
PM E-Bus Sewa Scheme: एमपी में जबलपुर शहर के सार्वजनिक परिवहन तंत्र में जल्द बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। लंबे इंतजार के बाद जुलाई से जबलपुर की सड़कों पर 40 नई वातानुकूलित (एसी) इलेक्ट्रिक बसें दौड़ती नजर आएंगी। प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना के तहत मिलने वाली इन बसों के संचालन की तैयारियां अंतिम चरण में है।
कठौंदा स्थित ई-बस डिपो का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर स्थापित किया जा रहा है। नई ई-बसों के संचालन से यात्रियों को आरामदायक और प्रदूषण मुक्त यात्रा का विकल्प मिलेगा। साथ मुक्त ही वर्षों पुरानी और जर्जर हो चुकी डीजल बसों पर निर्भरता भी कम होगी।
ई-बसों के निर्वाध संचालन के लिए कठौदा डिपो में आधुनिक चार्जिग व्यवस्था विकसित की जा रही है। यहां 200 किलोवॉट क्षमता वाले 16 से 18 हैवी चार्जर स्थापित किए जाएंगे। प्रत्येक चार्जर की कीमत लगभग 25 लाख रुपए बताई जा रही है। इनकी विशेषता यह है कि एक चार्जर से एक समय में दो बसों की वैटरियों को फास्ट चार्जिग तकनीक के माध्यम से चार्ज किया जा सकेगा। चार्जिंग स्टेशन की स्थापना और बसों के संचालन की जिम्मेदारी ग्रीन सेल मोबिलिटी समाह को सौपी गई है।
वर्तमान में लगभग 18 लाख आबादी वाले जबलपुर शहर में 55 से अधिक डीजल सिटी बसें संचालित हो रही हैं, जो केवल 14 रूटों पर सेवाएं दे रही हैं। बसों की खराब स्थिति और अनियमित संचालन के कारण यात्रियों को लंबे समय से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अधिकारियों के अनुसार पहले चरण में मिलने वाली 40 ई-बसों को उन क्षेत्रों और नए रूटों पर चलाया जाएगा, जहां अभी तक सिटी बस सेवा उपलब्ध नहीं है। इससे शहर के सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क का विस्तार होगा और अधिक लोगों को लाभ मिलेगा।
इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से डीजल आधारित परिवहन पर निर्भरता कम होगी। इससे वायु प्रदूषण और कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी। शहर में स्वच्छ और हरित परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा देने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
ई-बस डिपो लगभग तैयार हो चुका है। अब हैवी चार्जर स्थापित किए जाने हैं। संभावना है कि जुलाई से नई ई-बसों का संचालन शुरू हो जाएगा। बसों की उपलब्धता बढ़ने पर कुछ नए रूट भी शुरू किए जाएंगे।- सचिन विश्वकर्मा, सीईओ, जेसीटीएसएल
जबलपुर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेज लिमिटेड (जेसीटीएसएल) के अनुसार नई इलेक्ट्रिक बसें 32 से 36 सीट क्षमता वाली होंगी। यह परियोजना पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर संचालित की जा रही है। योजना के तहत केंद्र सरकार बसों की उपलब्धता के साथ अगले 12 वर्षों तक उनके रखरखाव और मेंटेनेंस पर होने वाला खर्च भी वहन करेगी। संचालन और तकनीकी रखरखाव की जिम्मेदारी ऑपरेटर कंपनी की होगी।