
Indore News :मध्य प्रदेश के इंदौर के बहुचर्चित ड्रग्स, ऑनलाइन सट्टा और जमीन धोखाधड़ी मामले में पुलिस जांच का दायरा बढ़ रहा है। मामले में कई सफेदपोशों के नाम सामने आ रहे हैं। इसी कड़ी में नाना पटवारी को डीसीपी नरेंद्र सिंह रावत के समक्ष पूछताछ के लिए बुलाया गया।
रावत ने बताया कि, जमीन का एक अहम एग्रीमेंट जब्त किया है, जिसे एक युवती ने पेश किया था। एग्रीमेंट में शुभम वैली के प्लॉट का जिक्र है। पुलिस जांच कर रही है कि, नाना पटवारी ने किस आधार पर युवती से ये एग्रीमेंट करवाया था। क्या इसमें सुमित मंत्री ने कोई अनुबंध किया था? युवती का आरोप है कि, उसने पैसे तो दिए, लेकिन न तो उसे पूरी रकम वापस मिली और न ही प्लॉट मिला। पुलिस ने शुभम वैली के सभी दस्तावेज मंगवाए हैं, ताकि पता चल सके कि प्लॉट किसे और किस तरह बेचे गए हैं।
उधर, एनडीपीएस एक्ट के तहत दर्ज ड्रग्स मामले में पुलिस तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। फरार एक आरोपी की तलाश में राजेंद्र नगर पुलिस की एक टीम राजस्थान के चित्तौड़गढ़ पहुंची थी। हालांकि, पुलिस के पहुंचने से पहले ही आरोपी फरार हो गया।
ड्रग्स केस के मुख्य आरोपी संजय कौशल उर्फ रॉनी की दो दिन की रिमांड बढ़ने के बाद पुलिस ने उसके मोबाइल से संचालित हो रहे बड़े ऑनलाइन सट्टा नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। संजय ड्रग्स और सट्टा दोनों में आरोपी है। वह ऑनलाइन आइडी से सट्टे का कारोबार करता था। पैसों का लेनदेन ऑनलाइन होता था। पुलिस मामले में संजय कौशल और प्रितेश त्रिपाठी को गिरफ्तार कर चुकी है। शनिवार को सट्टे से जुड़े एक और आरोपी अमित कौशल को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। आरोपियों का मोबाइल डेटा खंगाला जा रहा है। फरार सटोरियों की तलाश में दबिश दी जा रही है।
घटनाक्रम में शुक्रवार को उस वक्त नया मोड़ आया, जब कॉलोनाइजर व बिल्डर सुमित मंत्री को उसकी फर्मों और शुभम वैली कॉलोनी के दस्तावेजों के साथ राजेंद्र नगर थाने तलब किया गया था। सुमित वहां पहुंचा, लेकिन जैसे ही उसे भनक लगी कि अंदर के कमरे में डॉक्टर दीपक बंसल से उसके मेडिकल सर्टिफिकेट को लेकर पूछताछ चल रही है और उसकी पोल खुल चुकी है तो वह पुलिस को चकमा देकर रफूचक्कर हो गया।
पूछताछ में यह बात सामने आई है कि सुमित ने पुलिस जांच से बचने के लिए फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट बनवाया था। डॉक्टर के बयानों के बाद सुमित की मुश्किलें बढ़नी तय हैं। पुलिस ने उसे नोटिस देकर फिर बुलाया है। डीसीपी नरेंद्र रावत के मुताबिक, पुख्ता सबूत मिलते ही एफआइआर दर्ज की जाएगी।