
जबलपुर. जिले में पहली बार प्राथमिक कक्षाओं के बच्चों की वास्तविक शैक्षणिक दक्षता का आंकलन करने के लिए मिशन अंकुर के तहत जिले में कक्षा दूसरी में पढ़ने वाले छात्र छात्राओं का बेसलाइन सर्वे कराया जा रहा है। जिले के 1541 स्कूलों के कक्षा 1 से 3 तक के 12,289 बच्चे इस सर्वे में शामिल होंगे। पायलट प्रोजेक्ट के तहत प्रदेश के केवल तीन जिलों जबलपुर, शाजापुर और देवास को इसमें शामिल किया गया है। सर्वे का उद्देश्य यह पता लगाना है कि बच्चे अपनी कक्षा के अनुरूप बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान में कहां तक दक्ष हैं और किन क्षेत्रों में उन्हें अतिरिक्त अभ्यास की जरूरत है। सर्वे में बच्चों की बुनियादी दक्षता को मापने के लिए प्रत्येक कक्षा के लिए अलग-अलग मापदंड तय किए गए हैं। हिंदी में चित्र बोध, शब्द पठन, वाक्य पठन और शब्द लेखन की क्षमता जांची जाएगी। गणित में संख्या पहचान, तुलना, क्रम, जोड़ और घटाव जैसी बुनियादी दक्षताओं का परीक्षण होगा।
1 से 15 सितंबर तक होने वाले बेसलाइन टेस्ट में हिंदी और गणित पर विशेष फोकस रहेगा। सर्वे के लिए जिले के 112 बीएसी और सीएसी को जिम्मेदारी दी जा रही है। सर्वे में किसी प्रकार की पक्षपातपूर्ण रिपोर्टिंग न हो और आंकड़ों की विश्वसनीयता बनी रहे, इसके लिए बीएसी-सीएसी को अपने क्षेत्र के बजाय दूसरे क्षेत्र में भेजकर बच्चों का सर्वे कराया जाएगा। वहीं, क्रॉस चेक के लिए जिले के 52 विभागों के द्वितीय श्रेणी अधिकारियों की ड्यूटी लगाई जा रही है। इस तरह एक ओर शिक्षा विभाग बच्चों की दक्षता दर्ज करेगा, वहीं दूसरे विभाग के अधिकारी इसकी वास्तविकता की जांच करेंगे। बेसलाइन सर्वे की संपूर्ण तैयारी 22 अगस्त तक पूरी की जानी है, जबकि 27 अगस्त को वर्कशॉप आयोजित कर सर्वे से जुड़े अधिकारियों-कर्मचारियों को आवश्यक प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके बाद तय प्रक्रिया के अनुसार बच्चों का मूल्यांकन शुरू होगा। इस पूरी कवायद का बड़ा उद्देश्य जिले के 70 प्रतिशत स्कूलों को निपुण शाला के रूप में विकसित करना है। इसके लिए एफएलएन यानी बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान की गतिविधियां लगातार संचालित की जा रही हैं। जन शिक्षक और बीएसी इन गतिविधियों की निगरानी कर रहे हैं। मिशन अंकुर की समन्वयक सेजल पुरोहित, राजा शुक्ला, चिन्मय, तरु और विवेक सहित शिक्षा विभाग के एपीसी अकादमिक राजेश तिवारी और डीपीसी योगेश शर्मा पूरी प्रक्रिया की निगरानी कर रहे हैं। इस पहल के लागू होने से बच्चों की शिक्षा गुणवत्ता में भारी सुधार होने के अनुमान हैं।
पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम से जोड़ा गया है। इसके लिए टेंजरिन एप तैयार किया गया है। बच्चों को प्रश्नपत्र ऑफलाइन दिए जाएंगे, जबकि उनके जवाब बीएसी-सीएसी एप पर ऑनलाइन दर्ज करेंगे। दूसरे विभागों के अधिकारी इन प्रविष्टियों और सर्वे की प्रक्रिया का क्रॉस चेक करेंगे। बेसलाइन सर्वे के बाद सामने आने वाली कमियों के आधार पर अगले करीब पांच माह तक बच्चों की दक्षता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जाएगा। मार्च में दोबारा मिडलाइन सर्वे होगा। दोनों सर्वे के परिणामों की तुलना से यह पता चलेगा कि बच्चों की सीखने की क्षमता में कितना सुधार हुआ। इसी आधार पर आगे की शैक्षणिक रणनीति तैयार की जाएगी।
दरअसल, परीक्षा लेकर अंक जुटाना उद्देश्य नहीं है। बेसलाइन से सामने आने वाले आंकड़ों के आधार पर यह तय किया जाएगा कि किस कक्षा में कौन-सी दक्षता कमजोर है और बच्चों को किस स्तर पर अतिरिक्त अभ्यास की जरूरत है। मार्च के मिडलाइन सर्वे के बाद सामने आने वाले परिणामों से यह भी स्पष्ट होगा कि पांच माह की मेहनत का बच्चों की सीखने की क्षमता पर कितना असर पड़ा। इसके बाद इसी अनुभव और आंकड़ों के आधार पर विशेष रणनीति तैयार होगी और अन्य जिलों में पहल होगी। इस पहल के लागू होने से बच्चों की िशक्षा गुणवत्ता में भारी सुधार होने के अनुमान हैं।
कक्षा 1: बच्चे से हिंदी में चार से पांच सरल शब्दों को जोडकऱ वाक्य पढ़ते बनना, गणित में 1 से 20 तक की गिनती, जोड़ और घटाव की समझ 75 प्रतिशत समझ विकसित करना है।
कक्षा 2: बच्चों को अपरिचित पाठ, अनुच्छेद से समझ, समझ, शुद्धता के साथ धारा प्रवाह 6 से 8 वाक्य पढऩा, गणित में 1 से 99 तक की गिनती, उधार के साथ जोड़-घटाव की दक्षता देखी जाएगी।
कक्षा 3: बच्चे को अज्ञात काहनी व अनुच्छेद को पढकऱ 4 से 3 प्रश्नों का उत्तर देना, 65 शब्द प्रति मिनट तक धाराप्रवाह पढऩे सहित 999 तक की तीन अंकों वाली संख्याओं का जोड़-घटाव, गुणा और भाग करने की क्षमता का विकास किया जाएगा।
समन्वयक सेजल पुरोहित ने बताया कि मिशन अंकुर अभियान के तहत प्रदेश के तीन जिलों का चयन किया गया है। इसी में जबलपुर भी शामिल है, जहां पर कक्षा 2 के बच्चों में दक्षता बढ़ाने के लिए पहल होगी। अभी बेसलाइन टेस्ट होगा। इसके बाद जो परिणाम आएगा उसके अनुसार बच्चों की तैयारी कराई जाएगी। इसके बाद मार्च माह में एक बार फिर से बेसलाइन टेस्ट होगा। इसके परिणाम के बादे कि शिक्षा के लिए रणनीति तय की जाएगी। खास बात यह है कि यह सर्वे बहुत ही बारीकी से होगा। इसमें सीएससी और बीएस स्तर पर किसी भी प्रकार की गड़बड़ी न हो, इसकेे लिए 52 विभागों के द्वितीय श्रेणी के अधिकारी क्रॉस चेक करेंगे। कहीं भी औचक निरीक्षण कर इसकी हकीकत को परखेंगे।
जिले में सितंबर माह में 1541 स्कूलों में बेसलाइन टेस्ट होना है। 12289 बच्चे ऑनलाइन सर्वे में बीएसी व सीएसी के माध्यम से भाग लेंगे। इसके लिए जिले में आवश्यक तैयारी चल रही है।