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NTF की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, देशभर में 3542 छात्रों ने छोड़ी दी IIT की पढ़ाई

IIT Indore: आईआईटी इंदौर में चार साल में छात्र संख्या 45% बढ़ी, जो संस्थान के विस्तार का संकेत है। हालांकि, ड्रॉपआउट रोकने के लिए अकादमिक सहायता, काउंसलिंग और समय पर छात्र सहायता व्यवस्था मजबूत करना जरूरी है।
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इंदौर आइआइटी, (Photo Source - Patrika)

इंदौर आइआइटी, (Photo Source - Patrika)

IIT Indore: साल 2018 से 2023 के बीच देश के आइआइटी में एससी-एसटी, ओबीसी वर्ग के 3542 विद्यार्थियों ने पढ़ाई बीच में छोड़ दी। इन आंकड़ों के बीच एमपी में इंदौर आइआइटी में सुखद पहलू यह है कि यहां विद्यार्थियों की संख्या बढ़ी है। नेशनल टास्क फोर्स (एनटीएफ) की अंतरिम रिपोर्ट के अनुसार 2022-23 में 2333 विद्यार्थी थे। 2025-26 में अगस्त तक 3385 हो गए। हालांकि इसे ड्रॉपआउट नहीं होने का प्रमाण नहीं माना जा सकता। आइआइटी इंदौर के पुराने संसदीय रिकॉर्ड में 50 ड्रॉपआउट थे। इनमें 6 एससी, 3 एसटी और 8 ओबीसी थे।

यह रिकॉर्ड एनटीएफ की 2018-23 वाली राष्ट्रीय अवधि से अलग संदर्भ का है, इसलिए दोनों आंकड़ों की तुलना संभव नहीं। सरकार के बताए गए कारणों में दूसरे संस्थान या विभाग में प्रवेश मिलना, व्यक्तिगत कारण और अन्य परिस्थितियां हैं। आइआइटी इंदौर के पीआरओ प्रो. सुनील कुमार के अनुसार इंदौर आइआइटी छात्रों की संख्या बढ़ाना संस्थान के विस्तार की तस्वीर पेश कर रहा है। हम कोशिश कर रहे हैं कि यहां से ड्रॉपआउट न हो।

चार साल में 45 फीसदी बढ़ा छात्र आधार

आइआइटी इंदौर में 2022-23 में 2333 विद्यार्थी थे। अगस्त 2023-24 तक संख्या 2810, अगस्त 2024-25 में 3140 और अगस्त 2025-26 में 3385 हो गई। यानी, 2022-23 की तुलना 2025-26 में 1052 विद्यार्थी (45%) अधिक हैं। इंदौर में छात्रों की संख्या बढ़ना स्थानीय स्तर पर सकारात्मक संकेत है। हालांकि, निष्कर्ष यह नहीं निकाला जा सकता कि संस्थान में ड्रॉपआउट नहीं है।

इंदौर में इतने ड्रॉप आउट

03 -एसटी
06- एससी
08 ओबीसी
17- एससी, एसटी, ओबीसी
33- अन्य श्रेणियां

तो व्यवस्था भी बढ़े…

आइआइटी इंदौर में बढ़ती छात्र संख्या के लिए अकादमिक सहायता, काउंसलिंग, आर्थिक सहयोग और विद्यार्थियों की समस्याओं की समय पर पहचान जैसी व्यवस्थाओं का महत्त्व भी बढ़ता है। एनटीएफ के सर्वे में जवाब देने वाले 70% से ज्यादा संस्थानों में फुल टाइम मानसिक स्वास्थ्य सेवा प्रदाता नहीं था। 4% से भी कम संस्थानों ने आत्महत्या जोखिम प्रबंधन प्रोटोकॉल होने की जानकारी दी।