MP High Court on water contamination: दूषित पानी का कहर: इंदौर में 18वीं मौत, कोर्ट ने जताई चिंता, 15 को सुनवाई में मुख्य सचिव से मांगी रिपोर्ट...
MP High Court on Water Contamination: भागीरथपुरा में दूषित पानी से 18वीं मौत हो गई। कुलकर्णी भट्ठा की हरकुंवर बाई ने दो जनवरी को दम तोड़ा। परिजनों ने उल्टी-दस्त से मौत की बात कही है। अलग-अलग अस्पतालों में अब भी 15 मरीज आइसीयू में हैं। उल्टी-दस्त के नए मरीज भी सामने आ रहे हैं। इस बीच 18 मौतें और बीमारी को लेकर हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। मामले से जुड़ी 5 जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और आलोक अवस्थी की कोर्ट ने इसे सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल करार दिया।
कोर्ट ने कहा, स्वच्छ पेयजल का अधिकार संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत जीवन के अधिकार का हिस्सा है। कोर्ट ने सभी याचिकाओं व इंटरविनर याचिकाओं को स्वीकार कर सरकार, नगर निगम और अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अब 15 जनवरी को सुनवाई होगी। कोर्ट ने साफ किया, सरकार का जवाब आने के बाद यह तय किया जाएगा कि मामला सिविल केस का है या क्रिमिनल केस चलाया जा सकता है। जरूरत पड़ी तो अफसरों पर क्रिमिनल केस की कार्रवाई भी की जाएगी। 45 मिनट की सुनवाई में कोर्ट ने कहा, यह मुद्दा सिर्फ इंदौर नहीं, पूरे प्रदेश का है। सरकारी वकील ने कोर्ट में माना, पहले जो रिपोर्ट दी, उसमें अभी बदलाव हुआ है। उन्होंने नई रिपोर्ट भी पेश की।
इसमें 8 मौतों की पुष्टि करते हुए कहा कि एक मौत हार्ट अटैक से हुई। उसे इसमें शामिल किया जा रहा है। कोर्ट ने आदेश दिया, अगली सुनवाई पर मुख्य सचिव वर्चुअली उपस्थित होकर बताएं कि 6 जनवरी की सुनवाई में दिए निर्देशों के पालन में शासन ने क्या कदम उठाए। कांग्रेस नेता राहुल गांधी 11 जनवरी को इंदौर पहुंच सकते हैं। वे मृतक के परिजनों से मिल सकते हें। हालांकि पार्टी ने अभी कार्यक्रम जारी नहीं किया है। अधिवक्ता बागडिय़ा ने कोर्ट को बताया, 2017-18 में इंदौर से लिए गए पानी के 60 सैंपलों में 59 फेल हो गए। यह रिपोर्ट मध्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की थी। इसके बाद भी सुधारात्मक कार्रवाई नहीं की।
दूषित पानी से हुई मौतों की स्थिति पूरी तरह साफ नहीं हो पाई है। हालांकि प्रशासन ने 18 मौतें स्वीकार कर सोमवार देर रात परिजन को मुआवजा राशि के चेक सौंप दिए। लेकिन मृतकों की वास्तविक संख्या पर संशय बरकरार है। स्थानीय लोगों व तथ्यों के अनुसार, 20 मौतें हुईं। अफसरों का कहना है, जांच रिपोर्ट आई है, उसी आधार पर चेक दिए। मृतकों में एक वृद्ध महिला व एक बच्चा भी है। हालांकि प्रशासन की सूची में धार के सेवानिवृत्ति पुलिसकर्मी ओमप्रकाश शर्मा का नाम मृतकों में नहीं है। कुलकर्णी का भट्टा की हरकुंवरबाई की जानकारी भी नहीं है।
-कोर्ट ने मामले को 7 श्रेणियों में बांटा, आगे की कार्यवाही तय की।
-तात्कालिक और आपात निर्देश, पीड़ितों को मुआवजा।
-निकायों को पारदर्शिता के निर्देश।
-रोकथाम व सुधारात्मक कदम।
-जांच, जवाबदेही, अनुशासनात्मक व दंडात्मक कार्रवाई।
कोर्ट: भागीरथपुरा में कितनी मौतें हुईं?
सरकारी वकील: 8 मौतें, बाकी कार्डियक व अन्य कारणों से हुईं। 3 जनवरी को कमेटी बनाई है, 7 दिन में रिपोर्ट देगी।
कोर्ट: मीडिया रिपोट्र्स में 17 मौतें बताई गईं हैं। कई पानी पीने के कुछ घंटे बाद ही मर गए, यह गंभीर है।
कोर्ट: देश के सबसे स्वच्छ शहर में ऐसा होना दुखद है।इंदौरकी छवि विदेशों तक खराब हुई। यह अब सिर्फ एक शहर का नहीं, पूरे प्रदेश का मुद्दा है।
वरिष्ठ अधिवक्ता अजय बागड़िया ने अफसरों की नियुक्ति पर सवाल खड़े किए। कहा, सरकार नए-नए आइएएस अधिकारियों को इंदौर भेज देती है। वे शहर को चारागाह समझते हैं। हिस्सा लेते हैं, चले जाते हैं। फाइलें महीनों तक अटकी रहती हैं। पार्षदों की शिकायतें भी अनसुनी की जाती हैं। यह स्थिति एक दिन में नहीं बनी। वर्षों से दूषित पानी की शिकायतें हो रही थीं, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।
याचिकाकर्ता के वकील मनीष यादव ने कहा, निर्माण कार्य के दौरान मजदूरों की मौत पर ठेकेदार पर केस दर्ज होता है। लेकिन इस मामले में किसी अफसर पर आपराधिक केस दर्ज नहीं हुआ। विभागीय जांच या निलंबन पर्याप्त नहीं। सभी पानी टंकियों की जांच होनी चाहिए। अभिभाषक मोहन सिंह चंदेल ने कहा, आदेश के बाद भी भागीरथपुरा में दूषित पानी आ रहा है। प्रशासन हरकत में आता तो मौतें टल जातीं।
कोर्ट ने निर्देश दिए कि इंदौर कमिश्नर-कलेक्टर, निगम आयुक्त, स्वास्थ्य अधिकारी, सीएमएचओ, पीएचईडी के मुख्य अभियंता, शहरी विकास संयुक्त संचालक कोर्ट के सभी अंतरिम आदेशों का सख्ती से पालन करें। नई पाइपलाइन के टेंडर से जुड़ी फाइलें और 2017-18 की जल जांच रिपोर्ट भी अगली सुनवाई में पेश करें।
प्रभावित क्षेत्रों में सरकारी खर्च पर टैंकर/पैक्ड वाटर से स्वच्छ पानी की आपूर्ति करें। दूषित स्रोतों (पाइपलाइन, टंकी, बोरवेल) का उपयोग तुरंत बंद करें। क्षेत्र में स्वास्थ्य शिविर और मेडिकल स्क्रीनिंग कराएं। सरकारी व सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में नि:शुल्क इलाज दें। एनएबीएल मान्यता प्राप्त लैब से पानी की जांच कराएं। सीवर और पानी के पाइपलाइन जहां समानांतर हैं, वहां तत्काल मरम्मत/बदलाव करें। ऑनलाइन जल गुणवत्ता निगरानी सिस्टम लगाएं।