायुक्त की टीम ने शिकायत की जांच की और शिकायत सही पाए जाने पर शुक्रवार को जाल बिछाकर फरियादी रवि जायसवाल को घूसखोर प्राचार्य राजकुमार चेलानी के पास 10 हजार रुपये देने के लिए भेजा। रिश्वत की रकम देने के लिए रिश्वखोर प्राचार्य ने फरियादी को अपने स्कूल में बुलाया और वहां पर जैसे ही रिश्वत के 10 हजार रुपये लिए तो सादे कपड़ों में मौजूद लोकायुक्त की टीम ने प्राचार्य को रंगेहाथों पकड़ लिया। लोकायुक्त टीम ने आरोपी राजकुमार चेलानी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण संशोधन अधिनियम-2018 की धारा-7 के तहत कार्रवाई की है। लोकायुक्त संगठन ने आमजन से अपील की है कि यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी रिश्वत की मांग करता है तो इसकी सूचना लोकायुक्त कार्यालय इंदौर या 0731-2533160 और 0731-2430100 पर दी जा सकती है।
इससे पहले 27 मई को मध्यप्रदेश के मंदसौर में सहायक प्राध्यापक आत्माराम सोलंकी को 50 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए पकड़ा था। रिश्वतखोर सहायक प्राध्यापक आत्माराम सोलंकी PSC से चयनित सहायक प्राध्यापक से मनपसंद जगह पर पोस्टिंग दिलवाने के एवज में 4 लाख रुपये रिश्वत मांग रहा था और 1 लाख रुपये पहले ही ले चुका था। रिश्वत की दूसरी किस्त देने के लिए घूसखोर सहायक प्राध्यापक ने फरियादी को मधुबन ढाबे पर बुलाया था, वहां पहले से ही लोकायुक्त इंदौर की टीम जाल बिछाए हुए थी और जैसे ही सहायक प्राध्यापक आत्माराम सोलंकी ने रिश्वत के 50 हजार रुपये लिए तो उसे रंगेहाथों पकड़ लिया।