जबलपुर

कलेक्टर के इस plan से दुखियारी मां को मिली बड़ी राहत

-बच्चों सहित, माता पिता को भी मिल गया राशन
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Jan 04, 2021
पीडि़त मां जुड़वा बच्चों संग
पीडि़त मां जुड़वा बच्चों संग

जबलपुर. कलेक्टर कर्मवीर शर्मा का plan बहुतेरों को राहत पहुंचा रहा है। बस एक मैसेज भर देना होता है और जरूरतमंद की जरूरतें पूरी। इसका ताजा तरीन उदाहरण है ये दुखियारी मां जिसने तंगहाली में एक मैसेज कर अपना दुखड़ा क्या बताया कलेक्टर को फौरन उसकी सारी समस्या का निदान हो गया।

बताया जा रहा है कि दहेज के लिए ससुरला वालों ने नवविवाहिता को घर से निकाल दिया। वह जब घर से निकाली गई तो उसकी गोद में जुड़वा बच्चे थे। वह अपने मायके पहुंच तो गई पर वहां की हालत भी बहुत अच्छी नहीं है। माता-पिता दोनों ही तंगहाली में जीवन बसर कर रहे हैं। ऐसे में माता-पिता संग अपना और उन जुड़वा बच्चों के लिए दो वक्त के भोजन के लाले पड़ गए। नव विवाहिता को जब कुछ न सूझा तो उसे किसी ने कलेक्टर के केयर वॉय कलेक्टर ह्वाट्सएप पर अपना दुखड़ा लिख भेजा। फिर क्या था, कलेक्टर ने जैसे ही उस दुखियारी मां की कहानी को पढ़ा, फौरन मातहतों को निर्देश दे कर उसके घर पूरा राशन पहुंचवा दिया।

खिरहनीकला सिहोरा निवासी साक्षी मिश्रा ने केयर वॉय कलेक्टर योजना के तहत बताया कि 20 माह पहले उसका विवाह पिंडरई ढीमरखेड़ा कटनी में हुआ था। विवाह के बाद से ही ससुराल वाले उसे दहेज के लिए प्रताड़ित करने लगे थे। इस बीच उसने जुड़वा बेटियों को जन्म दिया। दहेज के लिए शारीरिक व मानसिक यातना देने वाले ससुराल वालों ने उसे घर से निकाल दिया जिसके चलते वह मजबूर होकर मायके चली आई।

उसने आगे बताया कि उसके पिता बीमार रहते हैं। लकवा पीड़ित मां भी बिस्तर पर है, जिसके कारण घर की आर्थिक स्थिति दयनीय हो गई है और वह बेटियां का भरण पोषण नहीं कर पा रही है। इतना पढ़ते ही कलेक्टर कर्मवीर शर्मा ने सिहोरा तहसीलदार राकेश चौरसिया को गृहस्थी की सामग्री लेकर साक्षी के मायके भेजा। तात्कालिक सहायता के तौर पर उसे चावल, गेहूं, शक्कर, दूध पावडर, साबूदाना, नमक दिया गया।

वैसे केयर वॉय कलेक्टर के ह्वाट्सएप नंबर पर अब तक जितनी भी शिकायत या सूचना भेजी गई सभी में त्वरित कार्रवाई हुई है। कलेक्टर शर्मा खुद प्रत्येक सूचना या शिकायत पर होने वाली कार्रवाई की समीक्षा करते हैं। पिछले दिनों रामपुर छापर निवासी 70 वर्षीय निर्मला खत्री ने मैसेज कर कलेक्टर से बेटा और बहू की प्रताड़ना से राहत मांगी थी और तहसीलदार राजेंद्र शुक्ला ने फौरन मौके पर पहुंचकर बेटा अंबर खत्री और बहू अंजलि खत्री का सामान घर के बाहर निकालकर निर्मला खत्री को मकान की चाबी सौंपी दी थी। ऐसे कई उदाहरण हैं।

Updated on:
04 Jan 2021 04:22 pm
Published on:
04 Jan 2021 04:22 pm