अाॅल इंडिया बैंक कर्मचारी संघ ने पीएनबी घोटाले में लिप्त शीर्ष बैंक अधिकारियों पर कड़ी कर्रवार्इ करने की मांग की है।
चेन्नई। ऑल इंडिया बैंक कर्मचारी संघ (एआईबीईए) के एक शीर्ष नेता ने मंगलवार को कहा कि देश में तीन शीर्ष बैंकरों के खिलाफ केंद्र सरकार की कार्रवाई एक स्वागतयोग्य कदम है। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) के निदेशक मंडल में नामांकित उम्मीदवार लेटर्स ऑफ अंडरटेकिंग (एलओयू) घोटाले की जिम्मेदारी से बच नहीं सकता हैं। एआईबीईए के महासचिव सी. एच. वेंकटचलमने मंगलवार को बताया, "इलाहाबाद बैंक की प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी उषा अनंतसुब्रमण्यम और पीएनबी के दो कार्यकारी निदेशकों को उनके बैंकों से हटाना एक स्वागतयोग्य फैसला है। यह अच्छा है कि कथित आरोपियों को सिस्टम से हटा दिया जाए।"
उन्होंने कहा कि नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए, पीएनबी के मौजूदा प्रबंध निदेशक को पीएनबी से तब तक दूर हो जाना चाहिए जब तक कि कथित घोटाले की जांच पूरी नहीं हो जाती है। बता दें कि अनंतासुब्रमण्यम घोटाले के दौरान पीएनबी की अध्यक्ष थीं। सोमवार को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) में 13,000 करोड़ रुपये के नीरव मोदी घोटाले में अपना पहला चार्जशीट दाखिल किया था। वेंकटचलम ने कहा, "इसी प्रकार, पीएनबी के मौजूदा प्रबंध निदेशक सुनील मेहता को कथित घोटाले की जांच होने तक नैतिक आधार पर बैंक से दूर रहना चाहिए।"
उन्होंने कहा कि पीएनबी में पूरी प्रणाली विफल रही है और शीर्ष प्रबंधन को धोखाधड़ी की जिम्मेदारी लेनी होगी। सीबीआई ने पीएनबी में धोखाधड़ी के संबंध में दाखिल आरोपपत्र में अनंता सुब्रमण्यम और 11 बैंक अधिकारियों सहित 21 लोगों को आरोपी बनाया है, इस घोटाले का मास्टरमाइंड कथित तौर पर हीरा व्यापारी नीरव मोदी और उसका मामा मेहुल चौकसी है।