
नर्इ दिल्ली। खुफिया एजेंसी ने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के अंतर्गत एक बड़ी धांधली का भंडाफोड़ किया है। जीएसटी के अंतर्गत कारोबारी गलत तरीके से इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा करके सरकार को चूना लगाते थे। इन कारोबारियों ने 2500 करोड़ रुपए की नकली खरीद पर 18 फीसदी की जीएसटी क्लेम कर 450 करोड़ रुपए का चूना लगाया है। सूत्रों के मुताबिक जो व्यक्ति इन खरीद पर फर्जी बिल जारी करता था, वो फारार हो चुका है। हालांकि सरकार ने एेसे कारोबारियों के खिलाफ समन जारी करना शुरू कर दिया है जो फर्जी बिल के जरिए कमार्इ करने की जुगत में लगे हुए हैं। एक अंग्रेजी अखबार ने मेरठ में वस्तु एंव सेवा कर खुुफिया महानिदेशालय (डीजीजीएसटीआर्इ) यूनिट की आेर से जारी एक सूचना की समीक्षा में पाया कि इसके पहले सर्विस टैक्स एवं नए जीएसटी के अनधिनियम के अनुसार, एेसे मामलों में जांच के दौरान टैक्सपेयर को सभी संबंधित दस्तावेजों को जांच एजेंसियों के सामने पेश करना होगा। इन नियमों के तहत जांचकर्ता पिछले पांच वर्ष के दस्तावेजों को भी देख सकते हैं।
कैसे देते थे धोखाधड़ी को अंजाम
कारोबारी इस धोखाधड़ी को अंजाम देने के लिए फर्जी बिल खरीदते थे जिसके बाद ये इन बिल्स पर फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा करते थे। इसका कुछ हिस्सा ये उन लोगों काे भी देते थे जो उन्हें फर्जी बिल उपलब्ध कराता था। प्रति 118 रुपए की खरीद के दावे पर इन्हें 18 फीसदी जीएसटी दर से 18 रुपए मिलता था। जिसमें से ये 3-4 रुपए फर्जी बिल विक्रेता को देते थे। ये खासकर उन उत्पादों का ही फर्जी बिल बनाते थे जिनकी कीमत अधिक हो।
टैक्स कलेक्शन को बड़ा झटका
कारोबारियों के इस रैकेट से टैक्स कलेक्शन को बड़ा झटका लगा है, क्योंकि सप्लायर ने अब बिजनेस टू कस्टमर(बी2सी) कारोबार को बिजनेस टू बिजनेस (बी2बी) में बदल दिया है। इससे इनपुट टैक्स क्रेडिट प्राप्तकर्ता को पास हो जाता है। बी2सी आपूर्ति के तहत भुगतान किया गया टैक्स सरकार के लिए एक अर्जित राजस्व है, जबकि बी2बी आपूर्ति के तहत चुकाए गए टैक्स एक दायित्व है जिसे अंतिम बी2सी आपूर्ति होने तक समायोजित किया जाएगा।
90 फीसदी इनपुट टैक्स क्लेम का सत्यापन बाकी
इसके पहले ही सरकार ने 1 जुलाई 2017 के बाद जीएसटी लागू हाेने के बाद टैक्स-पेड सामानों पर ट्रांजिशनल क्रेडिट सहित बड़े पैमाने पर चोरी का संदेह जताया था। टैक्सपेयर्स ने पिछले साल दिसंबर तक ट्रांजिशनल क्रेडिट के रूप में 1.6 लाख करोड़ रुपये से अधिक का दावा किया था। इसके बाद, केन्द्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) ने विस्तृत सत्यापन के लिए शीर्ष 50,000 ऐसे दावेदारों को खारिज कर दिया, जिनमे से 90 फीसदी दावों का विस्तुत वेरिफिकेशन किया जाना है।