
Indore News :मध्य प्रदेश के इंदौर जिले के अंतर्गत आने वाले डॉ. आंबेडकर नगर (महू) से एक व्यापारी के साथ साइबर ठगी का हैरान करने वाला मामला सामने आया है। शेयर बाजार में निवेश कर कम समय में करोड़ों रुपए कमाने का लालच देकर जालसाजों ने एक व्यापारी को 22 लाख 50 हजार रुपए की चपत लगा दी है।
साइबर ठगों ने यश सिक्युरिटी नाम से एक फर्जी एप तैयार कर व्यापारी को निवेश के जाल में फंसाया। ढाई महीने तक अलग-अलग किश्तों में आरटीजीएस, यूपीआई और एनईएफटी के जरिए रकम जमा करवाई जाती रही। इस दौरान एप पर निवेश की वैल्यू लगातार बढ़ती दिखाई गई और व्यापारी के खाते में 5 करोड़ 1 लाख 88 हजार रुपए का मुनाफा दिखाई देने लगा। करोड़ों रुपए का रिटर्न देखकर व्यापारी को भरोसा हो गया कि, उसका निवेश कई गुना बढ़ चुका है। लेकिन, जब इतनी बड़ी रकम निकालने के लिए विड्रॉल किया तो न पैसा मिला और न ही कोई जवाब। तब पता चला कि, एप पर दिख रहा करोड़ों का मुनाफा महज छलावा था और उसकी दी हुई पूरी रकम भी ठगी जा चुकी है। शिकायत पर महू पुलिस ने अज्ञात साइबर ठग के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस के अनुसार, धारनाका में रहने वाले व्यापारी ड्रीमलैंड इलाके में स्पोट्र्स शॉप संचालित करते हैं। उनके साथ 10 अगस्त 2026 से 14 अक्टूबर 2026 के बीच धोखाधड़ी हुई। आरोपी ने खुद को इन्वेस्टमेंट ब्रोकर बताकर उनसे संपर्क किया और उनका भरोसा जीतकर यश सिक्युरिटी नाम से बनाए गए फर्जी एप पर रजिस्ट्रेशन करवा लिया।
इसके बाद शेयर बाजार में निवेश के जरिए बेहतर मुनाफा दिलाने का भरोसा दिया। व्यापारी ने आरोपी के कहने पर अलग-अलग किश्तों में आरटीजीएस, यूपीआई और एनईएफटी के माध्यम से कुल 22 लाख 50 हजार रुपए ट्रांसफर किए। इस दौरान एप पर निवेश की रकम बढ़ती हुई दिखाई जाती रही। कुछ समय बाद खाते में 5 करोड़ 1 लाख 88 हजार रुपए की वैल्यू प्रदर्शित होने लगी। व्यापारी को लगा कि, उसका निवेश कई गुना बढ़ गया है। जब उन्होंने ये रकम निकालने की कोशिश की तो विड्रॉल नहीं हुई। इसके बाद उन्हें अपने साथ हुई ठगी का अहसास हुआ और उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत के आधार पर महू पुलिस ने अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर लिया है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए संबंधित बैंक खातों में करीब 60 हजार रुपए होल्ड करवाए हैं। बाकी रकम किन खातों में ट्रांसफर हुई और वहां से किन माध्यमों से आगे भेजी गई, इसकी पड़ताल की जा रही है। पुलिस बैंक ट्रांजेक्शन और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर ठगी के नेटवर्क तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।