जबलपुर

बीजेपी की त्रिपुरा नगालैंड शानदार जीत, यहां तक गूंजे विजयी स्वर- देखें वीडियो

भाजपा ने त्रिपुरा में 25 साल बाद लेफ्ट के किले को ढहाते हुए पहली बार सत्ता हासिल कर ली है
2 min read
• •
Updated: 3 Mar 2018, 3:55 PM IST
Time to contemplate the BJP
BJP Tripura Nagaland latest Election results 2018

जबलपुर। त्रिपुरा में चुनावों में भाजपा को मिली शानदार जीत की खुशी शनिवार को संस्कारधानी में भी दिखी। एक तरह से भाजपा कार्यकर्ताओं के लिए होली के रंग और चटख हो गए। भाजपा कार्यकर्ताओं ने गली-चौराहों पर खूब रंग बरसाया। ढोल-नगाड़ों की थाप पर थिरकते हुए एक-दूसरे को त्रिपुरा में जीत की शुभकामनाएं दीं। मिठाईयों के वितरण के साथ जीत के जश्न और बधाईयों का सिलसिला देर शाम तक चलता रहा। महिला मोर्चा जबलपुर द्वारा सुबह से ही बढ़त को देखते हुए तैयारियां कर ली गई थीं। रंग गुलाल के बीच राजनीति के रंगों में सराबोर महिलाओं ने खूब डांस किया। दोपहर तक जैसे जैसे नतीजे आते गए, इनका उत्साह और बढ़ता गया।


उल्लेखनीय है कि भाजपा ने त्रिपुरा में 25 साल बाद लेफ्ट के किले को ढहाते हुए पहली बार सत्ता हासिल कर ली है। बांग्लाभाषियों की बहुलता वाले इस राज्य में 1993 के बाद से ही सीपीएम की सत्ता थी। पश्चिम बंगाल के बाद अब लेफ्ट का यह किला भी छिन गया है। कभी उत्तर और पश्चिम भारत की ही पार्टी कही जाने वाली बीजेपी का पूर्वोत्तर के राज्यों में इतनी बढ़त हासिल करना चौंकाने वाला माना जा रहा है। भाजपा की जीत से वामपंथी दल ही नहीं कांग्रेस भी चिंतित है, वहीं भाजपा और समर्थक दलों में उत्सव का माहौल है।

READ MORE-

इस महीने 14 दिन हैं विशेष मुहूर्त , मार्च में इनका होगा मंगल ही मंगल

चैत्र नवरात्रि 2018: घोड़े पर सवार होकर आ रहीं मां दुर्गा, आठ दिन रहेंगी भक्तों के घर - देखें तिथियां

भाजयुमो के पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष एवं संगठन पदाधिकारी धीरज पटेरिया के अनुसार असम में पूर्वोत्तर की अपनी पहली सरकार बनाने वाली बीजेपी के बारे में तीन साल पहले कोई यह नहीं कह सकता था कि वह त्रिपुरा में भी अपना परचम लहराएगी। त्रिपुरा में 2013 में 1.5 फीसदी वोट हासिल करने और अपना खाता भी न खोल पाने वाली बीजेपी को यह चौंकाने वाली कामयाबी मिलने की कई वजहें हैं।

- बीते 25 सालों से यहां सीपीएम की सरकार रही है। माणिक सरकार को बेहतर छवि का सीएम माना जाता रहा है, लेकिन वह भी निचले स्तर पर भ्रष्टाचार को रोकने में असफल रहे।

- बीजेपी ने त्रिपुरा में अपने संगठन को मजबूत करने के लिए पूरी ताकत लगा दी। बीजेपी के पूर्वोत्तर भारत सेल के प्रमुख रहे सुनील देवधर ने बीते दो से तीन सालों में यहां संगठन को मजबूत करने का काम किया।

- बीजेपी के लिए इसके साथ ही योगी फैक्टर भी अहम रहा। त्रिपुरा में सीएम योगी आदित्यनाथ ने जिन 7 जगहों पर सभाओं को संबोधित किया, उनमें से 5 स्थानों पर जीत मिली। इसकी बड़ी वजह त्रिपुरा में नाथ संप्रदाय की बड़ी आबादी होना भी है।

- बीजेपी ने चुनाव से पहले संगठन को पूरी तरह कसते हुए पन्ना प्रमुख की रणनीति पर काम किया। इसके चलते वह काडर को उत्साहित करने में सफल रही और गली-गली तक अपने संपर्क को मजबूत करने का काम किया, जो वोट में तब्दील हुआ।

- कांग्रेस इस राज्य में तेजी से कमजोर हुई है, इसके कई दिग्गज नेताओं को बीजेपी अपने पाले में लाने में सफल रही है। भगवा दल की अहम सफलता के पीछे यह भी एक बड़ी वजह है।

- कांग्रेस को 2013 के असेंबली इलेक्शन में 36 फीसदी वोट मिले थे, जो इस बार घटकर सिर्फ 2 फीसदी रह गया। साफ है कि कांग्रेस के बिखरे वोट को बीजेपी ने अपने पक्ष में करने में सफलता हासिल की।

Published on: