US-Israel-Iran War: एआइएमपी के कोषाध्यक्ष अनिल पालीवाल ने बताया, तेल और केमिकल आधारित लगभग हर उत्पाद प्रभावित हो रहा है।
US-Israel-Iran War: पश्चिम एशिया में बढ़ते ईरान- अमेरिका और इजरायल के तनाव की गूंज अब इंदौर की औद्योगिक इकाइयों में साफ सुनाई दे रही है। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति में अनिश्चितता ने स्थानीय उद्योगों की कमर तोड़ दी है। केमिकल, प्लास्टिक, फेब्रिकेशन और टाइल्स जैसे प्रमुख सेक्टर कच्चे माल की बढ़ती कीमतों और बाधित सप्लाई से जूझ रहे हैं। उत्पादन लागत बेतहाशा बढऩे से कई उद्योगों ने मजबूरी में 10 से 30 प्रतिशत तक कर्मचारियों की छंटनी शुरू कर दी है। उद्योग संगठनों का कहना है कि यदि 30 अप्रेल तक हालात नहीं सुधरे तो संकट और गहरा सकता है, जिसका सीधा असर बाजार और आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा।
एआइएमपी के कोषाध्यक्ष अनिल पालीवाल ने बताया, तेल और केमिकल आधारित लगभग हर उत्पाद प्रभावित हो रहा है। क्रूड ऑयल से बनने वाले केमिकल के बिना वाशिंग पावडर और साबुन जैसे दैनिक उपयोग के उत्पाद तैयार नहीं हो सकते। कहीं रॉ मटेरियल महंगा हो गया है, तो कहीं उपलब्धता ही नहीं है। उत्पादन लागत तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि बढ़ती लागत और ऑर्डर में कमी के चलते कई उद्योगों को मजबूरी में 10 से 30 प्रतिशत तक कर्मचारियों की छंटनी करनी पड़ी है।
इंदौर टाइल्स सेनेटरी एसोसिएशन के अध्यक्ष गोविंद अग्रवाल ने बताया कि शहर में करीब 300 से अधिक बड़े टाइल्स व्यापारी हैं और अधिकांश माल गुजरात के मोरबी से आता है। मोरबी में 1200 में से करीब 700 फैक्ट्रियां बंद हो चुकी हैं। गैस की कमी से उत्पादन ठप है और सैकड़ों मजदूर पलायन कर चुके हैं। परिणामस्वरूप इंदौर में टाइल्स की शॉर्टेज है। पुराने स्टॉक की बिक्री हो रही है, जबकि महंगे नए माल की खरीद सीमित हो गई है। व्यापारी और उपभोक्ता दोनों असमंजस में हैं।
एआइएमपी के पूर्व अध्यक्ष प्रमोद डफरिया के अनुसार, युद्ध जैसे हालात से करीब 60 प्रतिशत उद्योग प्रभावित हो रहे हैं। गैस सिलेंडर की उपलब्धता घटने से फेब्रिकेशन उद्योग की स्थिति खराब है। स्टेनलेस स्टील, लोहा और एल्यूमिनियम के दाम बढ़ चुके हैं। डफरिया ने बताया, हम फायर ब्रिगेड वाहन बनाते हैं और कई सरकारी एजेंसियों को सप्लाई देनी है। यदि समय पर डिलीवरी नहीं हुई तो कंपनी ब्लैकलिस्ट हो सकती है। टेंडर में तय दर पर ही भुगतान मिलेगा, जबकि वर्तमान लागत बढऩे से करोड़ों का नुकसान उठाना पड़ रहा है। उनके अनुसार कंपनियों की साख दांव पर है और नुकसान झेलकर भी ऑर्डर पूरे करने की कोशिश की जा रही है।
सांवेर औद्योगिक संघ के पूर्व अध्यक्ष हरि अग्रवाल ने बताया कि प्लास्टिक उद्योग पूरी तरह क्रूड ऑयल पर निर्भर है। जंग के चलते नामी कंपनियों ने प्लास्टिक रॉ मटेरियल के भाव बढ़ा दिए हैं। प्लास्टिक दाना 100 रुपए प्रति किलो से बढ़कर 180 रुपए प्रति किलो हो गया है। इसके बावजूद समय पर माल नहीं मिल रहा। इसका सीधा असर बाजार में दिखेगा। प्लास्टिक के घरेलू और औद्योगिक उत्पाद महंगे होंगे, जिसका बोझ अंतत: उपभोक्ताओं को उठाना पड़ेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक हालात जल्द नहीं सुधरे तो महंगाई की नई लहर आ सकती है। उद्योगों की लागत बढऩे का असर धीरे-धीरे रोजमर्रा के सामानों की कीमतों में दिखाई देगा। फिलहाल इंदौर के उद्योग संकट के दौर से गुजर रहे हैं। उत्पादन घट रहा है, रोजगार पर खतरा है और बाजार अनिश्चितता से जूझ रहा है। आने वाले कुछ सप्ताह तय करेंगे कि यह अस्थायी झटका है या लंबे आर्थिक दबाव की शुरुआत।