
Indore Siblings Run Shop Together For 36 Years: राखी के धागे को अक्सर भाई की ओर से बहन की सुरक्षा के वादे से जोड़ा जाता है, लेकिन समय के साथ इस रिश्ते की तस्वीर भी बदल रही है। अब बहन सिर्फ भाई से सुरक्षा का भरोसा नहीं मांगती, वह उसके साथ जिम्मेदारियां भी बांटती है, सपनों को पूरा करने में साथ खड़ी होती है और परिवार की मुश्किलों में बराबर का कंधा देती है। मध्यप्रदेश के इंदौर जिले के महू का मुलानी परिवार इसी बदलते रिश्ते की खूबसूरत मिसाल है।
एमजी रोड स्थित चीप स्टोर में पिछले 36 वर्षों से शोभा मुलानी अपने दोनों भाइयों राजेश और उमेश मुलानी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर कारोबार संभाल रही हैं। पिता होतचंद मुलानी ने वर्ष 1965 में दुकान शुरू की थी। इसके बाद पीढ़ियां बदलीं, बाजार बदला, कारोबार का तरीका बदला, लेकिन भाई-बहन के रिश्ते में भरोसा और साथ आज भी कायम है। शोभा बताती हैं कि परिवार के बच्चों को बचपन से ही दुकान और कारोबार की जिम्मेदारियों का अहसास कराया जाता था। वर्ष 1990 से उन्होंने नियमित रूप से दुकान संभालना शुरू किया। तब से लेकर आज 59 वर्ष की उम्र तक उन्होंने भाइयों के साथ मिलकर कारोबार को आगे बढ़ाया। उनके भाई राजेश 54 वर्ष और उमेश 52 वर्ष के हैं। तीनों आज भी मिलकर दुकान चलाते हैं और संयुक्त परिवार में रहते हैं।
शोभा ने विवाह नहीं किया और परिवार व कारोबार की जिम्मेदारियों को ही अपने जीवन का अहम हिस्सा बनाया। उनके लिए भाई केवल राखी बंधवाने वाला रिश्ता नहीं, बल्कि जीवन के हर उतार-चढ़ाव में साथ खड़े रहने वाले साथी हैं। परिवार में कुल 11 सदस्य हैं। इतने बड़े परिवार में जिम्मेदारियां हैं, विचारों में अंतर भी आता है और भाई-बहन के बीच बच्चों जैसी नोकझोंक भी होती है, लेकिन रिश्तों में कड़वाहट टिकती नहीं। शोभा मुस्कुराते हुए बताती हैं कि इस उम्र में भी भाई-बहन बच्चों की तरह लड़ लेते हैं, लेकिन कुछ ही देर बाद फिर साथ बैठकर काम करने लगते हैं। यही उनके रिश्ते की सबसे बड़ी खूबसूरती है।
रक्षाबंधन पर भाई बहन की रक्षा का वचन देता है, लेकिन मुलानी परिवार की कहानी इस रिश्ते को एक कदम आगे ले जाती है। यहां बहन भी भाइयों के लिए उतनी ही मजबूत ढाल है। दुकान का संचालन हो या परिवार की कोई जरूरत, हर निर्णय में तीनों की भागीदारी रहती है। साढ़े तीन दशक से अधिक समय तक साथ कारोबार करना अपने आप में बड़ी बात है। व्यापार में राय अलग हो सकती है, किसी काम को लेकर बहस भी हो सकती है, लेकिन रिश्ते हमेशा फैसलों से ऊपर रहे। यही वजह है कि समय के साथ तीनों का रिश्ता और मजबूत होता गया।
बदलते समाज में भाई-बहन का रिश्ता अब केवल भाई रक्षा करेगा, बहन आशीर्वाद देगी तक सीमित नहीं है। आज बहन भी परिवार की आर्थिक, सामाजिक और भावनात्मक जिम्मेदारियों में बराबर की हिस्सेदार है। मुलानी परिवार की कहानी इसी बदलाव को सामने लाती है। शोभा ने भाइयों के साथ सिर्फ दुकान नहीं संभाली, बल्कि परिवार के सफर में भी बराबर की भूमिका निभाई। भाइयों ने भी उन्हें केवल बहन के रूप में नहीं, बल्कि भरोसेमंद साथी और बराबर की भागीदार के रूप में स्वीकार किया। मुलानी परिवार की राखी इसलिए खास है, क्योंकि यहां कलाई पर बंधने वाला धागा सिर्फ सुरक्षा का वादा नहीं करता-वह बराबरी, भरोसे और साथ निभाने की कहानी भी कहता है।