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एमपी में बनेगा रेल बाईपास ट्रैक, शहर के बाहर से गुजरेंगी ट्रेनें

Railway Bypass: रेलवे का बाईपास बनने से मालगाड़ियों को मिलेगा नया रास्ता, राऊ से बेरछा तक नई रेल लाइन का हो रहा सर्वे, टीही और औद्योगिक क्षेत्र के विकास को देखकर बनाई जा रही योजना ।

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railway bypss

railway bypass project (demo pic)

मनीष यादव
Railway Bypass: मध्यप्रदेश के इंदौर में रेलवे अपना 'बाईपास ट्रैक' (railway bypass project) तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसका मकसद साफ है कि जो ट्रेनें इंदौर में रुके बिना आगे जाना चाहती हैं, उन्हें शहर के बाहर से ही निकाल दिया जाए। फिलहाल इस प्रोजेक्ट के लिए लोकेशन सर्वे चल रहा है, जिसमें यह तय किया जाएगा कि नया ट्रैक किन इलाकों से होकर गुजरेगा। रेलवे का बाईपास ट्रैक बनने से सबसे ज्यादा फायदा मालगाड़ियों को होगा।

इंदौर में रेलवे नेटवर्क का तेजी से विस्तार

इंदौर रेलवे नेटवर्क तेजी से विस्तार की ओर है। इंदौर-दाहोद, इंदौर-बुधनी, इंदौर-मनमाड़ और खंडवा जैसे महत्वपूर्ण ट्रैक प्रोजेक्ट पर काम जारी है। जैसे ही इंदौर-दाहोद लाइन पूरी होगी, पोर्ट से सीधा कनेक्शन मिल जाएगा। इससे मालगाड़ियों की आवाजाही में बड़ा इजाफा होगा। साथ ही मनमाड़ और खंडवा लाइन शुरू होने पर यात्री ट्रेनों की संख्या भी बढ़ने का अनुमान है। ऐसे में मौजूदा ट्रैक पर दबाव और कंजेशन बढ़ना तय है।

एक्सपर्ट्स ने पहले ही दी थी चेतावनी

रेलवे विशेषज्ञों ने पहले ही चेतावनी दी थी कि आने वाले समय में इंदौर के मौजूदा ट्रैक पर्याप्त नहीं रहेंगे। खासकर इंदौर-महू सेक्शन पर पहले से दो लाइनें हैं, लेकिन इनके पास नई पटरी बिछाने की जगह नहीं बची है। इसी कारण शहर के बाहर से एक वैकल्पिक बाईपास लाइन का सुझाव दिया गया, जिसे अब मंजूरी मिल चुकी है।

राऊ से बेरछा तक बनेगा नया ट्रैक

शुरुआत में योजना राऊ से महू के बीच बाईपास लाइन डालने की थी, लेकिन अब इसे आगे बढ़ाते हुए राऊ से बेरछा तक नया ट्रैक बिछाने का निर्णय लिया गया है। लोकेशन सर्वे के बाद जमीन चिन्हित होगी और फिर जमीन की जरूरत का प्रस्ताव रेलवे बोर्ड को भेजा जाएगा। मंजूरी मिलते ही जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू होगी।

उज्जैन-नागदा में भी बन रहा बाईपास

इंदौर के साथ-साथ उज्जैन में भी रेलवे बाईपास पर काम तेज हो गया है। चिंतामणि स्टेशन से नागदा तक नया ट्रैक बिछाया जा रहा है, जो शहर को बाईपास करते हुए सीधे कोटा लाइन से जुड़ेगा। इससे कोटा और आगे जाने वाली ट्रेनों को उज्जैन में रुककर दिशा बदलने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

क्या होगा फायदा?

रेल अधिकारियों के मुताबिक इस बाईपास लाइन से सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि जो मालगाड़ियां इंदौर में बिना रुके गुजरती हैं, वे शहर में प्रवेश किए बिना सीधे अपने गंतव्य तक पहुंच जाएंगी। इससे शहर के भीतर ट्रैफिक दबाव कम होगा और मौजूदा ट्रैक पर चलने वाली यात्री ट्रेनों की टाइमिंग भी सुधरेगी। साथ ही यह ट्रैक एक तरह से इमरजेंसी लाइन का भी काम करेगा। किसी हादसे या तकनीकी समस्या की स्थिति में ट्रेनों को इस वैकल्पिक मार्ग से डायवर्ट किया जा सकेगा। कुल मिलाकर रेलवे का यह बाईपास प्लान इंदौर को भविष्य के ट्रैफिक दबाव से राहत देने की बड़ी तैयारी माना जा रहा है। आने वाले वर्षों में यह प्रोजेक्ट शहर की रेल व्यवस्था को और अधिक सुगम और आधुनिक बना सकता है।