अब अगर आपके कार से अधिक धुआं निकलता है तो सरकार अापके लिए बड़ी परेशानी खड़ी कर सकती है।
नर्इ दिल्ली। भारत की वाहन कर नीति जल्द ही बदल सकती है। वर्तमान प्रणाली के विपरीत जहां वाहन पर रोड टैक्स और उत्पाद शुल्क, वाहन के लागत और इच्छित उपयोग के अनुपात में वृद्धि करता है, नई कर प्रणाली अपने टेलिपइप उत्सर्जन के आधार पर वाहन को टैक्स देने की व्यवस्था है। प्रभावी रूप से, एक बड़े आैर उच्च प्रदूषण इंजन वाले वाहन को एक ही आकार के वाहन की बजाय अब अधिक टैक्स देना होगा। वहीं एक छोटे छोटे इंजन या एक हाइब्रिड इंजन या एक इलेक्ट्रिक पावरट्रेन के साथ के लिए कम टैक्स देय होगा। प्रदुषण के आधार पर वाहनों पर इस प्रकार से टैक्स लगाकर सरकार इस बात की उम्मीद में है कि कम प्रदुषण वाले गाड़ियाें की मांग बढ़े जबिक अधिक प्रदुषण करने वोल गाड़ियां महंगी हो जाए।
ये होंगे फायदे
इसके पीछे सरकार की ये सोच है कि प्रदुषण करने वाली गाड़ियों पर मोटे टैक्स देने के बजाय लोग एेसी गाड़ियाें को खरीदेंगे आैर जिनपर उन्हें कम टैक्स देना होगा। एेसे में देश के व्हीकल निर्माताआे को एेसी आैर गाड़ियां बनाने की भी मांग बढ़ेंगी। इससे देश में प्रदुषण की स्थिति में सुधार होने की संभावना है। यह नहीं दूसरे देशों पर निर्भरता आैर महंगे पेट्रोलियम उत्पाद के आयात पर भी असर पड़ेगा। खास बात ये है कि इससे पहले भारत को एेसे कदम से पहले भी फायदा हो चुका है। जहां 4 मीटर की कंपैक्ट कार जिनकी क्षमता 1.2 लीटर पेट्रोल इंजन आैर 1.5 लीटर डीजल क्षमता थी। इन कारों पर 4 मीटर से लंबी कारों की तुलना में कम टैक्स देना था। इसके वजह से सरकार को एक्साइज ड्यूटी का भी फायदा हुआ। इसके बाद कार निर्माताआें ने पहले के अपेक्षा छोटे आैर कंपैक्ट इंजन वाले कारों को बनााने की शुरुआत दी। छोटी कारों से एक ये भी फायदा होता है कि ये रोड पर कम जगह लेती हैं।
कर्इ देशाें की सरकारें भी ले रहीं एेसे फैसले
हालांकि इस नर्इ नीति का अभी ड्राफ्टिंग ही तैयार हो पाया है। इसे जल्द ही सरकार अप्रुव करने वाली है उसके बाद इसे कानून का रूप दिया जाएगा। वैश्विक स्तर पर भी कर्इ देश निर्माताआे को कम प्रदुषण करने वाली गाड़ियों को बनाने काे बढ़ावा देते है। इसके लिए वो इन निर्माताअों से लेकर कार खरीदारों को भी कर्इ तरह के फायदे दे रहीं हैं। सरकारें खुद अलग-अलग विभागों के लिए इलेक्ट्रिक कारों की बड़े स्तर पर खरीदारी कर रहीं हैं। वहीं दूसरी तरफ कार निर्माता भी इस क्षेत्र में बड़ा निवेश करने लगे है।