
Indore news: एमपी में इंदौर के एसजीएसआइटीएस से पढ़े इंजीनियर पुनीत बदेका की विकसित की गई स्पेस इमेजिंग तकनीक अब अंतरिक्ष तक पहुंच गई है। हैदराबाद की डीपटेक कंपनी ईओन स्पेस लैब्स के को-फाउंडर पुनीत बदेका और उनकी टीम द्वारा विकसित महज 502 ग्राम की 'मीरा' ने स्पेसएक्स के ट्रांसपोर्टर-18 मिशन के साथ लो अर्थ ऑर्बिट में पहुंचकर पहली सफल ऑर्बिटल फ्लाइट पूरी की है। इसे कैलिफोर्निया के वेंडेनबर्ग स्पेस फोर्स बेस से फाल्कन 9 रॉकेट के जरिए लॉन्च किया गया। 'मीरा' को टेकमी 2 स्पेस के एमओआइ-1ए ऑर्बिटल कंप्यूटिंग सैटेलाइट से इंटीग्रेट किया था। अर्थ ऑब्जर्वेशन के लिए विकसित यह सिस्टम हाई डेफिनिशन मल्टीस्पेक्ट्रल इमेजिंग में सक्षम है। कंपनी के अनुसार इसमें नौ मल्टीस्पेक्ट्रल बैंड और 9.2 मीटर का ग्राउंड रिजोल्यूशन है।
इसी सप्ताह ईओन स्पेस लैब्स को मिनिएचराइज्ड टेलिस्कोप आधारित इमेजिंग सिस्टम के लिए भारतीय पेटेंट मिला है। पेटेंट 'ए मिनिएचराइज्ड टेलिस्कोप-बेस्ड इमेजिंग सिस्टम' से जुड़ा है और 'मीरा' के कॉम्पैक्ट इमेजिंग आर्किटेक्चर को कवर करता है।
इस तकनीक का इस्तेमाल फसल और जमीन की स्थिति समझने, पानी की कमी का पता लगाने, खनन क्षेत्रों की निगरानी, समुद्री निगरानी, सप्लाई चेन और इंश्योरेंस जैसे क्षेत्रों में किया जा सकता है। इससे सिर्फ तस्वीरें लेने के बजाय जमीन, फसल और प्राकृतिक संसाधनों की जानकारी हासिल की जा सकती है। ईओन स्पेस लैब्स स्पेस के अलावा ड्रोन और ग्राउंड आधारित इमेजिंग सिस्टम पर भी काम कर रही है।
कंपनी के मुताबिक, 'मीरा' का आकार पारंपरिक टेलिस्कोप से तीन से चार गुना छोटा है, जबकि इसका रिजोल्यूशन बड़े और भारी टेलिस्कोप के समान रखने का लक्ष्य है। कंपनी ने डिजाइन, मैन्युफैक्चरिंग और डेवलपमेंट को एक ही प्लेटफॉर्म पर विकसित किया है। पुनीत बदेका कंपनी में प्रिसीजन मैन्युफैक्चरिंग और ऑप्टिक्स से जुड़े काम देखते हैं। उन्होंने एसजीएसआईटीएस, इंदौर से इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग एंड मैनेजमेंट में मास्टर्स किया है।
'मीरा' की खासियत इसका बेहद छोटा और हल्का आकार है। इसका ऑप्टिकल आर्किटेक्चर एक सिंगल फ्यूज्ड-सिलिका ब्लॉक पर आधारित है। इससे कम आकार में मजबूती और इमेजिंग क्षमता हासिल करने का प्रयास किया गया है। साथ ही मल्टीस्पेक्ट्रल तकनीक अलग-अलग वेवलेंथ या कलर बैंड की जानकारी का विश्लेषण करती है।
'मीरा' को जनवरी 2026 में इसरो के पीएसएलवी-सी62 मिशन के जरिए एमओआई-1 के साथ अंतरिक्ष में भेजे जाने की तैयारी थी। तकनीकी समस्या के कारण उस मिशन में पेलोड का डिप्लॉयमेंट नहीं हो सका। हालांकि, उस दौरान 'मीरा' की मैकेनिकल इंटीग्रेशन, स्पेसफ्लाइट पैकेजिंग और हार्डवेयर से जुड़ी वैलिडेशन पूरी हुई। टीम ने इसे अगली ऑर्बिटल फ्लाइट के लिए तैयार किया। ट्रांसपोर्टर-18 मिशन में सफल डिप्लॉयमेंट के बाद अब इसे वास्तविक ऑर्बिटल फ्लाइट हेरिटेज मिला है।