
Indore- राजस्थान के दौसा में हंस ट्रेवल्स की स्लीपर बस में टक्कर के बाद आग लग गई जिसमें 8 यात्री जिंदा जल गए थे।
हादसे के बाद इंदौर में अब बस की सुरक्षा व्यवस्था और आपातकालीन निकास (इमरजेंसी एग्जिट) को लेकर सवाल उठने लगे हैं। हादसे में घायल यात्रियों और प्रत्यक्षदर्शियों का दावा है कि बस में 2 मिनट बाद आग लगी लेकिन पीछे फंसे यात्री नहीं निकल सके। यदि बस का इमरजेंसी गेट समय पर खुल जाता तो इन यात्रियों को बाहर निकालने का मौका मिल सकता था और कई जानें बच जातीं। हालांकि, इन दावों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। हादसे की राजस्थान पुलिस विभिन्न पहलुओं की जांच कर रही है।
प्रत्यक्षदर्शी बोले- सामान रखने वाली जगह की ओर फंसे यात्री
हादसे में घायल इंदौर निवासी आदित्य ने बताया कि दुर्घटना के समय अधिकांश यात्री सो रहे थे। टक्कर लगते ही ऊपरी स्लीपर पर सो रहे यात्री नीचे गिर पड़े, जबकि नीचे की बर्थ पर बैठे कुछ लोग सामान रखने वाली जगह की ओर फंस गए। आदित्य का दावा है कि टक्कर के करीब दो मिनट बाद बस में आग लगी। उन्होंने कहा कि बस के साइड के शीशे खुलने वाले नहीं थे और ऐसी बसों में एक से अधिक प्रभावी इमरजेंसी एग्जिट होना चाहिए।
कुछ घायलों ने स्थानीय मीडिया से बातचीत में दावा किया कि बस के लगेज कंपार्टमेंट में ज्वलनशील सामान रखा था, जिससे आग तेजी से फैली। कुछ यात्रियों ने चालक के नशे में होने का भी आरोप लगाया। इन सभी दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और राजस्थान पुलिस इन्हें जांच का हिस्सा मानकर पड़ताल कर रही है।
जांच में सामने आया है कि दुर्घटनाग्रस्त बस का पंजीयन अरुणाचल प्रदेश में था, जबकि उसका संचालन इंदौर से किया जा रहा था। राजस्थान सरकार ने अंतरराज्यीय पंजीयन, बसों के सुरक्षा मानकों और बस बॉडी कोड के अनुपालन जैसे मुद्दों पर भी संबंधित एजेंसियों से जानकारी मांगी है।
नवंबर 2025: महिला यात्री से कथित छेड़छाड़ के मामले में स्टाफ पर मदद नहीं करने के आरोप लगे थे।
अगस्त 2024: इंदौर में ट्रैफिक विवाद के दौरान बस चालक और कर्मचारियों पर पुलिसकर्मी से मारपीट का मामला दर्ज हुआ था।
दिसंबर 2022: इंदौर में बस की टक्कर से एक युवक की मौत हुई थी।
रायपुर (पूर्व मामला): पार्सल के जरिए कथित हवाला राशि की जब्ती के मामले में ट्रेवल्स कार्यालय पर कार्रवाई हुई थी।
आपातकालीन निकास (इमरजेंसी एग्जिट) की कार्यक्षमता।
बसों में सीसीटीवी और सुरक्षा उपकरणों की स्थिति।
रात्रिकालीन आपातकालीन सहायता व्यवस्था।
दुर्घटना स्थल पर दमकल और ट्रॉमा रिस्पॉन्स की उपलब्धता। हाईवे पर संकेतकों और सड़क सुरक्षा प्रबंधन में सुधार।