MP News: कभी जिस घर की दीवारों में बच्चों की हंसी गूंजती थी, आज उसी घर के दरवाजे एक पिता के लिए बंद हो चुके हैं। राऊ थाना क्षेत्र में सामने आई यह घटना सिर्फ एक विवाद नहीं, बल्कि रिश्तों के टूटते विश्वास की ऐसी कहानी है, जो भीतर तक झकझोर देती है।
MP News: कभी जिस घर की दीवारों में बच्चों की हंसी गूंजती थी, आज उसी घर के दरवाजे एक पिता के लिए बंद हो चुके हैं। इंदौर के राऊ थाना क्षेत्र में सामने आई यह घटना सिर्फ एक विवाद नहीं, बल्कि रिश्तों के टूटते विश्वास की ऐसी कहानी है, जो भीतर तक झकझोर देती है। पीड़ित की आंखों में सिर्फ आंसू नहीं, एक सवाल भी है ‘जिसे अपने खून से सींचा, वही आज मुझे क्यों नहीं पहचानता’।
70 वर्षीय सुरेश सेठ, जिन्होंने पूरी जिंदगी चाय की छोटी सी दुकान चलाकर अपने बच्चों को पाला, आज उसी घर की चौखट पर खड़े होकर अंदर आने की इजाजत मांग रहे हैं। आरोप है कि उनके बेटे विशाल और विनोद ने उन्हें न सिर्फ घर से बेदखल कर दिया, बल्कि उनकी रोजी-रोटी का सहारा रही दुकानों पर भी कब्जा कर लिया।
एसीपी निधि सक्सेना के अनुसार, सुरेश सेठ अपने एबी रोड स्थित मकान के निचले हिस्से में रहते थे, जबकि उनके बेटे पिछले 30 वर्षों से ऊपर के हिस्से में अपने परिवार के साथ रह रहे थे। घर के सामने बनी दो दुकानों में से एक छोटी दुकान में वह चाय बेचकर जीवन यापन करते थे, लेकिन अब हालात ऐसे हैं कि वही पिता अपने ही घर के बाहर खड़ा है, बिना छत, बिना सहारे और अपनों के बीच भी पराया बनकर।
पिता का आरोप है कि 1 जनवरी 2026 को सड़क चौड़ीकरण में दोनों दुकानें टूट गईं। इसके बाद बेटों ने पिता के हिस्से पर जबरन कब्जा कर कमरे में सीमेंट भरवा दी और दीवार तोड़ दी। विरोध करने पर गाली-गलौज और मारपीट भी गई। 26 अप्रेल से पिता को घर में घुसने नहीं दिया जा रहा है। बुजुर्ग ने जान से मारने की धमकी भी देने का आरोप बेटों पर लगाया है। सुरेश सेठ ने पुलिस को बताया कि इस उम्र में उनके पास रहने का कोई दूसरा ठिकाना नहीं है। वे कई दिनों से अपने ही घर में प्रवेश पाने के लिए भटक रहे हैं। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए दोनों बेटों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है और जांच शुरू कर दी है।
यह घटना सिर्फ एक परिवार की कहानी नहीं, बल्कि उस समाज का आईना है, जहां संपत्ति के लालच में रिश्तों की जड़े सूखती जा रही हैं। जिस पिता ने उंगली पकड़कर चलना सिखाया, वही आज सहारे के लिए दर-दर भटक रहा है और शायद यही इस घटना का सबसे बड़ा दर्द है।