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इंदौर में यंगस्टर्स के सामने नई चुनौती, IT कंपनियों में ‘डिग्री’ से नहीं मिलेगी नौकरी, आने वाला बड़ा बदलाव

IT sector jobs: आईटी सेक्टर में शुरुआती स्तर की नौकरियों में कमी आई है, जबकि अनुभवी विशेषज्ञों की मांग बढ़ी है। फ्रेशर्स को प्रोजेक्ट-आधारित कौशल और एक क्षेत्र में गहराई विकसित करनी होगी।
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इंदौर

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Astha Awasthi

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Updated: 2 Nov 2026, 5:45 PM IST

आईटी सेक्टर में नौकरी, प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source- magnific)

आईटी सेक्टर में नौकरी, प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source- magnific)

Indore news: आइटी सेक्टर में नौकरी पाने का पारंपरिक फॉर्मूला बदल रहा है। इंजीनियरिंग की डिग्री और पाइथन-जावा जैसी प्रोग्रामिंग लैंग्वेज का सामान्य ज्ञान अब नौकरी की गारंटी नहीं रहा। कंपनियां ऐसे युवाओं को प्राथमिकता दे रही है, जो तकनीक की समझ के साथ उसका इस्तेमाल कर वास्तविक समस्याओं का समाधान कर सकें। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) के बढ़ते उपयोग ने भर्ती प्रक्रिया से लेकर कर्मचारियों की कार्यक्षमता संबंधी अपेक्षाओं तक में बदलाव कर दिया है। इसका सबसे ज्यादा असर शुरुआती स्तर की नौकरियों पर दिखाई दे रहा है।

कंपनियां अब नियमित कोडिंग, सॉफ्टवेयर टेस्टिंग, डेटा प्रोसेसिंग और आईटी सपोर्ट जैसे कामों में एआइ आधारित टूल्स का इस्तेमाल कर रही हैं। इससे इन कामों के लिए बड़ी संख्या में नए कर्मचारियों की जरूरत पहले जैसी नहीं रह गई है। दूसरी ओर, एआइ टूल्स विकसित करने, उन्हें मौजूदा सिस्टम से जोड़ने और जटिल तकनीकी समस्याओं का समाधान करने वाले विशेषज्ञों की मांग बढ़ रही है।

आइटी कंपनियों की 5 टॉप आवश्यकताएं

  1. एआइ और जनरेटिव एआइ की समझ
  2. क्लाउड कंप्यूटिंग और डेवऑप्स
  3. डेटा एनालिटिक्स और मशीन लर्निंग
  4. नेटवर्क सिक्योरिटी, क्लाउड सिक्योरिटी और डेटा प्रोटेक्शन की जानकारी।
  5. प्रोजेक्ट अनुभव और समस्या समाधान

2026 की हायरिंग रिपोर्ट

फाउंडइट की अगस्त 2026 की हायरिंग रिपोर्ट भी इस बदलाव की पुष्टि करती है। रिपोर्ट के अनुसार, आइटी सेक्टर में 0 से 3 वर्ष का अनुभव रखने वाले उम्मीदवारों की भर्ती में 9 प्रतिशत की कमी आई है, जबकि 7 से 10 वर्ष का अनुभव रखने वाले पेशेवरों की मांग में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई, यानी कंपनियां अब भर्ती में संख्या के बजाय अनुभव, विशेषज्ञता और तुरंत काम संभालने की क्षमता को अधिक महत्व दे रही हैं।

फ्रेशर्स को बदलनी होगी नौकरी की तैयारी

एमपी के इंदौर शहर में इस बदलाव के बीच युवाओं के सामने भी नई चुनौती है। अब केवल बीटेक या एमसीए की डिग्री और पाइथन, जावा जैसी प्रोग्रामिंग लैंग्वेज की जानकारी पर्याप्त नहीं है। कंपनियां यह देख रही हैं कि उम्मीदवार इन तकनीकों से कोई एप्लीकेशन बना सकता है या नहीं और एआई की मदद से काम की गुणवत्ता और गति कितनी बढ़ा सकता है। क्लाउड कंप्यूटिंग, डेटा एनालिसिस और साइबर सिक्योरिटी जैसी विशेषज्ञताओं को भी भर्ती में प्राथमिकता मिल रही है। पारंपरिक आइटी सपोर्ट और बार-बार किए जाने वाले तकनीकी कामों में ऑटोमेशन बढ़ने से रोजगार के अवसरों का स्वरूप बदल रहा है, वहीं एआइ एमएल इंजीनियर, डेटा साइंटिस्ट, डेवऑप्स और मशीन लर्निंग आर्किटेक्ट जैसे पदों पर विशेषज्ञता रखने वाले युवाओं के लिए संभावनाएं बढ़ रही हैं।

प्रोग्रामिंग जानना नहीं, इस्तेमाल करना जरूरी

कंपनियों के अनुसार, उम्मीदवार के लिए सिर्फ यह बताना पर्याप्त नहीं है कि उसे पाइथन या जावा आती है। उसे अपने प्रोजेक्ट और काम के जरिए यह साबित करना होगा कि वह इस तकनीकी ज्ञान का इस्तेमाल किस तरह कर सकता है। कंपनियां ऐसे युवाओं को प्राथमिकता दे रही हैं, जो कम समय में काम की जिम्मेदारी संभाल सकें और तकनीकी बदलावों के साथ खुद को अपडेट रख सकें।

एक क्षेत्र में विशेषज्ञता जरूरी

जानकारों का कहना है कि विद्यार्थियों को एक साथ कई तकनीक सीखने के बजाय अपनी मूल तकनीकी क्षमता मजबूत करते हुए किसी एक क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल करनी चाहिए। एआइ और जनरेटिव एआइ, मशीन लर्निंग, एलएलएम, आरएजी, एआइ एजेंट और एआइ एप्लीकेशन डेवलपमेंट जैसे क्षेत्रों में व्यावहारिक ज्ञान हासिल करना जरूरी है। इससे विद्यार्थी सिर्फ डिग्रीधारी उम्मीदवार बनकर नहीं रहेंगे, बल्कि कंपनियों की जरूरत के मुताबिक काम करने की क्षमता भी विकसित कर सकेंगे।

जानिए क्या कहते हैं एक्सपर्ट

डॉ. अमरेश भंडारी, शिक्षाविद का कहना है कि जनरेटिव एआइ के कारण बड़े पैमाने पर नौकरियां खत्म होने के बजाय काम करने का तरीका बदल रहा है। शुरुआती स्तर की भर्तियों पर इसका दबाव जरूर दिखाई दे रहा है, लेकिन एआइ की समझ और विशेषज्ञता रखने वाले लोगों के लिए नए अवसर भी तैयार हो रहे हैं।