
Indore news: कैंसर मरीजों के लिए राहत भरी खबर सामने आ रही है। जानकारी के लिए बता दें कि आधुनिक रेडियोथेरेपी तकनीक पर हो रहे शोध से संभावना है कि उपचार के दौरान कैंसर के ट्यूमर पर नजर रखते हुए रेडिएशन दिया जा सकेगा। इससे कैंसरग्रस्त हिस्से पर सटीक निशाना लगाने और आसपास के स्वस्थ अंगों को नुकसान से बचाने में मदद मिलेगी। भविष्य में ऐसी व्यवस्था विकसित करने का लक्ष्य है, जिसमें सुबह बीमारी की पहचान हो, दोपहर तक जांच और इलाज की प्रक्रिया शुरू हो जाए और उपचार के बाद मरीज को जल्द घर भेजा जा सके। यह बात इंग्लैंड में इंस्टीट्यूट ऑफ कैंसर रिसर्च और द रॉयल मार्सडेन एनएचएस फाउंडेशन ट्रस्ट के ज्वाइंट डिपार्टमेंट ऑफ फिजिक्स के प्रमुख प्रो. उवे ओएल्फके ने कैंसर उपचार में रेडियोथेरेपी की बदलती तकनीक पर चर्चा में कही।
वे करीब दो दशक से रेडियोथेरेपी, मेडिकल फिजिक्स और कैंसर के आधुनिक उपचार से जुड़ी तकनीकों पर शोध कर रहे हैं। वे इंटरनेशनल साइंटिफिक एक्सचेंज प्रोग्राम मीट द प्रोफेसर के तहत इंदौर पहुंचे थे। यहां उन्होंने ऑन्कोलॉजी के जटिल और अस्पष्ट पहलुओं पर काम करना, रेडिएशन थेरेपी अनुसंधान की चुनौतियां और अवसर विषय पर विचार साझा किए। उन्होंने एक दिन पहले आरआर कैट में भी विशेष सत्र लेकर इसी विषय पर चर्चा की। उनके मुताबिक, कैंसर के बेहतर उपचार के लिए आधुनिक तकनीक के साथ वैज्ञानिक शोध और अंतरराष्ट्रीय सहयोग महत्वपूर्ण है।
प्रो. ओएल्फके ने रियल टाइम ट्यूमर थेरेपी पर कहा कि इस तकनीक में उपचार के दौरान ट्यूमर की स्थिति पर लगातार नजर रखी जाती है। सांस लेने जैसी शारीरिक गतिविधियों के कारण भी कुछ ट्यूमर की स्थिति बदल सकती है। ऐसे में इमेजिंग तकनीक से ट्यूमर की वास्तविक स्थिति के अनुसार रेडिएशन देने की दिशा में काम किया जा रहा है। प्रो. ओएल्फके के शोध का प्रमुख क्षेत्र यह भी है कि रेडिएशन थेरेपी को प्रभावी कैसे बनाया जाए। उन्होंने भारत में रेडियोथेरेपी की आधुनिक सुविधाओं पर संतोष जताया। मुंबई के टाटा मेमोरियल कैंसर अस्पताल का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां उपलब्ध सुविधाएं यूरोप के कैंसर केंद्रों के स्तर की हैं।