
इंदौर. संकट काल में अस्पतालों ने लूट का नया स्ट्रेन' ढूंढ़ लिया है। रेमडेसिविर इंजेक्शन की मारामारी के बीच कुछ अस्पताल प्लाज्मा थैरेपी (Plasma therapy) के विकल्प का प्रचार कर रहे हैं। इंजेक्शन खर्च से तुलना कर 80-90 हज़ार में थैरेपी का विकल्प देते हैं, जबकि वास्तविक खर्च 10-11 हजार ही होता है। इंदौर में गत वर्ष 2000 से ज्यादा संक्रमितों का प्लाज्यमा कलेक्शन किया गया था। बाद में आइसीएमआर (ICMR) ने इसे प्रमाणिक मानने से इनकार कर दिया था।
इंजेक्शन के खर्च की तुलना कर 90 हजार रुपए तक में दे रहे विकल्प
एक मरीज के परिजन ने बताया कि शहर में रेमहेसिबिर की कमी चल रही है। डॉक्टरों ने 30-40% संक्रमण खताया और इंजेक्शन लिख दिए। सामान्य इलाज चलता रहा। दो दिन बाद बताया कि इंजेक्शन का इंतजाम नहीं हो रहा हो तो आप किसी प्लाज्मा डोनर को ढूंढ़ लें। खर्च बताया गया 80-90 हजार रुपए। आप इंजेक्शन का इंतजाम करेंगे तो भी इतना ही पैसा लगेगा। परिजन ने पूछा कि क्या यह आपके अस्पताल में हो जाएगी? जवाब मिला आप चिंता नहीं करें, करवा देंगे। इस तरह अलग-अलग तरह के बाकये सामने आए हैं।
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सिर्फ प्लाज्मा का है खर्च
एक ब्लड बैंक के प्रभारी डॉक्टर ने बताया कि इसमें सिर्फ प्लाज्मा कलेक्शन का खर्च ही लगता है। यह भी 600 एमएल के लिए 9 हजार रुपए आता है। इसमें 6-7 हजार की किट आती है। 2500 से 3000 रुपए जांच के लिए लगते हैं।
4 अस्पतालों के पास अनुमति
थैरेपी को हर अस्पताल में नहीं किया जाता। इंदौर में एमवाय, अरविंदो,ग्रेटर कैलाश व चोइथराम अस्पताल के पास अनुमति है। कलेक्शन संक्रमित मरीजों से एक तय अवधि के बाद ही किया जा सकता है। आमतौर पर डॉक्टर इसे संक्रमण के चार-पांच दिनों बाद शुरू कर देते हैं।
इधर, एक हफ्ते में 100 को दी थैरेपी
गंभीर मरीजों के इलाज में प्लाज्मा का भी उपयोग किया जा रहा है। करीब 100 से ज्यादा लोगों को पिछले एक सप्ताह में प्लाज्मा लग चुका है। रेडक्रॉस सोसायटी के ब्लड कॉल सेंटर ने 70 यूनिट प्लाजमा उपलब्ध कराया है।
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रेडक्रॉस सोसायटी कॉल सेंटर संचालक अशोक नायक ने बताया कि प्लाज्मा की डिमांड बढ़ रही है। ठीक हुए लोगों की लिस्ट सीएमएचओ से ली है। कॉल सेंटर के माध्यम से ऐसे लोगों को प्लाज्या डोनेट करने प्रेरित कर रहे हैं।