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‘लोग मरते रहे सिस्टम सोता रहा’, भागीरथपुरा दूषित पानी पर HC ने प्रशासन को लगाई कड़ी फटकार

MP High Court on Indore Water Contamination: इंदौर का भागीरथपुरा सिर्फ एक इलाका नहीं रहा, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही की मिसाल बन चुका है। दूषित पानी पीकर लोग बीमार पड़े, अस्पताल भर गए, कई जानें गईं, हालात हाथ से निकले और तब हाईकोर्ट के पास पहुंचा मामला, हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी, सरकार को फटकार...

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MP High Court on Water Contamination bhagirathpura hearing

MP High Court on Water Contamination bhagirathpura hearing:इनसेट CS अनुराग जैन को हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई में VC से जुड़़ने दिए आदेश(photo: FB/X)

MP High Court on water contamination case bhagirathpura: इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में जारी दूषित पानी से जिंदगियां दांव पर लग गईं। मामला अब हाईकोर्ट तक पहुंच गया है। सुनवाई जारी है। उच्च न्यायालय ने सरकार और नगर निगम दोनों पर जवाबदेही, कर्तव्यनिष्ठा और लोगों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

हाईकोर्ट में कड़ी चुनौती, पीआईएल दाखिल

बता दें कि इंदौर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रितेश इनानी ने पानी की खराब गुणवत्ता और उससे होने वाली बीमारियों को लेकर सार्वजनिक जनहित याचिका (PIL) दाखिल की है।

सरकार की रिपोर्ट पर HC की तल्ख टिप्पणी

मध्य प्रदेश सरकार ने कोर्ट में रिपोर्ट में बताया है कि भागीरथपुरा में दूषित पानी के कारण सिर्फ 4 मौतें हुईं और 294 लोग बीमार हुए। इनमें 32 गंभीर हालत में ICU में हैं। कोर्ट ने इस रिपोर्ट को रिकॉर्ड में लिया और पूछताछ जारी रखी।

मीडिया कवरेज पर भी सवाल उठाए

याचिकाकर्ताओं ने मीडिया पर प्रतिबंध लगाने का अनुरोध किया, लेकिन कोर्ट ने फिलहाल इसे ठुकरा दिया। दरअसल कोर्ट भी चाहता है कि ऐसा न करने से पब्लिक और मीडिया की निगरानी जारी रहेगी।

सरकारी दावों पर सवाल, स्थानीय रिपोर्टों में मौतों की संख्या में बड़ा अंतर क्यों?

स्वास्थ्य अधिकारियों की रिपोर्ट में 4-7 मौतें, लेकिन स्थानीय स्वास्थ्य सर्वे और अस्पताल रिकॉर्ड के मुताबिक मृतकों की संख्या 15-17 से भी अधिक बताई जा रही है।

नागरिकों ने लगाए आरोप

प्रभावित इलाके के रहवासियों का कहना है कि उन्होंने कई महीनों से खराब पानी की शिकायतें की हैं, लेकिन प्रशासन ने समय रहते कोई कार्रवाई नहीं की, इससे लोग गंभीर रूप से बीमार हुए और कई मौत की नींद सो गए।

जन स्वास्थ्य के ताजा आंकड़े, हजारों की जांच

बताया जा रहा है कि स्वास्थ्य टीमों ने 9,000 से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग की, जिनमें से कई का अस्पतालों में इलाज जारी है और कुछ की हालत गंभीर बनी हुई है।

पानी में मिले बैक्टीरिया

भागीरथपुरा से लिए गए पानी के सैंपल में बैक्टीरिया मौजूद पाए गए हैं, जिससे संक्रमण फैलने की आशंका बढ़ गई है।

हाईकोर्ट की चिंता, जवाबदेही और सुधार

हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि यह मामला सिर्फ पीड़ितों के इलाज तक सीमित नहीं रहा। न्यायालय अब सरकारी योजना, जल आपूर्ति को लेकर जवाबदेही, आपदा प्रबंधन नीति, अस्पतालों की तैयारी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने को लेकर किए जाने वाले प्रयासों पर सवाल पूछ रहा है। कोर्ट कि चिंता साफ है कि क्यो लोगों को साफ पानी देना सरकार की जिम्मेदारी नहीं है? अगर प्रशासन विफल रहा है, तो उसकी जवाबदेही तय क्यों नहीं? साथ ही ये भी कि क्या ऐसी आपदाओं को दुर्घटना कहकर छोड़ा जा सकता है?

कोर्ट का रुख सामाजिक न्याय पर

कोर्ट ने स्पष्ट संकेत दिया है कि अगर सरकार साफ, सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने में विफल रही, तो इसके लिए न्यायिक निगरानी या जांच और अधिकारियों को व्यक्तिगत तौर पर जवाब देना पड़ सकता है। हाई कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा है कि अगर साफ पानी भी सुरक्षित नहीं तो सिस्टम किस काम का है?

हाई कोर्टइंदौर ने स्पष्ट किया है कि जनता का जीवन और स्वास्थ्य सर्वोपरि है और अगर सरकारी तंत्र इसके लिए असमर्थ या अनुत्तरदायी साबित होता है, तो न्यायालय कानूनी कार्रवाइयों का मार्ग सम्भवतः लागू कर सकता है।