इंदौर

MPPSC: असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती-2026 पर बवाल, अभ्यर्थी बोले- करेंगे बड़ा आंदोलन

MPPSC: सैकड़ों पद खाली होने के बावजूद फिलॉसफी, म्यूजिक, होम साइंस और लाइब्रेरियन जैसे विषयों को बाहर रखने पर अभ्यर्थियों ने भेदभाव और शिक्षा विरोधी नीति का आरोप लगाया है।
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Updated: 25 Jan 2026, 11:42 PM IST
mp news MPPSC Assistant Professor Recruitment 2026 Candidates Threaten Major Protest
MPPSC Assistant Professor Recruitment 2026 controversy (फोटो- Patrika.com)

MP News: मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) की असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती-2026 (Assistant Professor Recruitment 2026) को लेकर प्रदेशभर में अभ्यर्थियों का विरोध तेज हो गया है। लगातार दूसरे साल फिलॉसफी, होम साइंस, म्यूजिक और लाइब्रेरियन जैसे महत्त्वपूर्ण विषयों को भर्ती प्रक्रिया से बाहर रखने पर अभ्यर्थियों ने कड़ा ऐतराज जताया है। आरोप है कि इन विषयों में सैकड़ों पद खाली होने के बावजूद आयोग ने एक भी पद शामिल नहीं किया, जो साफ तौर पर भेदभावपूर्ण और शिक्षा विरोधी नीति को दर्शाता है।

उच्च शिक्षा विभाग के आंकड़े खुद स्थिति की पुष्टि कर रहे है। फिलॉसफी, फिलॉसफी, म्यूजि म्यूजिक, होम साइंस, लाइब्रेरियन विषयों में 450 से अधिक पद खाली है। इसके बावजूद असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती-2026 में इन्हें बाहर रखा गया है।

गेस्ट फैकल्टी के भरोसे कॉलेज

नतीजतन, सरकारी कॉलेज आज भी गेस्ट फैकल्टी और प्रभारी व्यवस्थाओं के भरोसे चल रहे है। रिक्त पदों के बावजूद भर्ती न होने पर जब विभागीय स्तर पर तर्क दिया गया कि इन विषयों में अभ्यर्थियों की संख्या कम है तो अभ्यर्थियों ने इसे भ्रामक और दोहरा मापदंड बताया। कहना है कि जियोलॉजी में 10 पद, साइकोलॉजी में 10 पद, योगिक साइंस में तीन पद रिक्त है। इनमें भर्ती की जा रही है, जबकि ये प्रदेश में केवल 2 से 4 कॉलेजों में संचालित है। छात्र संख्या भी सीमित है। ऐसे में फिलॉसफी, म्यूजिक, होम साइंस और लाइब्रेरियन को 'कम छात्र संख्या' का हवाला देकर बाहर रखना अनुचित है।

तो छात्र कैसे आएंगे?

अभ्यर्थियों ने स्पष्ट किया कि इन विषयों में नामांकन कम होने की सबसे बड़ी वजह शिक्षकों की कमी है। उसी घटे नामांकन को भर्ती न करने का आधार बनाना उल्टा और अव्यावहारिक तर्क है। उन्होंने कहा कि जब शिक्षक ही नहीं होंगे, तो छात्र आएंगे कैसे? यह नीति शिक्षा विस्तार के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है। अभ्यर्थियों ने उदाहरण दिया कि बिहार, यूपी, राजस्थान, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और उत्तर-पूर्वी राज्यों में फिलॉसफी को इंटरमीडिएट से पढ़ाया जाता है। मध्यप्रदेश में इस विषय को लगातार कमजोर किया जा रहा है।

आंदोलन की चेतावनी

मांगों को लेकर अभ्यर्थी भोपाल में वल्लभ भवन पहुंचे। उच्च शिक्षा विभाग के अपर सचिव व शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार को ज्ञापन सौंपा। प्रमुख मांग है कि रिक्त पदों के आधार पर तुरंत भर्ती शुरू की जाए। योग्य नेट, सेट और पीएचडी अभ्यर्थियों के साथ हो रहे अन्याय को रोका जाए, उच्च शिक्षा व्यवस्था को स्थायी शिक्षकों से मजबूत किया जाए। जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिए जाने पर प्रदेश में आंदोलन की चेतावनी दी।

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25 Jan 2026, 11:42 PM IST
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