MP Highcourt- सामान्य वर्ग के छात्रों को राहत.. कॉलेजों को सुननी होगी भेदभाव से जुड़ी सभी वर्गों की शिकायतें, हाईकोर्ट ने मामले में केंद्र व राज्य सरकार से 4 सप्ताह में जवाब मांगा
MP Highcourt- देशभर में सामान्य यानि अनारक्षित वर्ग और आरक्षित वर्ग में भेदभाव की कई केस लगातार सामने आते रहते हैं। इस मुद्दे पर दोनों वर्गों के स्टूडेंट भी आपस में भिड़ते रहते हैं। कॉलेजों में दोनों वर्गों के आपसी संघर्ष और भेदभाव से जुड़ी कई शिकायतें आती हैं। इससे जुड़े एक मामले में एमपी हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कॉलेजों के सामान्य वर्ग के छात्रों को खासी राहत देते हुए कहा है कि कॉलेज प्रबंधन को छात्रों से भेदभाव से जुड़ी सभी वर्गों की शिकायतें समान रूप से सुननी होगी। कोर्ट ने इस संबंध में दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिए। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने मामले में केंद्र व राज्य सरकार से 4 सप्ताह में जवाब मांगा है।
कॉलेज में पढ़ रहे सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों को एमपी हाईकोर्ट ने बड़ी राहत दी। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा व जस्टिस विनय सर्राफ की युगलपीठ ने अंतरिम राहत देते हुए उनकी शिकायतों की सुनवाई के लिए भी स्टूडेंट्स ग्रिवांस रिड्रेसल कमेटी को आदेश दिया है।
हाईकोर्ट ने कहा है कि अंतिम निर्णय आने तक ग्रिवांस रिड्रसेल कमेटी सर्कुलर में दी गई श्रेणी के साथ सामान्य और अनारक्षित वर्ग के विद्यार्थियों की भी सुनवाई करेगी। जवाब के बाद याचिकाकर्ता को प्रत्युत्तर दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है। याचिका पर हाईकोर्ट में अब छह सप्ताह बाद सुनवाई होगी।
सरकार ने विद्यार्थियों में भेदभाव की शिकायतों की सुनवाई के लिए नया नियम बनाते हुए 2 फरवरी को सर्कुलर जारी किया था। देवास के छात्र अंबर शर्मा ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी। उन्होंने अपनी याचिका में कहा कि भेदभाव की शिकायतों को सिर्फ एससी-एसटी, ओबीसी, महिला, अल्पसंख्यक, दिव्यांग (डिसेबल) तक सीमित किया गया है। इससे सामान्य वर्ग के छात्रों को शिकायत दर्ज कराने के अधिकार से वंचित कर दिया गया है।
याचिकाकर्ता ने कहा कि यह सर्कुलर कॉलेज में पढ़ रहे सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों के हितों का संरक्षण नहीं करता, समानता के सिद्धांत के खिलाफ है।
ऐसा ही कानून केंद्र ने बनाया था। शीर्ष कोर्ट ने 29 जनवरी को यूजीसी रेगुलेशन्स को अस्थायी रूप से स्थगित कर दिया था। सरकार ने चिह्नित वर्ग की शिकायतों की ही सुनवाई का प्रावधान रखा था जिसे चुनौती दी गई थी।