पतंजलि ने अडानी की तरफ से सबमिट की गई बिड को लेकर जानकारी मांगी है। साथ ही ये भी मांग की है कि इस मामले में किसी निष्पक्ष लीगल एडवाइजर की भी नियुक्ति की जाए।
नई दिल्ली। बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि की दिवालिया हो चुकी रुचि सोया के अधिग्रहण में दिलचस्पी बढ़ती जा रही है। रुचि सोया के अधिग्रहण को लेकर पतंजलि और अडानी विल्मर के बीच लगातार जद्दोजहद चल रही है। इसी सिलसिले में पतंजलि ने अडानी की तरफ से सब्मिट की गई बिड को लेकर जानकारी मांगी है। साथ ही ये भी मांग की है कि इस मामले में किसी निष्पक्ष लीगल एडवाइजर की भी नियुक्ति की जाए।
पतंजलि ने नहीं जमा की रिवाइज्ड बिड
सूत्रों के मुताबिक, पतंजलि जो कि H-2 ने अडानी को टक्कर देने के लिए अपनी रिवाइज्ड बिड अभी तक जमा नहीं की है। 16 जून को ही कंपनी को स्वीस चैलेंज सिस्टम के तहत अपनी रिवाइज्ड बिड जमा करनी थी। अब कमेटी आॅफ क्रेडिटर्स (सीओसी) को इस बात का फैसला लेना है कि वो पतंजलि को एक और मौक देगी या नहीं। यदि सीओसी पतंजलि को नर्इ डेडलाइन नहीं देती है तो वो अडानी विल्मर को सबसे बड़े बिडर के तौर पर घोषित कर सकती है।
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पतंजलि ने उठाए सवाल
हालांकि सूत्रों का कहना है कि पतंजलि ने रुचि सोया के लेंडर्स से और अधिक जानकारी मांगी है। कंपनी ये सुनिश्चित करना चाहती है कि किस आधार पर अडानी विल्मर को सबसे बड़ा बिडर घोषित किया गया है। पतंजलि ने स्वीस चैलेंज के तहत 5700 करोड़ रुपए का बिड लगाई थी। पतंजलि ने सिरिल अमरचंद मंगलदास को लीगल एडवाइजर के तौर पर नियुक्ति को लेकर भी जवाब मांगा है जो कि पहले भी अडानी ग्रुप के साथ जुड़े रह चुके हैं।
अमरचंद की नियुक्ति पर भी उठे सवाल
ईटी को दिए गए जवाब में पतंजलि के प्रवक्ता एसके तिजारवाला ने कहा है कि वह समय रहते हुए उन्हें जवाब दे चुके हैं। इसके पहले तिजारवाला ने मीडिया रिपोर्ट के आधार पर सीरिल अमरचंद के लीगल एडवाइजर के तौर पर नियुक्ति को लेकर सवाल उठाए थे। पिछले सप्ताह ही रुचि सोया ने एक रेगुलेटरी फाइलिंग में पुष्टि की थी कि सीओसी ने अडानी विल्मर को सबसे बड़ा बिडर और पतंजलि को दूसरा सबसे बड़ा बिडर घोषित किया है। स्वीस चैलेंज सिस्टम के तहत पतंजलि के पास अभी भी अडानी से अधिक रकम बिड करने का मौका है।