इंदौर

कुंवारों की जल्द होगी शादी ! इंदौर से इंग्लैंड-अमरीका से दुबई तक पहुंची ‘पोटलीवाले’ गणेश जी की हल्दी

Potli-wale Ganesha ji: इंदौर के प्राचीन पोटलीवाले गणेश मंदिर में हर गुरुवार विवाह की मनोकामना वाले कुंवारों को हल्दी की गांठ दी जाती है, जिसे पूजने से विवाह योग जल्द बनने की मान्यता है।
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Sep 17, 2026
‘पोटलीवाले गणेश’ जी प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source - Patrika)
‘पोटलीवाले गणेश’ जी प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source - Patrika)

Indore news: जयपुर के मोतीडूंगरी गणेश मंदिर में कुंवारों के बीच मेहंदी लेने की परंपरा चर्चा में है, वहीं इंदौर में भगवान गणेश का एक ऐसा मंदिर भी है, जहां विवाह की मनोकामना लेकर आने वाले कुंवारों को हर गुरुवार हल्दी की गांठ दी जाती है। यह परंपरा शहर के प्राचीन पोटलीवाले गणेश मंदिर की पहचान बन चुकी है। मान्यता है कि भगवान गणेश की सहस्रार्चना में शामिल हल्दी की गांठ घर ले जाकर पूजन करने से विवाह के योग जल्द बनते हैं। मंदिर की इस परंपरा से जुड़ी हल्दी अब इंदौर से निकलकर इंग्लैंड, अमेरिका और दुबई तक पहुंच रही है।

हर गुरुवार कुंवारों को मिलती है हल्दी

पोटलीवाले गणेश मंदिर में गुरुवार का दिन विशेष माना जाता है। विवाह की कामना रखने वाले युवक-युवतियां इस दिन मंदिर पहुंचकर भगवान गणेश की हल्दी की गांठ प्राप्त करते हैं। मंदिर में हर महीने चतुर्थी और विशेष अवसरों पर हल्दी की गांठ से भगवान गणेश की 1001 सहस्रार्चना की जाती है। इसके बाद इसी हल्दी को श्रद्धालुओं को गुरुवार के दिन दिया जाता है। श्रद्धालु हल्दी की गांठ घर ले जाकर भगवान गणेश का पूजन करते हैं। मंदिर से जुड़ी मान्यता के अनुसार, यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है। विवाह की इच्छा रखने वाले युवक-युवतियां इसे भगवान गणेश का आशीर्वाद मानकर घर में स्थापित कर पूजन करते हैं।

सात समंदर पार पहुंचा गणेशजी का आशीर्वाद

पोटलीवाले गणेश की हल्दी की परंपरा अब केवल इंदौर और मध्यप्रदेश तक सीमित नहीं है। देश के अलग-अलग हिस्सों के साथ विदेशों में रहने वाले श्रद्धालु भी मंदिर की हल्दी के लिए संपर्क करते हैं। कई परिवार अपने रिश्तेदारों के माध्यम से यह हल्दी इंग्लैंड, अमरीका और दुबई तक भेज चुके हैं। इस तरह मंदिर की वर्षों पुरानी परंपरा विदेशों में बसे परिवारों तक भी पहुंच गई है।

हाथ में धन की पोटली, इसलिए नाम पड़ा पोटलीवाले गणेश

पोटलीवाले गणेश मंदिर की पहचान केवल हल्दी की इस परंपरा से ही नहीं, बल्कि यहां विराजित प्राचीन प्रतिमा से भी है। मंदिर में करीब 300 से 400 साल पुरानी चतुर्भुज गणेश प्रतिमा काले पत्थर से बनी है। भगवान गणेश की दाहिनी सूंड है और वे रिद्धि-सिद्धि के साथ विराजमान हैं। प्रतिमा के एक हाथ में धन की पोटली है। इसी वजह से श्रद्धालु इन्हें ‘पोटलीवाले गणेश’ के नाम से जानते हैं।

काले पत्थर की प्रतिमा पर चढ़ा केसरिया रंग

पंडित गणेश कुमार पौराणिक और मयंक पुराणिक बताते हैं कि समय के साथ भगवान गणेश को चोला चढ़ाने की परंपरा के कारण काले पत्थर की यह प्रतिमा अब केसरिया रंग में नजर आती है। मंदिर की छत पर स्थापित गणेश यंत्र भी यहां की प्रमुख विशेषताओं में शामिल है। उनके अनुसार खजराना गणेश मंदिर के बाद यह ऐसा मंदिर है, जहां गर्भगृह के ऊपर गणेश यंत्र स्थापित है। मंदिर से जुड़े श्रद्धालु इसे सकारात्मकता से जोड़कर देखते हैं। इसी प्राचीन प्रतिमा, गणेश यंत्र और हल्दी की परंपरा ने पोटलीवाले गणेश मंदिर को इंदौर की धार्मिक पहचान में अलग स्थान दिया है।

Updated on:
17 Sept 2026 11:32 am
Published on:
17 Sept 2026 11:32 am