SIR : विशेष गहन पुनरीक्षण के तहत दावे-आपत्ति की सुनवाई चल रही है। इस बीच मतदाता सूची को लेकर अजीब स्थिति सामने आई है। जिले में करीब 5.70 लाख मतदाता तार्किक त्रुटि श्रेणी में सामने आए हैं।
SIR :मध्य प्रदेश के इंदौर जिले में जारी विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत दावे-आपत्ति की सुनवाई का सिलसिला जारी है, लेकिन इस बीच मतदाता सूची को लेकर अजीब स्थिति देखने को मिली है। जिले में करीब 5.70 लाख मतदाता तार्किक त्रुटि श्रेणी में सामने आए हैं, जिनके रिकार्ड साल 2003 की मतदाता सूची से मैप तो हैं, लेकिन विवरणों में विसंगतियों के कारण वे संदेह के घेरे में हैं। ये संख्या उन 1.33 लाख मतदाताओं से अलग है, जिनकी साल 2003 से मैपिंग नहीं हुई है।
दरअसल, निर्वाचन आयोग के सॉफ्टवेयर द्वारा रिकॉर्ड मिलान के दौरान पांच प्रकार की तार्किक त्रुटियां चिह्नित हुई हैं। इनमें सबसे बड़ी संख्या उन मतदाताओं की है, जिनके पिता का नाम 2003 की सूची से मेल नहीं हो रहा है। नाम की स्पेलिंग में गलती, नाम का अधूरा होना, सरनेम में बदलाव और जन्मतिथि में अंतर जैसी त्रुटियां सामने आई हैं। इन मतदाताओं को आयोग ने संदेह के घेरे में रखा है। हालांकि, इस श्रेणी के मतदाताओं के लिए राहत की बात ये है कि इन्हें कोई नोटिस जारी नहीं होंगे यानी इन मतदाताओं को लिस्ट से बाहर नहीं किया जाएगा।
इस संबंध में मीडिया से चर्चा करते हुए उप जिला निर्वाचन अधिकारी नवजीवन विजय पंवार ने बताया कि, आयोग ने कुछ मतदाताओं को तार्किक त्रुटि में शामिल किया है। इनका सुधार बीएलओ द्वारा अपने मोबाइल लॉगिन से किया जाएगा। बीएलओ घोषणा पत्र भरकर उक्त मतदाता की पुष्टि करेंगे। अगर इसमें गलत मैपिंग हुई तो उसमें सुधार कर नोटिस जारी किये जाएंगे।
इंदौर जिले की मतदाता सूची में शामिल 28.67 लाख मतदाताओं के फार्म भरने का कार्य 04 नवंबर से 11 दिसंबर के बीच किया है। इस दौरान 24 लाख 20 हजार 171 मतदाताओं के फार्म भरकर आए, इसलिए इन्हें मतदाता सूची में शामिल किया गया है। इसमें 01 लाख 33 हजार 696 मतदाताओं की मैपिंग नहीं हुई थी और अब इनसे दस्तावेज लिए जा रहे हैं। वहीं, 04 लाख 47 हजार 123 मतदाताओं के फार्म नहीं आने से इनका नाम प्रारंभ मतदाता सूची से हटाया गया है। इसमें स्थानांतरित, मृतक और पते पर नहीं मिलने वाले मतदाता शामिल हैं।
-नाम में त्रुटि : वर्तमान मतदाता सूची में मतदाता का नाम रामलाल दर्ज है, जबकि 2003 की सूची में नाम राम था।
-पिता का नाम बेमेल : 2003 की सूची में पिता के नाम के साथ सरनेम नहीं था, लेकिन अब नाम के साथ सरनेम दर्ज है।
-मैपिंग की परेशानी : एक पालक की छह से अधिक नामों से मैपिंग नहीं होना चाहिए, लेकिन कुछ मामलों में अधिक हुई है।
-उम्र की परेशानी : बच्चों और पिता की उम्र में 15 साल से कम और 50 साल से अधिक का अंतर सामने आ रहा है।
-दादा की उम्र : कई मतदाताओं के दादा की उम्र में 40 साल से कम का अंतर दिखाई दे रहा है।