MP News: इंदौर नगर निगम को इन 1825 कर्मचारियों को स्थायी कर्मचारी का दर्जा और वेतन लाभ देना अनिवार्य हो गया है।
MP News: 1825 दैनिक वेतनभोगी (मस्टर) कर्मचारियों को नियमित कर्मचारी का दर्जा देने के मामले में इंदौर नगर निगम को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने मप्र हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप से इनकार करते हुए निगम द्वारा दायर सभी विशेष अनुमति याचिकाएं खारिज कर दीं। इसके साथ ही हाईकोर्ट का आदेश अंतिम रूप से प्रभावी हो गया है।
सुप्रीम कोर्ट में नगर निगम की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने पक्ष रखा, लेकिन कोर्ट ने दलीलों को स्वीकार नहीं किया। न्यायालय ने स्पष्ट कहा कि हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं बनता। साथ ही कहा गया कि विशेष अनुमति याचिकाएं निरस्त की जाती हैं और सभी लंबित आवेदन स्वतः समाप्त मानें जाएंगे।
इससे पहले निगम कर्मचारी यूनियन की ओर से अधिवक्ता ओमप्रकाश खटके ने औद्योगिक न्यायाधिकरण में कर्मचारियों को 'समान काम समान प्रकरण दायर किया था। 6 फरवरी 2023 को न्यायाधिकरण ने वेतन' का लाभ देने का आदेश दिया था। नगर निगम ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए 1650 दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को नियमित स्थायी कर्मचारी का दर्जा देने और स्थायी कर्मचारियों के समान वेतन लाभ देने को वैध व उचित ठहराया था।
हाईकोर्ट ने माना था कि सभी कर्मचारी वर्ष 2016 से नगर निगम की डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण व्यवस्था के तहत लगातार कार्यरत हैं और 240 दिनों से अधिक सेवा दे चुके हैं। कोर्ट ने यह भी कहा था कि इन्हीं कर्मचारियों के परिश्रम और सेवाओं से इंदौर शहर देश का सबसे स्वच्छ शहर बन सका है।
दूसरी ओर, नगर निगम का तर्क था कि 16 मई 2007 के बाद नियुक्त दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को राज्य शासन की अनुमति के बिना नियमित नहीं किया जा सकता। इस पर हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया था कि शासन से अनुमति न लेना नगर निगम की प्रशासनिक चूक है, जिसका दंड मजदूरों को नहीं दिया जा सकता। कोर्ट ने यह भी माना कि नगर निगम की कार्यशाला फैक्ट्री अधिनियम के तहत पंजीकृत है, इसलिए वहां कार्यरत कर्मचारी औद्योगिक कानूनों के तहत स्थायी दर्जे के हकदार हैं
हाईकोर्ट ने आदेश दिया था कि 1825 दैनिक वेतनभोगी वाहन चालकों को मध्यप्रदेश शासन के 7 अक्टूबर 2016 के परिपत्र के तहत नियमितीकरण (विनियमीकरण) का लाभ दिया जाए और औद्योगिक न्यायाधिकरण के पुरस्कार को तत्काल लागू किया जाए। अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा हस्तक्षेप से इनकार के बाद इंदौर नगर निगम को इन 1825 कर्मचारियों को स्थायी कर्मचारी का दर्जा और वेतन लाभ देना अनिवार्य हो गया है।