MP News: अधिकारियों का कहना है कि कई बार बिना जानकारी के किए गए निर्माण कार्य भूमिगत संरचनाओं को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
MP News: शहर में मेट्रो प्रोजेक्ट के विस्तार के साथ ही अब उसके आसपास के इलाकों में निर्माण गतिविधियों पर सख्ती बढऩे जा रही है। प्रस्ताव है कि अंडरग्राउंड मेट्रो स्टेशनों के 50 मीटर दायरे में किसी भी तरह का निर्माण या तोडफ़ोड़ करने से पहले मेट्रो प्रबंधन से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) लेना अनिवार्य होगा। यह व्यवस्था भोपाल में लागू हो चुकी है और अब इंदौर में भी जल्द लागू करने की तैयारी है। मेट्रो अधिकारियों के मुताबिक फिलहाल अंडरग्राउंड स्टेशनों पर डक्ट निर्माण का काम चल रहा है। जैसे ही टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) का काम तेज होगा उसी के साथ यह नोटिफिकेशन जारी कर दिया जाएगा।
इसका उद्देश्य मेट्रो संरचना की सुरक्षा सुनिश्चित करना और आसपास होने वाले निर्माण से किसी भी संभावित खतरे को रोकना है। नए नियमों के तहत 50 मीटर के दायरे में आने वाले सभी निजी और व्यावसायिक निर्माण कार्यों के लिए पहले विस्तृत डिजाइन के साथ आवेदन करना होगा। मेट्रो की तकनीकी टीम उस डिजाइन का परीक्षण करेगी। यदि डिजाइन सुरक्षित और मानकों के अनुरूप पाया गया तभी एनओसी जारी की जाएगी। कमजोर या जोखिमपूर्ण निर्माण को अनुमति नहीं दी जाएगी।
अधिकारियों का कहना है कि कई बार बिना जानकारी के किए गए निर्माण कार्य भूमिगत संरचनाओं को नुकसान पहुंचा सकते हैं। मेट्रो टनल और स्टेशन अत्यंत संवेदनशील होते हैं, इसलिए उनके आसपास की गतिविधियों पर निगरानी जरूरी है। इस नियम का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का प्रावधान भी तैयार किया जा रहा है। निर्माण करने या तोडफ़ोड़ करने पर जुर्माना लगाया जाएगा, साथ ही कानूनी कार्रवाई भी संभव है। शहर के रियल एस्टेट सेक्टर और आम नागरिकों के लिए यह एक बड़ा बदलाव होगा। जहां एक ओर इससे निर्माण प्रक्रिया में अतिरिक्त औपचारिकताएं जुड़ेंगी, वहीं दूसरी ओर मेट्रो की सुरक्षा और दीर्घकालिक मजबूती सुनिश्चित होगी।
शहर के मेट्रो स्टेशनों पर अब पार्किंग की समस्या जल्द खत्म होने वाली है। लंबे समय से चली आ रही खींचतान के बाद आखिरकार इंदौर विकास प्राधिकरण (आइडीए) और नगर निगम ने मेट्रो स्टेशन के लिए जमीन आवंटित कर दी है। इसके साथ ही सुपर कॉरिडोर पर स्टेशन के पास पार्किंग निर्माण का काम भी शुरू हो गया है। अब तक हालात यह थे कि मेट्रो स्टेशन पर केवल दोपहिया वाहन ही किसी तरह खड़े हो पा रहे थे।
पार्किंग की उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण लोग फुटपाथ और सड़क किनारे वाहन खड़े करने को मजबूर थे। कुछ स्टेशन पर तो इसके लिए भी जगह नहीं थी। इसे लेकर लगातार विरोध हो रहा था। स्थानीय यात्रियों और संगठनों ने कई बार इस मुद्दे को उठाया। मेट्रो प्रबंधन ने भी अपनी चूक स्वीकार करते हुए पार्किंग निर्माण की जरूरत मानी, लेकिन सबसे बड़ी अड़चन जमीन को लेकर थी। आखिरकार शासन के हस्तक्षेप के बाद आइडीए और नगर निगम ने आगे आकर जमीन उपलब्ध कराई।